Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

नवभारत विशेष: एक राष्ट्र एक चुनाव संविधान से खिलवाड़

One Nation Election: 'वन नेशन, वन इलेक्शन' प्रस्ताव के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की योजना है। इसके लिए 139वें संविधान संशोधन बिल का प्रस्ताव रखा गया है।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Mar 11, 2026 | 07:12 AM

One Nation One Election India Proposal ( सोर्स: सोशल मीडिया )

Follow Us
Close
Follow Us:

One Nation One Election India Proposal: भारत के ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (ओएन ओई) प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने से खर्च कम होगा, लंबे समय तक सुरक्षा बल तैनात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, आचार संहिता की वजह से होने वाली दिक्कतें कम होंगी और राजनीतिक पार्टियों को लगातार चुनावी अभियान मोड में रहने से रोका जा सकेगा।

भारत में इस बारे में सबसे बड़ा ब्लूप्रिंट पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनी उच्च स्तरीय समिति में सामने आया, जो अब संविधान (139वां संशोधन) बिल 2024 में कानूनी रूप ले रहा है। प्रस्तावित आर्टिकल 82ए राष्ट्रपति को एक ‘तय तारीख’ बताने का अधिकार देता है, जिससे सभी राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल लोकसभा के चक्र के साथ जुड़ जाएगा।

इस तारीख के बाद बनी विधानसभाओं का कार्यकाल कम कर दिया जाएगा। भले ही उनका पांच साल का कार्यकाल खत्म न हुआ हो। इसके अलावा यह भारतीय चुनाव आयोग को यह अधिकार देता है कि अगर एक साथ चुनाव कराना मुमकिन नहीं होता है, तो वह राज्य चुनावों को टालने की सिफारिश कर सकता है।

सम्बंधित ख़बरें

11 मार्च का इतिहास : विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोविड-19 को वैश्चिक महामारी घोषित किया

नवभारत संपादकीय: शेयर मार्केट पर पड़ती मंदी की मार

नवभारत निशानेबाज: बिग बी ने अयोध्या में भूखंड खरीद डाला, बने छोरा सरयू किनारे वाला

10 मार्च का इतिहास: जब शास्त्री ने जीती कार और बेल ने किया पहला कॉल, जानें आज की बड़ी ऐतिहासिक घटनाएं

आर्टिकल 83, 172, और 327 में बदलाव का प्रस्ताव है, जो गंभीर संवैधानिक चिंताएं पैदा करते हैं। कॉन्स्टट्यूएंट असेंबली में डॉ. बीआर अंबेडकर ने समझाया कि भारत ने जिम्मेदारी चुनी। राज्य सिर्फ प्रशासनिक ईकाई नहीं, बल्कि उनकी एक स्वतंत्र संवैधानिक पहचान है।

इसके उलट संसद, राज्य विधानसभा और स्थानीय निकाय के लिए अलग-अलग चुनाव एक लगातार फीडबैक मैकेनिज्म बनाते हैं, जिससे सरकारें आमजन की संवेदनाओं पर ध्यान देती हैं।

संसदीय स्थायी समिति के अनुमानों से पता चलता है कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव का कुल खर्च लगभग 4,500 करोड़ (2015-16), जो केंद्रीय बजट का लगभग 0.25% और जीडीपी का 0.03% है।

पीआरएस डेटा से पता चलता है कि लोकसभा चुनाव का खर्च पहले जीडीपी का 0.02%-0.05% (1957-2014) था। चुनाव चरणों में होते हैं मसलन 2024 में 82 दिन, जिससे चुनाव आयोग को ईवीएम, वीवीपैट और सिक्योरिटी फोर्स को रोटेट करने की इजाजत मिलती है।

एक साथ चुनाव कराने से यह लचीलापन खत्म हो जाएगा और महंगे नए संसाधनों की जरूरत होगी, जिससे प्रशासनिक फायदे कमजोर पड़ जाएंगे। क्या जीडीपी का 1% बचाने के लिए संविधान में बदलाव करना और संघीय व्यवस्था को कमजोर करना समझदारी है? चुनाव कोई अतिरिक्त खर्च नहीं है।

जिसे कम किया जा सके। इसके बजाय यह सेल्फ गवर्नमेंट की बार-बार होने वाली कोमत है, जिससे यह पक्का होता है कि सत्ता लोगों के प्रति जवाबदेह बनी रहे।

उतनी गंभीर बीमारी नहीं, जितनी महंगी खुराक

सबसे परेशान करने वाली बात पूरे नहीं हुए विधायी कार्यकाल के लिए मध्यावधि चुनाव है। संविधान किसी बचे हुए कॉन्सेप्ट को मान्यता नहीं देता है। हालांकि प्रस्तावित आर्टिकल 83 (6) और 172(5) का दावा है कि नया चुना हुआ हाउस पिछले हाउस का विस्तारीकरण नहीं होगा, लेकिन वे तारतम्यता बनाए रखने के लिए पहले के चुनावी चक्र को असरदार तरीके से बनाए रखते हैं।

यह भी पढ़ें:-नवभारत निशानेबाज: बिग बी ने अयोध्या में भूखंड खरीद डाला, बने छोरा सरयू किनारे वाला

इससे कई गड़बड़ियां पैदा होती हैं। सबसे पहले, यह फ्रैंचाइज की वैल्यू कम करता है। मध्यावधि चुनाव से कम बहुमत वाली सरकारें बनेंगी, जिससे चुनाव सिर्फ कवायद बन जाएंगे और वोटर की और ज्यादा बेपरवाही का खतरा होगा।

दूसरा, यह शासन और जवाबदेही को कमजोर करता है, क्योंकि बचे हुए कार्यकाल की सरकारों में स्ट्रक्चरल रिफॉर्म के लिए इंसेंटिव की कमी होती है, जिससे पॉपुलिज्म और पॉलिसी ड्रिफ्ट को बढ़ावा मिलता है।

लेख- एम के स्टालिन. मुख्यमंत्री तमिलनाडु के द्वारा

One nation one election constitution amendment 139 bill explained

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Mar 11, 2026 | 07:12 AM

Topics:  

  • Election Commission
  • Navbharat Editorial
  • One Nation One Election

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.