नवभारत संपादकीय: महंगाई का डबल अटैक! गैस, पेट्रोल से लेकर स्कूल खर्च तक सब महंगा; महंगाई की मार से जनता बेहाल
Rising Cost Inflation: गैस, पेट्रोल-डीजल, खाद्य सामग्री और शिक्षा खर्च में बढ़ोतरी से आम लोगों का बजट बिगड़ गया है। बढ़ती महंगाई के बीच बचत घटने की आशंका भी जताई जा रही है।
- Written By: अंकिता पटेल
महंगाई, रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, बढ़ती कीमतें,(सोर्स: सौजन्य AI)
Impact Of Rising Inflation: देश की जनता कमरतोड़ मंहगाई से कराह रही है। हर सुबह किसी न किसी चीज का दाम बढ़ने का संदेश लेकर आती है। सीमित आय वाले लोगों का जीना मुहाल हो गया है। 3 महीने में रसोई गैस के दाम 89 रुपये बढ़ गए। व्यावसायिक सिलेंडर 1150 से 1250 रुपये महंगा हो गया। पेट्राल-डीजल के दाम में प्रति लीटर 7.50 रुपये की वृद्धि हुई।
डीजल महंगा होने से माल की ढुलाई महंगी हो गई, इसलिए सब्जी, फलों व खाद्य तेल के दाम 10 से 15 प्रतिशत बढ़ गए, पंखे, कूलर, एयरकंडीशनर जैसे विद्युत उपकरण तथा मोबाइल, लैपटॉप सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं के दाम में भी काफी वृद्धि हो गई। सिलेंडर महंगा होने से होटल-रेस्टोरेंट में लगभग 10 प्रतिशत रेट बढ़ गए, परिवहन लागत में वृद्धि हो गई।
ओला-उबर ने किराया दरें बढ़ा दीं। स्कूल बस किराए में भी 10 से 15 प्रतिशत वृद्धि के आसार हैं। कॉपी-किताबें, यूनिफार्म के दाम में 20 से 30 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। इस वर्ष के शुरू के 2 महीनों में सब कुछ ठीक था, लेकिन 24 फरवरी से पश्चिम एशिया में शुरू युद्ध के बाद से महंगाई रूपी नागिन फुफकारने लगी। इन 100 दिनों में जीवनावश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छूने लगे। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती महंगाई की वजह से देश की कुल बचत 34 प्रतिशत से घटकर 30 प्रतिशत पर आने का अनुमान है।
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जब सभी वस्तुओं व सामानों के दाम बढ़ रहे हैं तो कोई क्या धोएगा और क्या निचोड़ेगा? महंगाई दर 5.1 प्रतिशत ऊपर जाने का अनुमान होने से दैनंदिन खर्च बढ़ गया। म्यूचअल फंड, शेयरबाजार में निवेश तथा बैंकों में बचत पर भी विपरीत प्रभाव देखा जा रहा है। महंगाई के पीछे वैश्विक परिस्थितियों को कारण बताया जा रहा है और देशवासियों से मितव्ययी बनने की अपील की गई है।
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ऐसी स्थिति में जनता को राहत देने के यथासंभव उपाय किए जाने चाहिए। सरकार स्वयं प्रशासकीय खर्च में कटौती करे। मध्यमवर्गीय व गरीबों को राहत दी जाए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली की खामियां दूर की जाएं। सप्लाई चेन पर नजर रखी जाए, ताकि कोई जमाखोरी व कालाबाजार न करने पाए, यह बात किसी से छुपी नहीं है कि महंगाई नियंत्रण का दावा करने वाली सरकार किस्तों में महंगाई बढ़ाती है।
पेट्रोल-डीजल, गैस के मामले में उसका यही रवैया रहा है। तेल कंपनियों को हो रहे घाटे की दलील देकर एक झटके में 29 रुपये सिलेंडर के दाम बढ़ाना निर्दयी कदम है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आय बेहद कम है। सिलेंडर महंगा होने से उज्ज्वला योजना पर पानी फिर गया। ग्रामीणों के सामने लकड़ी, गोबर के कंडे जलाने की मजबूरी आ गई है। विपक्ष का सवाल है कि 41 देशों में ईंधन का स्त्रोत होने के सरकार के दावे का क्या हुआ?
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
