इसे कहते हैं विविधता के साथ जीना, राहुल गांधी ने सीखा कैसे चप्पल सीना

राहुल गांधी ने हाल ही में सुल्तानपुर जिले में रामचेत नाम के मोची से मुलाकात कर उनके काम और मुश्किलों के बारे में जाना था। इस दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता ने एक चप्पल भी सिली थी। उन्होंने रामचेत से मुलाकात का वीडियो साझा करते हुए कहा कि भारत में करोड़ों ऐसी प्रतिभाएं हैं, जिन्हें सहयोग मिले तो वो देश की तकदीर बदल सकते हैं।
Rahul Gandhi learned the skill of stitching slippers at the Ramchet shop Sultanpur
(डिजाइन फोटो)
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पड़ोसी ने हमसे कहा, "निशानेबाज, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी कभी-कभी ऐसे अनोखे कारनामे करते हैं जो बीजेपी नेताओं को हैरत में डाल देते हैं। उन्होंने हमेशा मोदी का विरोध किया लेकिन एक मोची से दोस्ती कर ली। दरअसल राहुल की चप्पल टूट गई थी तो सुलतानपुर के मोची रामचेत की दूकान पर गए और वहां चप्पल सीने का हुनर भी सीख लिया। वह चर्मकार अपने यहां राहुल को आया देखकर धन्य हो गया। राहुल ने उसके धंधे और परिवार के बारे में आत्मीयता से पूछताछ की। राहुल ने उसकी दूकान पर जिस चप्पल को खुद सिया, उसे वह मोची किसी भी कीमत पर बेचने को तैयार नहीं है। वह उसे फ्रेम में मढ़कर किसी मेमेंटो या स्मृतिचिन्ह के रूप में अपने यहां संजोकर रखेगा। राहुल गांधी कभी ट्रक ड्राइवर से तो कभी कुलियों से बात करते हैं तो कभी मोची से मित्रता कर लेते हैं। बीजेपी नेता व्यर्थ ही उन्हें शहजादा कहते हैं जबकि वह आम जनता से घुलते-मिलते हैं।"

हमने कहा,"आपने चप्पल की चर्चा की तो हम आपको बता दें कि चप्पल से गांधी का रिश्ता पुराना है। जब महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका की जेल में कैद थे तब उन्होंने वहां चमड़ा काटकर और सीकर चप्पल बनाना सीखा हालांकि तब वह बैरिस्टर के रूप में वकालत किया करते थे। बापू ने बड़ी लगन के साथ चप्पल का जोड़ा तैयार किया और उसे दक्षिण अफ्रीका के गवर्नर जनरल स्मट्स को उपहार के तौर पर भेजा। स्मट्स ने ही गांधी को जेल भेजा था। वह गांधी की ऐसी विनम्रता और सज्जनता देख आश्चर्यचकित रह गया।"

पड़ोसी ने कहा, "निशानेबाज, महात्मा गांधी की बात अलग थी। यह मत समझिएगा कि राहुल गांधी चप्पल बनाकर पीएम मोदी को पहनने के लिए भेंट करेंगे। हमारी राय है कि राहुल चप्पल पहनना छोड़ दें और बाहर जाते समय हमेशा बूट पहनें। चप्पल का पट्टा कभी भी टूट जाता है जिससे लंगड़ाकर या पैर घसीटकर चलना पड़ता है। बूट में पैर सुरक्षित रहता है। जब चप्पल नहीं थी तो लोग लकड़ी की खड़ाऊं या चरण पादुका पहना करते थे। भगवान राम की चरण पादुका अयोध्या के राजसिंहासन पर विराजमान कर भरत ने एक ट्रस्टी की भांति 14 वर्ष तक राजकाज चलाया था। दुनिया में भारत ही ऐसा देश है जहां 'खड़ाऊं राज' चला था।" लेख चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

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