नवभारत संपादकीय: अमेरिका को अंबानी की रिफाइनरी क्यों जरूरी?
Reliance US Refinery: डोनाल्ड ट्रंप और मुकेश अंबानी के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता! टेक्सास में 300 अरब डॉलर के निवेश से बनेगी 'अमेरिका फर्स्ट' रिफाइनरी, जो बदल देगी वैश्विक तेल बाजार का समीकरण।
- Written By: आकाश मसने
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
Mukesh Ambani Donald Trump Deal: अमेरिका बगैर मतलब के कोई काम नहीं करता। भारत की क्षमताओं को डोनाल्ड ट्रंप भलीभांति जानते हैं। उन्हें वेनेजुएला के तेल भंडार पर कब्जा तो मिल गया, लेकिन वहां का क्रूड ऑयल खट्टा या अम्ल श्रेणी का है, जिसे हैवी सोर कहा जाता है। अमेरिका के तेल शोधक संयंत्र (रिफाइनरी) इसे प्रोसेस कर पेट्रोल व डीजल बना पाने में असमर्थ हैं। क्योंकि वह अब तक हल्के मीठे (लाइट स्वीट) क्रूड को ही रिफाइन करते रहे हैं।
ईरान के साथ युद्ध की वजह से खाड़ी देशों से क्रूड ऑयल मिलने में व्यवधान आ रहा है। ऐसे समय अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की मदद की अमेरिका को जरूरत पड़ गई, जिसके पास हैवी सोर ऑयल को प्रोसेस करने की क्षमता व हुनर है। मुकेश अंबानी की जामनगर स्थित रिफाइनरी नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स में ऊंचे स्थान पर है।
रिलायंस ग्रुप ने अमेरिका फर्स्ट के साथ की साझेदारी
ट्रंप ने घोषणा की कि रिलायंस ग्रुप ‘अमेरिका फर्स्ट’ के साथ विश्व की सबसे बड़ी रिफाइनरी में 300 अरब डॉलर का निवेश करने जा रहा है। इस रिफाइनरी का निर्माण अमेरिका-मेक्सिको सीमा के पास स्थित टेक्सास राज्य के ब्राउन्सविले में होगा। यह किसी नई ऑइल रिफाइनरी में सबसे बड़ा निवेश है, जिसमें हजारों अमेरिकियों को नौकरी मिलेगी। रिलायंस ने अमेरिका फर्स्ट रिफाइनरी के साथ 20 वर्ष की बाध्यकारी या अनिवार्य ऑफ टेक शीट पर हस्ताक्षर किए हैं।
सम्बंधित ख़बरें
Navabharat Nishanebaaz: राजनीति में चूहे-बिल्ली का खेल, क्या विपक्ष में हो पाएगा मेल?
पेट्रोलियम Export Duty Hike से डीजल 14 रुपये और ATF 12.50 रूपये प्रति लीटर महंगा, नई कीमतें आज से लागू
Explainer: क्या है मनी म्यूल स्कैम, गरीबों के बैंक खाते से कैसे हो रहा करोड़ों का फ्रॉड? आसान भाषा में समझें
Explainer: काला धन के खिलाफ सरकार सख्त, क्या है FAST-DS नियम; जिससे विदेशों में जमा पैसे आएंगे वापस?
रिलायंस 20 वर्षों तक रिफाइनरी के उत्पादों को पूरी तरह खरीदेगा। इस रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता 1,68,000 बैरल प्रतिदिन होगी। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की कुल प्रोडक्शन कैपेसिटी भी 1.6 लाख बैरल है। ट्रंप भारत से रेसीप्रोकल या परस्पर व्यापार संबंध चाहते हैं। भारत सरकार की दूरदर्शी नीति के अनुरूप यह कदम है, जिसमें वह अमेरिका में निवेश को बढ़ावा देते हुए रूस से तेल खरीदती रहेगी। यह नीति इसलिए व्यावहारिक है जिसमें इजराइल से मित्रता, ईरान से चर्चा भी शामिल है। इसमें किसी से भावुकता में बहने की बजाय भारत के हितों का ध्यान रखा गया है।
यह भी पढ़ें:- नवभारत निशानेबाज: कैबरे गीत में दैवीय अनुभूति श्रेया घोषाल की मारी गई मति
रिलायंस का अमेरिकी कंपनी के साथ यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण सौदा है। अब हमारे देश की कंपनियां मल्टीनेशनल बनती जा रही हैं और विदेशियों को रोजगार देने लगी हैं, यह भारत की कूटनीतिक सफलता है कि यूएई का पूरा शाही परिवार गत 19 जनवरी को दिल्ली आया हुआ था। 25 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी इजराइल की राजकीय यात्रा पर थे। रायसीना डायलॉग के लिए ईरान के कनिष्ठ विदेशमंत्री दिल्ली आए थे। भारत ने 2 ईरानी जहाजों को अपने समुद्री क्षेत्र में शरण दी। भारत में निवेश के लिए चीन सरकार ने अपनी कंपनियों के लिए नियमों में संशोधन किया। इससे भारत में चीनी पूंजी और तकनीक आएगी।
