नवभारत संपादकीय: मोहन भागवत का संदेश, Gen-Z को राष्ट्रविरोधी नहीं मान सकते, नेतृत्व पर भी दी सीख
Gen Z Youth Movement: मोहन भागवत ने Gen-Z को राष्ट्रविरोधी मानने से साफ इनकार किया और युवाओं की बात सुनने के साथ बेहतर नेतृत्व की जरूरत पर जोर दिया हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
मोहन भागवत (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Bhagwat Gen Z Statement: यदि बीजेपी नेतृत्व की केंद्र सरकार ने अपनी अकड़ व अदूरदर्शिता से युवा आंदोलनकारियों का दिल दुखाया तो अब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इस बिगड़ी हुई बात को अपने तरीके से संभालने का प्रयास किया है। उनके विचार प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के असंवेदनशील रवैये से बिल्कुल अलग और रचनात्मक हैं।
एक तरह से भागवत ने आत्ममुग्ध केंद्र सरकार को आईना दिखाया है। उन्होंने किसी का नाम न लेते हुए सीख दी कि असली नेतृत्व का मतलब सिर्फ भाषण देना, चुनाव जीतना या लोगों को उपदेश देना नहीं है बल्कि पर्दे के पीछे रहकर काम करना और सफलता व प्रसिद्धि को साझा करना है। एक नेता के पास ज्ञान होना चाहिए, उसे दूसरों के गुणों की सराहना करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जेन-जी को राष्ट्रविरोधी नहीं माना जा सकता।
भागवत का संदेश: युवा सवाल उठाएं तो सरकार जवाब दे
आज का दौर बदल गया है। अगर युवा कोई सवाल उठा रहे हैं तो सरकार को उसका जवाब देना होगा। जेन-जी और जेन-अल्फा हमारी पीढ़ी से ज्यादा समझदार और देशभक्त हैं। यह एक ईमानदार और प्रामाणिक पीढ़ी है जिस पर मुझे विश्वास है।
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भागवत ने माना कि जेन-जी की शिकायतें वास्तविक हैं। विरोध भी संवाद का एक तरीका है। जब संवाद के जरिए लोगों की चिंता पर ध्यान नहीं दिया जाता तो वह आंदोलन कर सकते हैं। बीजेपी के पितृ संगठन आरएसएस के मुखिया का संकेत है कि केंद्र सरकार व उसके नेता आंदोलनकारियों को अपना शत्रु न मानकर युवा पीढ़ी के प्रश्नों के प्रति समझदारी और परिपक्वता दिखाएं तथा उसकी चिंताओं व मांगों को समझें। शासन-प्रशासन की अव्यवस्था, अक्षमता व न्यूनता के अलावा गलत नीतियों व कदमों का यदि युवा पीढ़ी विरोध करे तो उसे राष्ट्रविरोधी करार नहीं दिया जा सकता।
भागवत की नसीहत: युवाओं की आवाज सुने सरकार
भागवत ने साफ शब्दों में कहा कि छात्रों को आवाज उठाने का अधिकार है तथा वह जेन जी को आंदोलन करने से नहीं रोकेंगे। आज की पीढ़ी सबसे ईमानदार पीढ़ी है जिसकी बात सुनी जानी चाहिए और उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि उनकी बात वास्तव में सुनी जा रही है। मोदी सरकार को जरा भी उम्मीद नहीं रही होगी कि संघ प्रमुख जेन-जी के आंदोलन के मुद्दे पर उसे इस तरह स्पष्ट शब्दों में नसीहत देंगे।
सरकार द्वारा आंदोलनकारियों के दमन तथा जेन-जी की उपेक्षा पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरलीमनोहर जोशी ने भी अप्रसन्नता व असहमति जताई थी। अपने इस परामर्शदाता की बात पर भी बीजेपी नेतृत्व ने कोई ध्यान नहीं दिया था।
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मोदी सरकार यदि 144 करोड़ देशवासियों के समर्थन और प्रतिनिधित्व का जोर-शोर से दावा करती है तो उसे युवा मन के स्वाभाविक आक्रोश को भी समझना होगा जो पेपर लीक, बेरोजगारी तथा अन्य मुद्दों को लेकर क्षुब्ध और व्यथित है। पुलिसिया अत्याचार, पैलेट गन के इस्तेमाल पर युवाओं से माफी मांगने की बजाय उन्हें माफ कर देने जैसा अहंकार दिखाया जा रहा है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
