नवभारत विशेष: भाजपा के गढ़ में प्रशांत किशोर की जीत, बूथ मैनेजमेंट बना सबसे बड़ा हथियार
Bankipur Bypoll Victory: बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने प्रचार और भव्य कार्यालयों से दूरी बनाकर बूथ मैनेजमेंट पर फोकस किया। इसी रणनीति ने उन्हें भाजपा के गढ़ में जीत दिलाई।
- Written By: अंकिता पटेल
भाजपा के गढ़ में प्रशांत किशोर की जीत (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Prashant Kishor Strategy Bihar: एक समय बिहार में हर जगह आलीशान कार्यालय खोलने, सोशल मीडिया पर लगातार प्रचार अभियान चलाने, नेता से अधिक प्रोफेशनल को साथ रखने के लिए चर्चा में रहने वाले जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए कई जमीनी कदम उठाए, जिसने बिहार के बांकीपुर विधानसभा उप-चुनाव में उन्हें भाजपा को हराने में मदद की।
उन्होंने पैसा-प्रचार-प्रोफेशनल से किनारा करते हुए बूथ मैनेजमेंट के सहारे भाजपा को उसकी ही रणनीति से हराने का कार्य किया। पिछले विधानसभा चुनाव में 238 सीट पर चुनाव लड़कर सभी सीटों पर जमानत जब्त कराने और शून्य परिणाम हासिल करने वाले पीके ने उप-चुनाव में भाजपा की बिहार की सबसे मजबूत सीट बांकीपुर से चुनाव जीतकर 100% सफलता हासिल की।
प्रशांत किशोर ने सबसे पहले पटना और आस-पास के जिलों में मौजूद अपने सभी आलीशान कार्यालय बंद कर दिए, इसके माध्यम से पीके ने उस धारणा को भी बदलने का कार्य किया कि वह पैसे के दम पर लगातार कार्यालय खोल रहे हैं। इसके उपरांत उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे प्रचार को भी सीमित कर दिया। साथ ही उन्होंने ने पहली बार भाजपा को उसकी ही सबसे मजबूत रणनीति बूथ मैनेजमेंट से हराने का कार्य किया।
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इन प्रमुख बिंदुओं ने बदली चुनाव की दिशा कुत्ता-बिल्ली वाली चर्चा
भाजपा ने कहा था कि अगर बांकीपुर में उसकी ओर से कुत्ता-बिल्ली को भी खड़ा कर दिया जाए तो वह भी जीत जाएगा। इसकी वजह यहां 30 साल से भाजपा ही जीत रही थी। इससे लोगों के बीच यह संदेश गया कि उनको इस लायक भी नहीं समझा जा रहा है कि वह अपने मन से वोट दे सकते हैं, वह भाजपा के ऐसे अंधभक्त हैं कि अगर भाजपा कुत्ता-बिल्ली को भी टिकट देगी तो जनता को उसे वोट देना होगा।
जेन-जी आंदोलन
दिल्ली में हुए जेन-जी आंदोलन ने भी बड़ा असर डाला है। यहां पर दूसरे जिलों से युवा आए और पीके के समर्थन में प्रचार किया। उनका कहना था कि वह चाहते हैं कि प्रशांत किशोर जीते क्योंकि वह शिक्षा और नौकरी की बात कर रहे हैं। पीके ने जिस तरह से पैलेट गन के उपयोग पर सवाल उठाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की बात की। उसने भी युवाओं को उनसे जोड़ने का कार्य किया।
राम मंदिर चंदा चोरी
अयोध्या के राम मंदिर चंदा चोरी ने भी अपना व्यापक प्रभाव डालने का कार्य किया। भरत तिवारी हत्याकांड ब्राहमण जाति से आने वाले निहत्थे भरत तिवारी को जिस तरह से घेरकर पुलिस ने कथित रूप से एनकाउंटर में मार गिराया उसका भी यहां के लोगों के अंदर विरोध था। जिसका लाभ पीके ने यह कहकर उठाया कि एक अपराधी जब सीएम होता है तो इसी तरह की घटनाएं प्रदेश में रूक नहीं सकती है।
नीतीश कुमार को हटाना
जेडीयू के नेताओं और कार्यकर्ताओं के अंदर यह छटपटाहट थी कि भाजपा ने नीतीश कुमार को एक षड़यंत्र के तहत हटा दिया है। जिसमें जेडीयू के भी कुछ नेताओं ने अपना योगदान दिया है।
अगड़ी राजनीति
बिहार में इस समय राजनीति में अगड़े हाशिये पर चले गए हैं। हर दल में केवल ओबीसी और अन्य पिछड़ा व दलित का वर्चस्व है। ऐसे में अगड़े और यहां तक की ओबीसी और दलित वर्ग से आने वाले ऐसे नेता जो खास परिवार या परिवेश से नहीं हैं। वे ऐसी पार्टी की तलाश कर रहे थे। जो समावेशी हो। बिहार में कांग्रेस क्योंकि कोई ताकत नहीं है। ऐसे में जब नए चेहरे के रूप में प्रशांत किशोर समावेशी राजनीति का विचार लाए तो यह वर्ग उनके साथ जुड़ गया। चुनाव के दौरान देखा गया कि भाजपा और जेडीयू के कई कार्यकर्ता प्रशांत किशोर के लिए अंदरखाने वोट मांग रहे थे।
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प्रशांत किशोर की जीत से भी नया संदेश
पीके ने बांकीपुर के हर बूथ पर अपना बूथ लेवल कार्यकर्ता खड़ा किया। जब चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने उनके बूथ लेवल कार्यकर्ता को कथित रूप से धमकाने या उनको पुलिस के मामलों में फंसाने का कार्य किया, उनको पुलिस जब थाने ले गई तो उन्होंने अपने ऐसे हर एक-एक कार्यकर्ता के लिए लड़ाई की। वह कई थानों में गए। वह उस समय तक वहां जमे रहे।
जब तक उनके कार्यकर्ता को पुलिस ने छोड़ नहीं दिया। इससे जनता और उनके कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश गया कि बूथ स्तर के कार्यकर्ता के लिए भी प्रशांत किशोर खड़े हैं। यह पहली बार है कि जब बांकीपुर में किसी दूसरे दल के पास हर बूथ पर अपने समर्पित कार्यकर्ता थे। इस चुनाव से पहले यह ताकत केवल भाजपा के पास ही थी।
लेख- संतोष ठाकुर के द्वारा
