नवभारत विशेष: पेपर लीक माफिया पर शिकंजा, फास्ट ट्रैक कोर्ट 3 माह में सुनाएंगे फैसला
Education Reforms: पेपर लीक पर सख्ती की तैयारी तेज। 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान, सुप्रीम कोर्ट ने भी शिक्षा व्यवस्था में त्वरित सुधार की जरूरत जताई।
- Written By: अंकिता पटेल
पेपर लीक, परीक्षा अनियमितता,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Paper Leak Law Bill: परीक्षाओं में अनियमितताओं को रोकने और पेपर लीक माफिया पर नकेल कसने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक ड्राफ्ट विधेयक को मंजूरी दी, जिसके तहत इन अपराधों में दोषी पाए गए व्यक्तियों के लिए 10 वर्ष के कारावास और अधिकतम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। ऐसे मामलों के ट्रायल के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों के संवैधानिक गठन को भी स्वीकृति दी, जो ‘तीन माह के भीतर’ फैसला सुनाएंगी।
दूसरी ओर पेपर लीक के खिलाफ युवा जो सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं यह मांग करते हुए कि सरकार जवाबदेही निर्धारित करे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाए, का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिस्टम का तदर्थवाद ‘परेशान करने वाला है’, जिसे ऐसे ही चलने नहीं दिया जा सकता।
इस पर जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्रों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ‘इससे भी दस गुणा प्रयास करने’ को तैयार है और उच्चस्तर पर इस मामले की निगरानी की जा रही है, तो न्यायाधीश पी.एस. नरसिम्हा व न्यायाधीश अलोक अराधे की खंडपीठ ने उनसे त्वरित निर्णय लेने के लिए कहा और नई व्यवस्था की जानकारी देने के लिए 3 अगस्त तक का समय दिया।
सम्बंधित ख़बरें
पेपर लीक पर सरकार का बड़ा दांव, आज संसद में पेश होगा परीक्षा संशोधन बिल, विपक्ष घेरने को तैयार!
UPSC Vacancy 2026: दिल्ली शिक्षा विभाग में 828 प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल पदों पर भर्ती शुरू, ऐसे करें आवेदन
नागपुर के जूनियर कॉलेजों में पढ़ाई ठप: शिक्षकों की SIR ड्यूटी से अभिभावकों और छात्रों में असमंजस
नीट धांधली के बीच चंद्रपुर में फूटे पटाखे: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर छात्रों व नागरिकों ने मनाया जश्न!
सादे कपड़ों में कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य खंडपीठ एक जनहित याचिका को सुनने के लिए तैयार हो गई, जिसमें यह मांग की गई है कि यह सुनिश्चित करते हुए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश गठित किए जाएं कि ‘कोई पुलिस अधिकारी या सुरक्षाकर्मी अपनी पहचान छुपाकर सादे कपड़ों में भीड़ को नियंत्रित या गिरफ्तारी नहीं करेगा’।
20 जुलाई को दिल्ली में जब छात्र जंतर-मंतर से संसद तक का मार्च निकालने का प्रयास कर रहे थे तो सादे कपड़ों में कुछ लोगों ने उन पर कील लगी लाठियां बरसाई और जो वर्दी में पुलिसकर्मी लाठी चार्ज कर रहे थे, उनके नाम के वैच भी गायब थे। इस लाठी चार्ज में दर्जनों छात्र चोटिल हुए। यह जनहित याचिका वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दायर की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी छात्रों के लिए वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि सरकार पेपर लीक को गंभीरता से लेती है और इसे रोकने के लिए कड़ा कानून लेकर आएगी। इसके बाद 24 जुलाई 2026 की शाम तक मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन करने को मंजूरी दी, जिसमें 10 वर्ष के कारावास व 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।
पेपर लीक से आगे, अब शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत
अब इस संशोधन को संसद में पारित कराना शेष है, जो आसानी से हो जाएगा, क्योंकि सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है। सख्त कानून के जरिए पेपर लीक करने वालों को सजा देना स्वागतयोग्य अवश्य है, जरूरत इस बात की है कि परीक्षाओं को उचित तरह से सेट व संचालित किया जाए। सरकार को यह समझना चाहिए कि पेपर लीक तो प्रदर्शनों का सिर्फ ट्रिगर था।
यह भी पढ़ें:-Navabharat Nishanebaaz: हर कार्यकर्ता की खास चॉइस, ऊंचा पद पाने की ख्वाहिश
पूरी शिक्षा व्यवस्था ही एआई युग के अनुरूप नहीं है। केजी से लेकर विश्वविद्यालय तक पाठ्यक्रम, पढ़ाने के तरीके व नजरिए तक आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। शिक्षा को अलग करके नहीं देखा जा सकता, उसे रोजगार की उम्मीदों पर भी खरा उतरना चाहिए। यह प्रदर्शन चेतावनी है कि भारत में शिक्षा की स्थिति ठीक नहीं है। सरकार को चाहिए कि संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करे।
छात्र आंदोलन ने सरकार को झुकाया
सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून बनाने के प्रयास शुरू किए व एनटीए के 47 अधिकारियों को निलंबित किया ताकि इसके कार्यबल को विशेषज्ञों से भरा जा सके, लेकिन सरकार को यह भी समझना चाहिए कि अब मुद्दा सिर्फ पेपर लीक या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं है, बल्कि संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन का है।
लेख- विजय कपूर के द्वारा
