Navbharat Nishanebaaz: राजनीति का क्या भरोसा, कहीं कचौरी, कहीं समोसा; सियासत पर निशानेबाज का तंज

Kachori Samosa Politics: ‘निशानेबाज’ में समोसे और कचौरी के बहाने सियासत पर व्यंग्य। बिहार के नारे से लेकर गोवा के दलबदल तक, पड़ोसी और ‘निशानेबाज’ की बातचीत में राजनीति के रंग दिखे।
Kachori Samosa Politics
निशानेबाजफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
Published on: 
Updated on: 

Congress Defection Goa Politics: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, राजनीति में कचौरी और समोसा कहां से आ गए? सत्ता की मलाई चाटनेवाले नेताओं को इनकी क्या जरूरत ? ज्यादा से ज्यादा वह गठबंधन रूपी झोलमुडी या भेल बनाते हैं।'

हमने कहा, 'पहली बात तो यह समझ लीजिए कि एक जमाने में बिहार में नारा था जब तक रहेगा समोसे में आलू, सत्ता में बने रहेंगे लालू, आस्ट्रेलिया के पिछले प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन जब भारत आए थे तो समोसा उन्हें बहुत पसंद आया था। उन्होंने अपने देश में उसे 'समोक्शा' कहकर प्रचलित करवाया। समोसे में आलू-प्याज और मसाले की बढ़‌या पैकिंग रहती है। बंगाल में काले मसालेवाला छोटा समोसा 'सिंघाड़ा' कहलाता है। लोग सुबह मिष्टी दोई (मीठे दही) के साथ इसका नाश्ता करते हैं।'

Kachori Samosa Politics
भ्रष्टाचार मामले में भिलाई विधायक देवेंद्र यादव को EOW का नोटिस, 5 अक्टूबर को कोर्ट में पेशी

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, गोवा में कांग्रेस विधायकों के 2019 और 2022 में हुए दलबदल को याद कीजिए जो पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे। इसे लेकर आम आदमी पार्टी ने फिकरा कसा है-एक कचोरी, दो समोसा, इस कांग्रेस का क्या भरोसा!'

हमने कहा, 'तुकबंदी अच्छी है लेकिन राजनीति कार्यकर्ताओं के समोसे कचोरी से शुरू होकर सत्ता की रसमलाई तक जाती है। नेता भूखंड का श्रीखंड करते देखे गए हैं। भ्रष्टाचार में नेता-अफसर सभी के हाथ मिले रहते हैं। आपने पुराना गीत सुना होगा- कैसे बनी, कैसे बनी, फुलौरी बिना चटनी कैसे बनी !'

Kachori Samosa Politics
मनपा सदन में बढ़ी हिंदी भाषी नेताओं की भागीदारी, BMC में पहली बार 10 मनोनीत नगरसेवक, बदला समीकरण

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, समोसा और कचौरी दोनों उबलते तेल में तले जाते हैं। इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ समूचा विपक्ष खौल और उबल रहा है। समोसे की समीक्षा तो हो चुकी, रही बात कचौरी की तो वह कई प्रकार की होती है जैसे कि मूंग की कचौरी, प्याज की कचौरी, मटर की कचौरी। महाराष्ट्र में शेगांव की कचौरी मशहूर है। लोग खस्ता कचौरी इमली की चटनी या दही के साथ खाना पसंद करते हैं। हिंदी भाषी प्रदेशों में न सिर्फ त्योहारों पर बल्कि वैसे भी घरों में पूरी कचौरी खूब बनती है।'

हमने कहा, 'विभिन्न विचारधारा वाली पार्टियां अब मतलब की यारी निभाते हुए गठबंधन बनाती हैं तो कह सकती हैं कि कचौरी हो या समोसा, अभी तो है आपस में भरोसा। रिश्तेदारी खूब निभेगी, मामा हो या मौसा !'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com