

Maharashtra Tourism Development Fund: महाराष्ट्र में पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत 356 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की है। यह निधि स्वदेश दर्शन, स्वदेश दर्शन-2, चुनौती आधारित गंतव्य विकास, प्रसाद तथा राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के माध्यम से राज्य के प्रमुख पर्यटन परियोजनाओं को उपलब्ध कराई जाएगी।
केंद्र सरकार ने कहा कि पर्यटन स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं, पर्यटकों के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं और पर्यटन अनुभवों के विकास की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों की है। धार्मिक, सांस्कृतिक, विरासत और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों के विकास के लिए केंद्र विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।
स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत सिंधुदुर्ग तटीय पर्यटन सर्किट के विकास के लिए 19.06 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 17.61 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। वहीं वाकी-अदासा-धापेवाड़ा-पारडसिंगा-तेलंखेड़ी-गिरड़ पर्यटन सर्किट के विकास के लिए 45.47 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिनमें से 43.19 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
स्वदेश दर्शन-2 योजना के तहत पुणे स्थित शिवसृष्टि थीम पार्क के लिए 75.47 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। अब तक 37.74 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। चुनौती आधारित गंतव्य विकास योजना के अंतर्गत अहिल्यानगर किले के विकास के लिए 25 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिनमें से 2.50 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
प्रसाद योजना के तहत नासिक के त्र्यंबकेश्वर तीर्थ क्षेत्र के विकास के लिए 45.41 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 38.44 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत नासिक के राम-काल पथ विकास परियोजना के लिए 99.14 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिनमें से 65.43 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
सिंधुदुर्ग जिले में आईएनएस-गुलदार अंडरवाटर म्यूजियम, कृत्रिम प्रवाल भित्ति (आर्टिफिशियल कोरल रीफ) और पनडुब्बी पर्यटन परियोजना के लिए 46.91 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस परियोजना के लिए अब तक 30.96 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा, नागपुर जिले के वाकी-अदासा-धापेवाड़ा-परडसिंगा-तेलंगखेड़ी-गिरड टूरिज्म सर्किट के विकास के लिए 45.47 करोड़ मंजूर किए गए हैं, जिसमें से 43.19 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।
पर्यटन विभाग का कहना है कि इन सभी योजनाओं का उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, परंपरा और विरासत का संरक्षण करते हुए सतत एवं समावेशी पर्यटन को बढ़ावा देना है। विभाग को उम्मीद है कि इन परियोजनाओं से पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।