Navabharat Nishanebaaz: सिर पे बुढ़ापा है, दिल तो जवां है, राजनीति में रिटायरमेंट मना है

Aging Politicians Debate: संस्कृत के श्लोक 'तृष्णा न जीर्णा' के संदर्भ में दुनिया के बुजुर्ग नेताओं की सत्ता से जुड़ी महत्वाकांक्षा पर चर्चा। 80-100 वर्ष की उम्र तक राजनीति करने वाले नेताओं की कहानी।
Navabharat Nishanebaaz: Old age may be upon him, but his heart remains young; retirement is out of the question in politics.
(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Leaders Clinging to Power: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, संस्कृत में कहा गया है- तृष्णा न जीर्णा, वयमेव जीर्णा ! उम्र कितनी भी हो जाए तृष्णा समाप्त नहीं होती। नेताओं की कुर्सी की लालसा खत्म होने का नाम ही नहीं लेती। अमेरिका में स्ट्राम थरमांड नामक सीनेट सदस्य 100 वर्ष की आयु तक सदन में बने रहे। उनका कार्यकाल 1948 से लेकर 1990 तक रहा। राबर्ट बायर्ड नामक सदस्य 92 वर्ष की आयु तक सीनेट में मेंबर रहे। पूर्व राष्ट्रपति बाइडेन ने 83 वर्ष की आयु में पद छोड़ा। प्रेसिडेंट ट्रंप भी 80 वर्ष के हैं और ईरान से लड़ाई का जज्बा रखते हैं। 92 वर्ष के सीनेट सदस्य चक ग्रासली 92 साल के हैं और द्वितीय विश्व युद्ध के किस्से सुनाते हैं।'

हमने कहा, 'आप विदेश की बजाय स्वदेश पर ध्यान दीजिए। हमारे यहां भी बुजुर्ग नेताओं की कमी नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई 99 वर्ष जिंदा रहे। पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी 98 वर्ष के हैं।

डॉ. मुरलीमनोहर जोशी की आयु 92 वर्ष है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व सदर-ए-रियासत और कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डॉ. कर्णसिंह भी इतनी ही आयु के हैं। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा 90 वर्ष के हैं। चौधरी देवीलाल भी 90 साल जिंदा रहे। राजनीतिक सक्रियता नेताओं के लिए अमृततुल्य चाय के घूंट के समान रहती है। जिसका दिल राजनीति की उखाड़-पछाड़ में लगा हो, वह कैसे रिटायर होगा। 85 साल के शरद पवार को भी राजनीति से प्यार है।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, जब राजा दशरथ ने शीशे में देखा कि उनकी कनपटी का एक बाल सफेद हो गया तो उन्होंने हेयर कलर करवाने की बजाय वालंटरी रिटायरमेंट का निर्णय ले लिया और अपने ज्येष्ठ पुत्र राम के राज्याभिषेक की घोषणा कर दी।'

हमने कहा, 'अब तो सिर के बाल, दाढ़ी-मूंछ, भौंहें सफेद हो जाने के बाद भी महान नेता पद से चिपके रहते हैं। विपक्ष को समाप्त कर एकाधिकार वाली हुकूमत का लक्ष्य रखते हैं। उनके संकेत पर विपक्षी पार्टियां तोड़ी जाती हैं, सांसदों-विधायकों को खरीदा जाता है। असहमति को कुचला जाता है। किसी उद्योगपति मित्र को एयरपोर्ट और बंदरगाह दे दिए जाते हैं।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, पहले भी तो बुजुर्गों की राजनीति में सक्रियता रहती थी। महाभारत में भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, भगदत्त जैसे वयोवृद्ध थे। रावण का मंत्री उसका नाना माल्यवंत था। यह मत भूलिए कि बुजुर्गों के पास अनुभव की बहुमूल्य पूंजी होती है। युवाओं का जोश और बुजुगों का होश मिलकर राजनीति को कामयाब बना सकते हैं।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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