नवभारत संपादकीय: शेयर मार्केट पर पड़ती मंदी की मार
Stock Market Fall: ईरान युद्ध की आशंका व तेल आपूर्ति संकट के कारण वैश्विक बाजारों में गिरावट देखी जा रही है। सेंसेक्स 81,287 से गिरकर 77,566 पर आ गया, निक्केई व कोस्पी में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।
- Written By: अंकिता पटेल
Iran War Market Impact ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Iran War Market Impact: शेयर मार्केट डाउन चल रहा है। शॉर्ट टर्म इन्वेस्टर भारी नुकसान उठा रहे हैं। ईरान युद्ध शुरू होने से एक दिन पहले 27 फरवरी को सेन्सेक्स 81,287 अंक पर था, जो सोमवार को गिरकर 77,566 पर आ गया।
विदेशी बाजारों का ज्यादा बुरा हाल है, निक्केई 10.5 प्रतिशत गिरा जबकि कोस्पी 16 फीसदी गिरा, मंदी की वजह यह है कि होमुंज की खाड़ी बंद किए जाने से तेल टैंकरों का आना बाधित हो गया है।
न तो वहां से सामान भेजा जा सकता है, न गैस व क्रूड आ सकते हैं। कोरिया को कतर से आने वाली हौलियम गैस नहीं मिल पा रही है, जो कि मेमोरी चिप बनाने के लिए लगती है।
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इससे निवेशकों का विश्वास डोल गया है। भारत की बात दूसरों से अलग है, जिसने फिलहाल इस तूफान को झेल लिया है, लेकिन यदि युद्ध कुछ सप्ताह और खिंच गया, तो ऊर्जा संकट से परिवहन के अलावा विनिर्माण प्रभावित होगा।
गैस का संकट देखते हुए होटल व रेस्टोरेंट भी अपने मेनू में बदलाव कर रहे हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों को बनाना टाला जा रहा है, जिन्हें अधिक आंच में देर तक पकाना पड़ता है।
यदि रिजर्व बैंक महंगाई रोकने के लिए ब्याज दर बढ़ाता है तो निवेश के अलावा ग्राहकों की मांग धीमी पड़ जाएगी, ऐसी अनिश्चिततापूर्ण स्थिति में विदेशी निवेशक भारत की ओर देख रहे हैं। यदि उनका विश्वास डोल गया और उन्होंने निवेश वापस खींच लिया तो बाजार तेजी से गिर जाएगा।
इसका नतीजा यह होगा कि एसआईपी में लगातार पैसा लगाने वाले घरेलू निवेशकों को करारा झटका लगेगा। जिनका दीर्घावधि निवेश होगा वह धैर्य के साथ इस संकट का मुकाबला कर सकते हैं। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अनेक स्तंभों पर टिकी है।
नई पीढ़ी काफी खर्च करते हुए उपभोग को बढ़ावा दे रही है। बाजारों में भीड़ है। यह जीडीपी में 61 फीसदी से ज्यादा का योगदान देगी, आयकर में रिबेट, जीएसटी दर में कटौती तथा श्रीमी मुद्रास्फीति की वजह से उपभोक्ताओं के पास खर्च करने के लिए पैसा है।
इसके बावजूद यदि ऊर्जा के बढ़ते दाम की वजह से अगले कुछ हफ्तों में महंगाई बढ़ती है तो उपभोग में कमी आएगी। बाजार पर भी इसका असर पड़ेगा। यद्यपि युद्ध पर काबू पाना या उसकी अवधि कम करना भारत के हाथ में नहीं है लेकिन देखना होगा कि लोग घबराएं नहीं और भरोसा रखें कि युद्ध समाप्त होगा तथा तेल व गैस की आपूर्ति सुचारु हो जाएगी। समय के साथ हालात सुधर ही जाते हैं इसलिए धैर्य नहीं खोना चाहिए।
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यदि रिजर्व बैंक महंगाई रोकने के लिए ब्याज दर बढ़ाता है तो निवेश के अलावा ग्राहकों की मांग धीमी पड़ जाएगी। ऐसी अनिश्चिततापूर्ण स्थिति में विदेशी निवेशक भारत की ओर देख रहे हैं। यदि उनका विश्वास डोल गया और उन्होंने निवेश वापस खींच लिया तो बाजार तेजी से गिर जाएगा।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
