

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने के लिए दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, पुलिस की धरपकड़ और ड्रोन से निगरानी पर व्यंग्य।
सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, विपक्षी नेताओं और आंदोलनकारियों को पहले ही हिरासत में लेने का जिक्र।
तेज रफ्तार वाहन, फुटपाथों पर अतिक्रमण, चेन स्नैचिंग और साइबर अपराध से आम जनता की सुरक्षा पर चिंता।
प्रदूषण, पटाखों के धुएं और मच्छरजनित बीमारियों के खतरे के बीच सरकार की प्राथमिकताओं पर कटाक्ष।
Delhi Protest Security Crackdown: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, सुरक्षा नाम की कोई चीज ही नहीं रह गई है, अखबार क्राइम की खबरों से भरे रहते हैं। अब तो साइबर क्राइम भी बढ़ चले हैं। इधर आंख झपकाई, उधर माल यारों का! बैंक अकाउंट की सारी जमापूंजी एक झटके में छूमंतर हो जाती है।'
हमने कहा, 'छूमंतर की बजाय जंतर-मंतर की चर्चा कीजिए। इस बार केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर इतनी सिक्योरिटी लगाई और धरपकड़ की कि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पर जमने का मौका ही नहीं मिल पाया। पूरा इलाका खाली रहा।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, सरकार को अपनी सुरक्षा की फिक्र है, इसलिए विपक्षी नेताओं और युवाओं को पुलिस ने पहले ही दबोच लिया। यहां तक कि विमान के एयरपोर्ट पर उत्तरते ही उसके भीतर घुसकर आंदोलनकारी नेता पकड़ लिए गए। सरकार ने पिछले अनुभव के बाद कमर कस ली कि जंतर-मंतर पर जमाव नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए दिल्ली को फौजी छावनी जैसा बना दिया गया। ड्रोन से भी निगरानी रखी गई।'
हमने कहा, 'सरकार ने अपनी सुरक्षा तो कर ली लेकिन जनता की सुरक्षा की भी तो फिक्र की जानी चाहिए। शहर में तेज रफ्तार यातायात की वजह से जान हथेली पर लेकर रास्ता पार करना पड़ता है। फुटपाथ या साइडवॉक पर अतिक्रमण होने से सड़क किनारे पैदल चलना भी रिस्की है। टूव्हीलर को बस, ट्रक या कार ठोक देती है। बाइकसवार उठाईगीरे महिलाओं का पर्स, मोबाइल या मंगलसूत्र झपट्टा मारकर ले भागते हैं। अच्छा-भला इंसान डॉक्टर के पास जाए तो वह समझाएगा कि आप बिल्कुल सुरक्षित नहीं हैं। वह आपको जबरदस्ती हेपेटाइटिस, टाइफाइड की वैक्सीन लगाने को कहेगा। एक छोटा-सा मच्छर आपको मलेरिया, डेंगू या चिकनगुनिया का मरीज बना देगा। ठंड शुरू होते ही दिवाली की हवा में कोहरे से भारी प्रदूषण फैल जाएगा। वहां त्योहारों के समय पटाखों के शोर से आपके कान और धुएं में फेफड़े सुरक्षित नहीं रहेंगे।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, जनता अपनी सुरक्षा का ध्यान खुद रख लेगी। अभी तो सरकार के सामने विपक्षी पार्टियों और आंदोलनकारी कॉकरोचों का खतरा है। वह चाहे तो विपक्षी नेताओं से चर्चा का कोई रास्ता निकाल सकती है लेकिन वह ऐसा नहीं करेगी। उसका उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेशकुमार को हर कीमत पर बचाना है।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा