नवभारत संपादकीय: समान न्याय या दोहरे मापदंड? मीनाक्षी नटराजन मामले में घिरा चुनाव आयोग
Rajya Sabha Election Controversy: मध्य प्रदेश और झारखंड के राज्यसभा चुनावों में नामांकन प्रक्रियाओं को लेकर निर्वाचन आयोग पर गंभीर सवाल उठे हैं। विपक्ष ने सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।
- Written By: आकाश मसने
मीनाक्षी नटराजन व चुनाव आयोग (डिजाइन फोटो)
Meenakshi Natarajan Nomination Cancelled: चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि चुनाव स्वतंत्र व निष्पक्ष रूप से कराए जाएं जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष को समान न्याय मिले। क्या आज ऐसी स्थिति है? इन दिनों चुनाव विवादग्रस्त होते जा रहे हैं और लोगों का विश्वास खंडित होने लगा है। मध्य प्रदेश व झारखंड के राज्यसभा चुनाव में संदेहास्पद स्थिति देखी गई। मध्य प्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी को एक न्याय, जबकि झारखंड में बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को झुकता माप दिया जाना चुनाव मशीनरी की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगाता है।
कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द
मध्य प्रदेश में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म चुनाव अधिकारी ने यह कहकर रद्द कर दिया कि उन्होंने अपने शपथपत्र में जानकारी छुपाई है। नटराजन के खिलाफ गत वर्ष कांग्रेस की एक पूर्व पदाधिकारी व नगरसेविका ने हैदराबाद की अदालत में निजी शिकायत दाखिल की थी। नटराजन को गत वर्ष कांग्रेस की सत्ता वाले तेलंगाना राज्य में पार्टी का प्रभारी नियुक्त किया गया था। उस महिला ने उसे सताने वाले कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग मीनाक्षी नटराजन से की थी।
मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि ऐसे कार्यकर्ताओं को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। इस पर शिकायतकर्ता महिला ने यह बात लिखित रूप से देने की मांग की। इस पर नटराजन ने ध्यान नहीं दिया। उस महिला की शिकायत पर हैदराबाद की अदालत में नटराजन को नोटिस भेजा जिसका उन्होंने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई गुनाह दर्ज नहीं है। महिला द्वारा दर्ज शिकायत भी फौजदारी नहीं है इसलिए मीनाक्षी ने उस शिकायत का प्रतिज्ञापत्र में उल्लेख नहीं किया। यह कांग्रेस का तर्क है।
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विधायकों को बेंगलुरु ले जाने का था प्लान
बीजेपी ने आपत्ति उठाई कि नटराजन ने उनके खिलाफ न्यायालय में दाखिल प्रकरण की जानकारी छुपाई। चुनाव अधिकारी ने इसे मानकर मीनाक्षी का नामांकन दाखिला रद्द कर दिया। यह गलती मीनाक्षी को महंगी पड़ी और कांग्रेस को राज्यसभा की एक सीट गंवानी पड़ी। नटराजन की उम्मीदवारी के प्रति मध्य प्रदेश के नेताओं का विरोध था। वोट न फूटने पाएं, इसके लिए विधायकों को बेंगलुरु ले जाने के उद्देश्य से विशेष विमान भी मंगवाया गया था। हर चुनाव में बीजेपी की ओर से कांग्रेस की राह में बाधा डाली जाती है।
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झारखंड में भाजपा को मिला गलती सुधारने का समय
दूसरी ओर झारखंड में बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार व बड़े उद्योगपति परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी आवेदन पर कांग्रेस ने आपत्ति उठाई, तो गलती दुरुस्त करने के लिए चुनाव अधिकारी ने दूसरे दिन तक का समय दे दिया। नाथवानी ने नाम का क्रम लिखने में गलती की थी, लेकिन मुद्दत बढ़ाकर उन्हें गलती ठीक करने का मौका दिया गया। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग पक्षपात करता है। वह बीजेपी नेताओं को शपथपत्र में छुपाए गए तथ्यों या गुनाह के बारे में उठाई गई आपत्ति पर ध्यान नहीं देता। यद्यपि राज्यसभा में एनडीए के पास पर्याप्त संख्याबल है, लेकिन फिर भी वह विपक्ष को 1 सीट भी हासिल करने में बाधा डालता है।
