नवभारत संपादकीय: मौत बेचने वालों पर कब लगेगी लगाम? मौत के मुंह में ले जाने वाली विषैली शराब
Toxic Liquor Deaths: पुणे क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों ने अवैध शराब कारोबार और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
- Written By: अंकिता पटेल
जहरीली शराब, अवैध कारोबार,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Illicit Liquor Death Case: आखिर कब तक लोग जहरीली शराब पीकर अपनी जान गंवाते आ रहेंगे? देश के विभिन्न हिस्सों में बार-बार ऐसे कांड होते हैं, जिनकी बजह से कितने ही परिवार पूरी तरह निराश्रित होकर सड़कों पर आ जाते हैं। मिलावटी शराब पीकर मरने वाला अपने पीछे बूढ़े माता-पिता, पत्नी और बच्चों को बेबस व बेसहारा छोड़ जाता है। ऐसी शराब बनाने और बेचने वाले मौत के सौदागरों को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए। शराब को और मादक व किक देने वाली बनाने के लिए इस धंधे से जुड़े लोग मेथेनॉल व स्पिरिट जैसा घातक रसायन मिला देते हैं।
शराब की लत पहले ही स्वास्थ्य के लिए अत्यंत नुकसानदायक है जिससे लिवर खराब हो जाता है और शरीर खोखला व कमजोर हो जाता है। देसी शराब में जहरीले रसायन की मिलावट उसे पूरी तरह जानलेवा बना देती है। पुलिस और आबकारी अधिकारियों की नाक के नीचे यह गोरखधंधा चलता है। जब बड़ी तादाद में लोगों की मौत होती है तो इनकी करनी सामने आती है। पुणे, हडपसर और पिंपरी चिंचवड में जहरीली शराब पीने से मरने वालों की तादाद 2 दर्जन हो चुकी है। अब तक 22 कर्मियों को निलंबित किया गया है जिनमें पुलिस व राज्य आबकारी शुल्क विभाग के कर्मचारियों का समावेश है। इनकी मिलीभगत के बगैर यह अवैध कारोबार चल ही नहीं सकता था।
जहरीली शराब के नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई जरूरी
अपने लालच के वशीभूत होकर जहरीली शराब बनाने वाले उसमें नौसादर, इंडस्ट्रियल अल्कोहल जैसे कितने ही जहरीले तत्वों की मिलावट कर देते हैं। आम तौर पर विषैली शराब से मौत के मामले ऐसे राज्यों में हुआ करते हैं जहां शराबबंदी लागू है लेकिन महाराष्ट्र में तो ऐसा नहीं है। यहां गांव-गांव में देसी शराब की दुकान है। गांव में चाहे पेयजल न मिले लेकिन ऐसी दुकान अवश्य मिल जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में नशामुक्ति व जनजागृति का कार्य राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज तथा संत गाडगे बाबा ने किया था। आज भी उसी प्रवाह को आगे बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे प्रकरण में सिर्फ विक्रेता ही नहीं, पूरा निर्माण व सप्लाई नेटवर्क पकड़ा जाना चाहिए।
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जहरीली शराब निर्माता व उसके सहयोगी, सप्लाई करने वाला तथा इसे जानते हुए भी कार्रवाई न करने वाले पुलिसकर्मी सभी के खिलाफ प्रभावी एक्शन लिया जाना चाहिए, मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह केवल हादसा नहीं बल्कि संगठित अपराध है। जिसकी सीआईडी जांच कराई जा रही है। राज्य सरकार इस त्रासदी में मरने वालों के परिजनों को 5 लाख रुपए की सहायता करेगी।
ऐसी त्रासदी कहीं भी हो सकती है। इसलिए राज्य में जगह-जगह पर अवैध शराब बनाने वालों और विक्रेताओं पर कार्रवाई की जाए, जो भी कर्मचारी या अधिकारी ऐसे मामलों की अनदेखी करते हैं या भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, उन्हें भी न बक्शा जाए। समय रहते अवैध शराबभट्टियों को नष्ट करना और पड़ोसी राज्यों या जिलों से आने वाली सप्लाई को रोकना आवश्यक है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
