नवभारत विशेष: केबल कार सफर को सुरक्षित बनाया जाए, पर्यटकों को न बनाएं खतरों के खिलाड़ी

Gulmarg Gondola Incident: गुलमर्ग गोंडोला सेवा में आई तकनीकी बाधा ने पर्यटक सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देशभर में रोपवे परियोजनाओं के विस्तार के बीच सुरक्षा मानकों पर बहस तेज हो गई है।
Navbharat Special: Cable Car Journeys Must Be Made Safe Do Not Turn Tourists into Daredevils.
गुलमर्ग गोंडोला, पर्यटक सुरक्षा, रोपवे,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Kashmir Gondola Safety Concerns: पहलगाम के उन्मादी हत्याकांड के एक वर्ष बाद बूम पर आए जम्मू-कश्मीर के पर्यटन को केबल कार उर्फ गोंडोला हादसे ने झटका दे दिया है। यह हादसा उस समय हुआ जब केबल कार सेवा पूरी क्षमता से दोगुनी अधिक भीड़ के साथ वर्षा के बीच जारी थी। एक झटके में केबल कार ने रुककर 7 घंटे तक पर्यटकों को जिंदगी-मौत के साये में रखा। पहले भी यहां पर हादसे हुए हैं और लोगों की जानें गई हैं। इसके बाद भी पर्यटकों को सुरक्षित यात्रा मिले इस पर संभवतः कम ही काम हुआ है। जम्मू कश्मीर देश के अति संवेदनशील राज्यों में पहले 3 राज्यों में आता है और यहां पर सेना हमेशा सुरक्षा के लिए तत्पर रहती है। हादसे के समय सेना इसी कारण से तुरंत पहुंच गई। गोंडोला इस वक्त पूरे देश में पर्यटक सुविधा में प्राथमिकता पर है। खासकर उन स्थानों पर जहां पर पर्यटकों का बूम रहता है।

कश्मीर में गुलमर्ग में एक दिन में 8 हजार तक पर्यटक इसका लाभ लेते हैं, तो औली में लगभग 500, उदयपुर में 5 हजार, मसूरी में 1500 के आसपास, नैनीताल में 1300 से अधिक, शिमला के जाखू में प्रतिघंटा 1 हजार, दार्जिलिंग में 500 पर्यटक इनमें बैठकर हवा में उड़ने का आनंद महसूस करते हैं। इसके अतिरिक्त देश के दूसरे हिस्सों में भी अन्य केबल कार में पर्यटक आते-जाते हैं। लेकिन खास बात यह है कि दुर्घटना की सबसे अधिक शिकायतें गुलमर्ग से ही आती हैं। उत्तराखंड में रोपवे की जितनी योजनाएं हैं, उतनी पूरे भारत में और कहीं नहीं हैं। केदारनाथ यात्रा को सुगम करने के लिए लगभग 13 किलोमीटर लंबी योजना 4 हजार करोड़ की है।

रोपवे परियोजनाएं बढ़ीं, सुरक्षा पर उठे सवाल

हेमकुंड साहिब में जो रोपवे बनेगा, जो 3 हजार करोड़ की लागत का है। काठगोदाम से नैनीताल कैंचीधाम के लिए रोपवे योजना है, देहरादून से मसूरी के लिए भी रोपवे बनाए जाने की योजना है। बर्नाला द्वारा बुग्याल तक रोपवे, कार्तिक स्वामी मंदिर तक भी रोपवे बनेगा। इसके अतिरिक्त नैनीताल मसूरी, औली में रोपवे पहले ही से चल रहे हैं। सरकारी घोषणा के आधार पर करीब 50 से अधिक रोपवे की योजनाएं यहां हैं। माता पूर्णागिरी में बनने वाला रोपवे अब पूरी रफ्तार से बन रहा है। इसके 2-3 वर्षों में संचालन में आने की उम्मीद है। राजस्थान में जयपुर में रोपवे के लिए लंबे समय से लड़ाई है। यहां के गढ़ गणेश मंदिर के लिए इसकी मांग चल रही है और सामोद में जो बना हुआ है, वह विवादस्पद हो चुका है। कम चढ़ाई वाले खोले के हनुमान जी में तो रोपवे बना दिया गया है।

इसी तरह से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी रोपवे की योजनाएं हैं। बाबा केदारनाथ में जो रोपवे अर्थात केबल कार प्रोजेक्ट है, जब वह पूरा हो जाएगा तो देश का सबसे अधिक यात्रियों वाला बन जाएगा। बताया जाता है इसकी क्षमता प्रतिदिन 20 हजार तक हो सकती है। अब यहां पर इस बात पर ध्यान देना होगा कि सुविधाएं तो मिल रही हैं और इनसे पर्यटन आय भी बढ़ रही है पर क्या ये केबल कार योजनाएं वास्तव में हमारी जरूरत हैं या यह पूरी तरह सुरक्षित सफर देने में कामयाब हैं।

पर्यटकों को न बनाएं खतरों के खिलाड़ी

कश्मीर के गुलमर्ग में भले ही 24 मई को कोई घायल भी नहीं हुआ पर जिस तरह से बारिश और खतरों के बीच ऑपरेशन चला, वह यह बताने के लिए काफी है कि केबल कार योजनाओं को खतरों के देखते हुए ही अब अमली जामा पहनाया जाए? केदारनाथ को देखिए, यहां पर जो केबल कार चलेगी वह न सिर्फ जंगलों में सफर कराएगी बल्कि उसके रास्ते में वह पहाड़ भी होंगे जो नदियों के पानी से कभी भी तर हो जाते हैं, वह जंगल होगा जहां पर जंगली वन्य जीवों का आना-जाना लगा रहता है। यहां पर मददगार एजेंसियां उतनी तेजी से मदद नहीं कर सकती, जितनी तेजी से दूसरे स्थानों पर।

लेख-मनोज वाष्र्णेय के द्वारा

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