नितिन नबीन का द्वार…BJP की करारी हार, सम्राट की कुर्सी पर लटकी तलवार! बांकीपुर का रिजल्ट बदलेगा बिहार?
Bankipur By-Election: बांकीपुर विधानसभा सीट नितिन नबीन का गढ़ हुआ करती थी। उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा यहां से 5 बार विधायक रहे। नितिन नबीन खुद 5 बार बांकीपुर से विधायक चुने गए।
- Written By: मनोज आर्या
बांकीपुर का रिजल्ट बदलेगा बिहार? (AI जेनरेटेड इमेज)
Bankipur By-Election Result: बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की बड़ी जीत हुई है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस सीट पर उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों से हराया। चुनाव आयोग की अधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, प्रशांत किशोर को कुल 64,151 वोट मिले। भाजपा उम्मीदवार के पाले में केवल 44,827 वोट आए। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा कुमारी को 14,273 वोट मिला। बांकीपुर को भाजपा का गढ़ माना जाता था, जहां इस बार प्रशांत किशोर ने भगवा पार्टी को करारी शिकस्त दी है।
बांकीपुर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की गृह विधानसभा है, यही वजह है कि इस सीट से BJP की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई थी। ऐसे में यहां नीरज सिन्हा की हार BJP के लिए सबसे बड़ा सेटबैक मानी जा रही है। साल 1995 में जब इस विधानसभा सीट का नाम पटना पश्चिम हुआ करता था तब से यहां भाजपा का कब्जा है।
31 साल बाद भाजपा का किला धवस्त
अब 31 साल बाद बांकीपुर में BJP का किला ढहा दिया गया है। पार्टी ने इस सीट पर पहले अभिषेक सिन्हा को टिकट दिया था फिर उनके पीछे हटने पर नीरज कुमार सिन्हा को प्रत्याशी बनाया था। प्रशांत किशोर ने यहां बड़ी जीत दर्ज करते हुए बिहार में सियासी भूचाल ला दिया है। राजनैतिक गलियारों में इस जीत के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।
सम्बंधित ख़बरें
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत, 100 करोड़ की संपत्ति वाले PK ने रचा इतिहास! देखें VIDEO
कभी PM मोदी के जरिए हुई राजनीतिक एंट्री, अब भाजपा को हराकर बने विधायक; जानें प्रशांत किशोर का सियासी सफर
भाजपा की तो नाक कट गई… बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत पर बोले रोहित पवार; कहा- BJP की डेडलाइन आ गई है
बांकीपुर उपचुनाव जीतते ही प्रशांत किशोर ने BJP को दी खुली चुनौती, कह दी बहुत बड़ी बात! देखें VIDEO
सीएम सम्राट चौधरी पर कई सवाल
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला ऐसा मौका था जब बिहार में कोई जनता की तरफ से कोई चुनाव हुआ है। यही वजह है कि बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में मिली हार को सम्राट चौधरी से भी जोड़ा जा रहा है। चर्चा तो यह भी है कि BJP ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाकर ब्लंडर कर दिया। जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ रहा है।
प्रशांत किशोर ने भी पहला रिएक्शन सम्राट चौधरी को लेकर ही दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी अपराधी को मुख्यमंत्री बनाया जाएग तो प्रदेश की तरक्की संभव नहीं है। PK ने यह भी कहा कि बांकीपुर की जनता ने बीजेपी नेतृत्व को साफ संदेश दिया है कि बिहार का मुख्यमंत्री किसी योग्य और अच्छे व्यक्ति को ही बनाया जाए।
नितिन नबीन की पहली अग्निपरीक्षा
बांकीपुर विधानसभा सीट नितिन नबीन का गढ़ हुआ करती थी। उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा यहां से 5 बार विधायक रहे। नितिन नबीन खुद 5 बार बांकीपुर से विधायक चुने गए। लेकिन उनके भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यहां BJP प्रत्याशी नीरज सिन्हा को मिली हार उनके करियर पर दाग लगाने वाली मानी जा रही है।
कार्यकर्ताओं के उत्साह में कमी
राजनैतिक हलकों में चर्चा है कि बांकीपुर में मिली हार का बीजेपी कार्यकर्ताओं में निगेटिव मैसेज जा सकता है। मैसेज यह कि जब BJP अध्यक्ष अपनी पैतृक सीट पर पार्टी के प्रत्याशी को नहीं जिता सके तो आगे वे क्या करेंगे? गौरतलब है कि नितिन नबीन ने भी बांकीपुर में धुआंधार प्रचार किया था। आने वाले समय में UP सहित 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं। ऐसे में इस तर्क की अहमियत और ज्यादा बढ़ जाती है।
नई राजनीतिक दल का उदय
एक चर्चा है यह भी है कि आने वाले समय में जनसुराज बिहार में जनता के लिए एक विकल्प बन सकती है। कांग्रेस-RJD का शासन बिहार की जनता देख चुकी है। JDU और बीजेपी की कार्यशैली का अनुभव कर रही है। लेकिन बिहार की हालत में खासा बदलाव नहीं आया है। ऐसे में बिहार की जनता जनसुराज को नए ऑप्शन के तौर पर चुन सकती है। हालांकि, एक सच यह भी है कि जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी जमानत भी नहीं बचा पाए थे।
बांकीपुर सीट का इतिहास
1995 के चुनाव में भाजपा ने यहां पहली बार कब्जा जमाया। नितिन नबीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने जीत दर्ज की। इसके बाद साल 2000, फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005 के विधानसभा चुनाव में भी लगातार विजयी हुए और पटना पश्चिम भाजपा का मजबूत गढ़ बन गया। साल 2006 में नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र नितिन नबीन पहली बार विधायक बने थे।
यह भी पढ़ें: कभी PM मोदी के जरिए हुई राजनीतिक एंट्री, अब भाजपा को हराकर बने विधायक; जानें प्रशांत किशोर का सियासी सफर
इसके बाद 2008 के परिसीमन में सीट का नाम बदलकर बांकीपुर हो गया, लेकिन भाजपा की जीत का सिलसिला नहीं टूटा। बांकीपुर नाम होने के बाद 2010, 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनाव में नितिन नबीन लगातार जीत दर्ज करते रहे। 2026 में राज्यसभा जाने के बाद नितिन नबीन ने इस सीट से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद इस सीट पर उपचुनाव कराया गया।
