नवभारत विशेष: अब गैंगवार पर उतर आया कोचिंग उद्योग, छिड़ गई वर्चस्व की लड़ाई

Khan Sir Dispute: पटना के मुसल्लहपुर हाट में कोचिंग संस्थानों के विवाद ने बड़ा रूप ले लिया। झगड़े, फायरिंग के आरोप, एफआईआर और गिरफ्तारी के बाद मामला लगातार चर्चा में है।
Navbharat Special: Coaching industry descends into gang warfare; battle for supremacy erupts.
खान सर, पटना विवाद, कोचिंग बवाल,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Patna Coaching Industry Clash: मुसल्लहपुर हाट इलाके में लोकप्रिय शिक्षक खान सर की कोचिंग, 'ग्लोबल स्टडीज' के बाहर मारपीट हुई और यहीं से एक ऐसे झगड़े ने सिर उठाया, जो आज कोचिंग उद्योग के खूंखार चेहरे के रूप में सामने आया है। खान सर की ग्लोबल कोचिंग के गेट पर कुछ गार्ड और उनके कुछ बाउंसर मौजूद थे, उसी वक्त वहां कुछ छात्रों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया और इस दौरान किसी ने खान सर की कोचिंग के एक बैनर को गिरा दिया।

यह खबर खान सर की ग्लोबल कोचिंग के अंदर पहुंची और खान सर निकलकर बाहर आए, इसके बाद एफआईआर से लेकर प्रतिद्वंदी कोचिंग संस्थान के निदेशक की गिरफ्तारी तक पहुंच गई। सीसीटीवी कैमरे और इन्वेस्टीगेशन से पता चला कि खान सर ने ही अपने गा' को हवा में फायरिंग करने के लिए कहा, जिससे कि माहौल बन सके। बाद में इसी फायरिंग को आधार बनाकर दूसरी कोचिंग ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर रौशन आनंद की गिरफ्तारी हुई। तब से लगातार पटना कोचिंग बवाल का गढ़ बना हुआ है।

सीसीटीवी फुटेज आने के बाद खान सर अपने फायरिंग वाले बयान से तो पीछे हट गए हैं, लेकिन रातोंरात कहीं गायब हो गए हैं, ताकि पुलिस की गिरफ्तारी से बच सकें। यह साफ हो गया कि उन्हीं के उकसावे के कारण फायरिंग हुई और बाद में उल्टा दूसरी कोचिंग वाले पर फायरिंग का आरोप लगाकर न सिर्फ एफआईआर दर्ज कराई गई, बल्कि प्रतिद्वंदी को गिरफ्तार भी करा दिया गया। सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई सारी साजिश के सामने आते ही बिहार में गैंगवार में तब्दील होते कोचिंग उद्योग का खुरदुरा चेहरा सामने आ गया।

करोड़ों के कारोबार के बीच कोचिंग उद्योग में बढ़ी प्रतिस्पर्धा और तनाव

अब हर कोई इस उद्योग की मलाई पर कब्जा चाहता है, इसलिए अपने प्रतिद्वंदियों से बाजार छीनने के लिए आज कोचिंग माफिया वही सारे हथकंडे अपना रहे हैं, जैसे किसी जमाने में मुंबई में अंडरवर्ल्ड माफिया आजमाया करता था। चाहे पटना का मुसल्लहपुर हाट इलाका हो या राजस्थान का कोटा शहर या फिर राजधानी दिल्ली। आज देश में एक दर्जन से ज्यादा शहर और इन शहरों के कुछ खास इलाके कोचिंग उद्योग के गढ़ में तब्दील हो चुके हैं। हजारों, करोड़ रुपये की फीस, हॉस्टल उद्योग, किताबें, ऑनलाइन कोर्स और यू-ट्यूब चैनल तथा भर्ती परीक्षाओं की तैयारी का विशाल नेटवर्क, यह सब मिलकर ऐसे खतरनाक उद्योग में तब्दील हुआ है, जहां रातोंरात करोड़ नोट छापे जा सकते हैं। आज की तारीख में कोचिंग उद्योग बेहद प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ बेहद आक्रामक और हिंसक हो चुका है।

कोचिंग उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और विवादों पर उठे सवाल

तथाकथित ऑनलाइन शिक्षक आज अपने प्रतिद्वंदी को ऐन-केन-प्रकारेण रास्ते से हटाना चाहते हैं, चाहे उसके लिए झूठी फायरिंग और हमले का झूठा प्रपंच ही क्यों न गढ़ना पड़े। यह शिक्षा बाजार पर कब्जा करने की कोशिश का एक हिस्सा है। छात्र अब विद्यार्थी नहीं कस्टमर हो गए हैं और शिक्षक गुरु की जगह ब्रांड में तब्दील हो चुके हैं। बिहार में चूंकि सरकारी नौकरियों और भर्ती परीक्षाओं का महत्व दूसरे प्रांतों से कहीं ज्यादा है, लाखों युवा एसएससी, रेलवे, बैंकिंग, बीपीएससी और पुलिस भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में कोचिंग संस्थानों का प्रभाव यहां केवल शैक्षणिक नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक हो चुका है। जिस तरह से गोलीबारी और गैंगवार में कोचिंग उद्योग तब्दील होता दिख रहा है, उससे बहुत जल्द ऐसे अनेक मामले सतह पर आयेंगे।

छिड़ गई वर्चस्व की लड़ाई

कभी बिहार में गैंगवार का संबंध जमीन, ठेकेदारी, रंगदारी और राजनीतिक वर्चस्व से जोड़ा जाता था लेकिन अब एक नया और चिंताजनक परिदृश्य उभरता दिखाई दे रहा है। यह परिदृश्य शिक्षा के उस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जिसे समाज भविष्य निर्माण का माध्यम मानता है। यह कोचिंग उद्योग है। जैसे-जैसे बेरोजगारी बढ़ी है और पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था बदहाल हुई है, वैसे-वैसे देशभर में कोचिंग उद्योग का जाल बिछ गया है। इसका आकार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।

आज कोचिंग उद्योग 60 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। यह उद्योग, देश के दर्जनों जमे जमाए उद्योगों से भी बड़ा हो चुका है। इसलिए अब अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए कई कोचिंग मालिक, कोचिंग माफिया बनने की राह पर उतर आए हैं। 2 जून को इसकी भयावह झलक पटना में देखने को मिली।

लेख-लोकमित्र गौतम के द्वारा

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