नवभारत संपादकीय: नीट पेपर लीक ने खोली शिक्षा तंत्र की पोल, छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ असहनीय
NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक ने परीक्षा तंत्र की खामियों और भ्रष्टाचार को उजागर किया है। परीक्षा रद्द होने से ईमानदार छात्रों पर मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक बोझ बढ़ा है।
- Written By: अंकिता पटेल
नीट पेपर लीक, परीक्षा भ्रष्टाचार,(सोर्स: सौजन्य AI)
NEET Exam Paper Leak: भ्रष्ट व लापरवाह परीक्षा तंत्र देश के लाखों छात्रों से छल कर रहा है, जिसे लेकर युवाओं में भारी आक्रोश है। नीट परीक्षा में पेपरलीक की शर्मनाक घटना ने समूचे शिक्षा तंत्र में व्याप्त धांधली को उजागर करके रख दिया। शिक्षकों, कोचिंग क्लास संचालकों के स्याह चेहरे सामने आते जा रहे हैं। धन के लोभमें ईमान का सौदा करने वाले शिक्षा जगत के इन कपटी कुलंगारों की जितनी निंदा की जाए कम है। पेपर लीक कर ऐसे धनिक पुत्रों को डॉक्टरी व इंजीनियरिंग कॉलेजों में भेजने की साजिश की जाती है, जो इसके पात्र नहीं होते। इसका दुष्परिणाम उन ईमानदार छात्रों को भुगतना पड़ता है, जिन्होंने ईमानदारी और कड़ी मेहनत से परीक्षा की तैयारी की परीक्षा रद्द होने से उन पर घोर अन्याय होता है।
नए सिरे से दोबारा तैयारी करने और काफी दूर स्थित परीक्षा केंद्र में जाने की विवशता उन पर लादी जाती है। पेपर-फूट रैकेट की गंदी कारगुजारी की गाज प्रामाणिक व ईमानदार छात्रों पर गिरती है। उन्हें मानसिक तनाव और धन के अनावश्यक खर्च से जूझना पड़ता है। कुछ की आर्थिक हालत काफी कमजोर होती है और वह इतने हताश हो जाते हैं कि दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत जुटा नहीं पाते। उन्हें लगता है कि पेपर लीक करने वाला गिरोह कभी उन्हें आगे बढ़ने का अवसर ही नहीं देगा।
नीट से CBSE तक, परीक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
जो लोग लाखों रुपयों में प्रश्नपत्र खरीदेंगे, वह बाजी मार ले जाएंगे। क्या गारंटी है कि अब पेपर नहीं फूटेगा? सिस्टम में मगरमच्छों ने डेरा डाल रखा है, जो ईमानदारों को निगलने के लिए अपना जबड़ा फैलाए हुए हैं। नीट पेपर बेचने वालों के साथ खरीदने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, छात्रों से खिलवाड़ का यह क्रूर सिलसिला ‘नीट’ परीक्षा में ही नहीं रुका, बल्कि सीबीएएसई की उत्तरपुस्तिका (आंसरशीट) चेकिंग में भी लाखों विद्यार्थियों की प्रतिभा व परिश्रम पर भी पानी फेरा गया। यह मामला तब सामने आया जब 12 वीं के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि सीवीएसई के नए ऑनलाईन संक्रप्ट मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत फिजिक्स की जो आंसरशीट लोड की गई, वह उसकी नहीं थी।
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CBSE की ऑनस्क्रीन जांच पर सवाल, छात्रों में नाराजगी
हंगामा मचने पर सीबीएसई ने इस गलती को स्वीकार किया। इसके बाद बोर्ड के डिजिटल चेकिंग और वेरिफिकेशन के तरीकों की नए सिरे से जांच की जा रही है। 11.31 लाख छात्रों ने स्कैन कॉपी मांगी है। सुधारी हुई कॉपी में भी चेकिंग का तरीका सवालों के घेरे में हैं। ऑनस्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम से कक्षा 10 व 12 वीं के लाखों परीक्षार्थी प्रभावित हुए हैं।
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कहीं जांची गई कॉपी पर छात्र की हैंडराइटिंग ही नहीं है, तभी कहीं पैसे देकर स्कैन कॉपी मंगवाने पर वह कटी-फटी, धुंधली और पढ़ने योग्य नहीं रहती। इतने पर भी बोर्ड का तुर्रा यह कि अपनी गलती के बावजूद छात्रों से सामान्य रिवैल्युएशन के लिए 8,000 से लेकर 69,420 रुपए तक मनमानी फीस मांगी जा रही है। आखिर किस सड़ी-गली जर्जर व्यवस्था में जी रहे हैं भारत के छात्र?
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
