

Petrol-Diesel Price Latest Update: मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव का असर भारत समेत दुनिया के कई देशों में साफ तौर पर देखा जा रहा है। यही वजह है कि भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने भी अपनी रिपोर्ट में ईंधन को लेकर गंभीर चिंता जताई है। एजेंसी ने कहा है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत की इकोनॉमी पर महंगाई का नया प्रेशर देखने को मिल सकता है। आने वाले महीनों में परिवहन और उत्पादन की बढ़ी हुई लागत का असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अपने नुकसान को धीरे-धीरे कम करने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कुल बढ़ोतरी लगभग 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचने की संभावना है।
क्रिसिल ने बताया है कि बढ़ती कीमतों का असर पूरी अर्थव्यवस्था में परिवहन लागत बढ़ने के रूप में दिखाई देगा, जिससे खाने-पीने की चीजों और कोर महंगाई दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है। ईंधन की बढ़ी कीमतों का यूजर्स मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई पर सीधा असर करीब 36 बेसिस पॉइंट होने का अनुमान है। अगर टोटल बढ़ोतरी 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचती है तो यह असर बढ़कर लगभग 48 बेसिस पॉइंट हो सकता है।
गौरतलब है कि भारत में करीब 71 फीसदी माल ढुलाई सड़क परिवहन के जरिए होती है। इस सेक्टर में लगभग 42 प्रतिशत ईंधन का खपत होता है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होगी तो माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत तेजी से बढ़ेगी और सप्लाई चेन पर असर पडे़गा। परिवहन लागत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन चीजों पर होगा जो लॉजिस्टिक्स पर निर्भर हैं- जैसे डेयरी प्रोडक्ट, कॉफी, चाय फल, मसाले, दालें, अंडे और मांस-मछली।
क्रिसिल के मुताबिक, कोर महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है क्योंकि कंपनियों को कच्चे तेल, गैस और ट्रांसपोर्ट की बढ़ती लागत का सामना करना पड़ेगा। इसके साथ ही कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स लकड़ी, सीमेंट और सिरेमिक जैसे सेक्टरों में कीमतें बढ़ने की संभावना है। मांग स्थिर रहने की स्थिति में कंपनियां या तो कीमतें बढ़ा सकती हैं या फिर श्रिंकफ्लेशन जैसी रणनीति अपनी सकती हैं, जिसमें प्रोडक्ट का साइज कम करके कीमतें स्थिर रखी जाती हैं।
पहले दो महीनों में कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 112 डॉलर प्रति बैरल रही, जो अनुमानित 95 डॉलर से काफी ज्यादा है। इससे महंगाई पर दबाव बना हुआ है। मीडिल ईस्ट में जारी संकट ने भी क्रूड ऑयल की कीमतों को प्रभावित किया है। ग्लोबल ऑयल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखी जा रही है, मजबूरन तेल कंपनियों को कीमतों में बढ़ोतरी करना पड़ रहा है।