Article 142 Extraordinary Powers ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Article 142 Extraordinary Powers: सुप्रीम कोर्ट ने अपनी ‘असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए बंगाल में न्यायिक अधिकारी तैनात करने का निर्देश दिया है, जो एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के ‘तार्किक विसंगति’ मामलों को तय करेंगे और उनका फैसला सुप्रीम कोर्ट का फैसला माना जाएगा। यह निर्देश इसलिए दिया गया है ताकि राज्य में मतदाता सूची का एसआईआर तेजी से पूरा हो सके।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची और न्यायाधीश विपुल एम। पंचोली की खंडपीठ ने 20 फरवरी को राज्य सरकार की आपत्ति के बावजूद चुनाव आयोग को यह अनुमति दी कि वह 28 फरवरी 2026 को संशोधित मतदाता सूची प्रकाशित कर सकता है, जो कि कुल सूची का 95 प्रतिशत है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के इस आग्रह की भी स्वीकार नहीं किया कि मतदाता सूची में शामिल किए जाने के दावों पर अंतिम निर्णय इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ईआरओ) का होना चाहिए न कि न्यायिक अधिकारियों का। सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत इस मामले में अप्रत्याशित हस्तक्षेप करने का फैसला क्यों लिया? खंडपीठ के अनुसार, उसे ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि बंगाल में चुनाव आयोग व राज्य सरकार के बीच विश्वास के अभाव व असहयोग के कारण ‘असाधारण स्थिति’ उत्पन्न हो गई थी।
खंडपीठ ने कहा, ‘अगर कुछ अनपेक्षित कारणों से एसआईआर मुकम्मल नहीं हो पाती है तो उसके परिणाम क्या होंगे, राज्य को इस बात का एहसास होना चाहिए, अगर मतदाता सूची समय पर तैयार नहीं होगी तो राज्य में समय पर विधानसभा चुनाव नहीं हो पाएंगे और केंद्र को बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने का बहाना मिल सकता है।
क्योंकि वह ममता बनर्जी को कार्यवाहक सरकार चलाने का मौका तो देने से रहा, उसके लिए तो राज्यपाल के जरिए शासन करना अधिक लाभकारी होगा। चुनाव आयोग ने 17 राज्यों व 5 केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि अप्रैल 2026 से आरंभ होने वाली एसआईआर के लिए सभी कार्य जल्द से जल्द पूरा कर लें। सबसे पहले एसआईआर पिछले साल बिहार में कराई गई।
दूसरे चरण में चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर 2025 को 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का आदेश दिया, जो अब पूर्ण होने के चरण में है। अंतिम तिथि को सबसे अधिक बार उत्तर प्रदेश में बढ़ाया गया।
असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस की अधूरी प्रक्रिया के कारण कानूनी बाधाएं थीं, इसलिए एसआईआर की जगह एसआर कराया गया था। चुनाव आयोग को यह भी ध्यान में रखना होगा कि अप्रैल में जनगणना का कार्य भी आरंभ होना है।
चूंकि जनगणना व एसआईआर का अधिकतर काम सरकारी अध्यापकों के जिम्मे ही थोप दिया जाता है, इसलिए इस बात पर ध्यान देने की भी आवश्यकता है कि इन कर्मचारियों पर ज्यादा बोझ न पड़े, वैसे ही काम की अधिकता व तनाव की वजह से अनेक बीएलओ ने आत्महत्या की या हृदय रोगों ने समय-पूर्व ही उनकी जान ले लीं।
यह भी पढ़ें:-नवभारत निशानेबाज: महुआ, पूर्व प्रेमी और कुत्ता नहीं मिल पाया संरक्षण का छत्ता
चुनाव आयोग ने दोनों रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया और सेंसस कमिश्नर से बैठकें की हैं कि प्रशासनिक संसाधनों के साझा पूल का सही से इस्तेमाल दोनों एसआईआर व जनगणना के लिए कैसे किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वह न्यायिक अधिकारियों का चयन वर्तमान व रिटायर्ड जिला न्यायाधीशों व अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों में से करें, जो न्यायिक अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे वह ही ‘तार्किक विसंगति’ की श्रेणी के तहत जो मतदाता रखे गए हैं, उनके दावों व आपत्तियों के फैसले करेंगे, खंडपीठ के अनुसार, न्यायिक अधिकारी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान दावों व कागजात की समीक्षा करते हुए जो आदेश पारित करेंगे वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश माना जाएगा और एसपी व डीएम को तुरंत उसका पालन करना होगा, बंगाल में एसआईआर के मुकम्मल न होने को लेकर चुनाव आयोग व राज्य सरकार में जबरदस्त टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
–लेख शाहिद ए चौधरी के द्वारा