नवभारत विशेष: NDA की अभूतपूर्व जीत ने अनुमानों को फिर झुठलाया
Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने अभूतपूर्व जीत हासिल की। इस चुनाव में भाजपा और जेडीयू दोनों ने 101-101 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे।
- Written By: दीपिका पाल
NDA की अभूतपूर्व जीत (सौ.डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पिछले तीन बार से बिहार विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल जो अनुमान बताते थे, हर बार हकीकत उनको गच्चा देती थी। गच्चा इस बार भी नतीजों ने दिए हैं, लेकिन विरोध में नहीं बल्कि पक्ष में। 11 नंवबर 2025 को दूसरे दौर के चुनाव सम्पन्न होने के बाद 17 एजेंसियां ने अपनी एग्जिट पोल पेश किये थे, जिनमें से किसी भी एजेंसी ने यूं तो एनडीए यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को हारता हुआ नहीं बताया था, लेकिन किसी भी एग्जिट पोल में इतना सटीक अनुमान भी नहीं लगाया था। चुनाव में एनडीए ने अभूतपूर्व जीत हासिल की। इस चुनाव में भाजपा और जेडीयू दोनों ने 101-101 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे।
एनडीए में जो अन्य पार्टियां शामिल हैं, उनकी भी सीटें पिछली बार के मुकाबले एक ज्यादा आई। मोटे तौर पर राष्ट्रीय जनता दल की इस बार जबर्दस्त हार हुई है। अगर समूचे महागठबंधन को देखें, तो जिसमें राष्ट्रीय जनता दल के अलावा प्रमुख पार्टियों के रूप में कांग्रेस और सीपीआई (एमएल) शामिल थीं, उन्हें साझे तौर पर पिछले बार के मुकाबले 75 सीटें कम मिल रही हैं। क्योंकि पिछले बार इस गठबंधन को कुल 110 सीटें मिली थीं, जो कि बहुमत से सिर्फ 12 सीटें कम थीं।
प्रशांत किशोर बुरी तरह विफलः
महागठबंधन पिछले के मुकाबले 75 सीटों से पीछे चल रहा था। इसमें जहां राष्ट्रीय जनता दल की 48 सीटें कम हुई हैं, वहीं कांग्रेस की 14, सीपीआई (एमएल) की 11 सीटें कम हुई हैं। उनके अन्य छोटी पार्टियों में भी दो सीटें कम हुई हैं। दूसरी तरफ प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी जिसका इन चुनावों में बिना किसी इतिहास के भी भारी दखल महसूस किया जा रहा था, वह तो बिल्कुल टांय टांय फिस्स साबित हुई है। जनसुराज ने 200 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये थे और कुछ सीटों पर अपने सहयोगियों को समर्थन दिया था। लेकिन नतीजों के रूप में जनसुराज को एक महाशून्य ही मिला है। एग्जिट पोलों के अनुमानों का यही हाल 2025 में भी वैसा ही रहा है। यह अलग बात है कि इस बार के अनुमान बिल्कुल उलटफेर वाले नहीं थे। ऊपर हमने 11 नवंबर 2025 को दूसरे दौर के चुनाव सम्पन्न होने के बाद जिन 17 एजेंसियों के एग्जिट पोल का जिक्र किया है, उनमें से कोई भी एनडीए को हारता हुआ नहीं बता रही थीं और कोई भी एजेंसी महागठबंधन को जीतकर सरकार बनाते हुए भी नहीं दिखा रही थीं।
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यहां तक कि इन 17 एजेंसियों में से किसी ने महागठबंधन को उसकी पिछली सीटें यानी 110 भी आते नहीं बता रही थीं, महागठबंधन की सीटों का अधिकतम अनुमान 108 था। लेकिन ज्यादातर एजेंसियां एनडीए को भी उतनी सीटें आती नहीं बता रही थीं, जितनी 14 नवंबर को 5 बजकर 7 मिनट तक बढ़त के रूप में एनडीए के खाते में थीं। एनडीए को ज्यादातर एग्जिट पोल 135 से 150 के बीच सीटें लाती बता रही थीं। हालांकि सबके नंबर अलग अलग थे, सिर्फ पोल डायरी और प्रज्ञा पोल एनालिटिक दो एजेंसियां ऐसी थीं, जिनके मुताबिक एनडीए को 184 से 209 के बीच सीटें मिल रही थीं।
महिलाओं का भारी समर्थन मिलाः
सवाल है आखिर बिहार में विधानसभा चुनाव नतीजों का अनुमान लगाने में एग्जिट पोल या प्री-पोल इस तरह गलत क्यों साबित होते हैं और 20 वर्षों से लगातार सत्ता में रहने के बावजूद नीतीश कुमार को किसी तरह की एंटी इंकम्बेंसी का सामना क्यों नहीं करना पड़ा? ऐन चुनाव के पहले जिस तरह नीतीश कुमार ने महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये डाले और वायदा किया कि चुनाव जीतने पर वे उनकी उद्यमिता को लगातार आगे ले जाएंगे, उससे 20 साल से उनके साथ बनी रहने वाली महिला मतदाता न सिर्फ बनी रहीं बल्कि इस बार 1952 के बाद से सबसे ज्यादा मतदान हुआ।
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बढ़े हुए मतदान में भी महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के मुकाबले 10 से 12 फीसदी तक ज्यादा थी। एक तो एनडीए को महिलाओं के अंधाधुंध समर्थन ने यह अभूतपूर्व विजय दिलायी और दूसरी बात यह थी कि जिस तरह तेजस्वी प्रसाद यादव ने अंधाधुंध और अव्यवहारिक चुनावी घोषणाएं की थीं, उस पर बिहार के मतदाताओं ने यकीन नहीं किया। वैसे इस अभूतपूर्व जीत के कुछ और कारण भी हैं, लेकिन फिलहाल यही दो कारण सबसे निर्णायक हैं।
लेख-लोकमित्र गौतम के द्वारा
