महाभारत में सिद्धांतों पर समझौता (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, हमारे नेता अपनी संस्कृति से जुड़े हुए हैं.महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अजीत पवार के नेतृत्व में राकांपा के साथ गठबंधन पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि अपनी नीतियों को लागू करने के लिए सत्ता जरूरी है।महाभारत के युध्द में भी सिध्दांतों पर समझौते हुए थे।फडणवीस के इस कथन पर आपकी क्या राय है.’ हमने कहा, ‘महाराष्ट्र यदि महाभारत का अनुकरण करता है तो इसमें क्या गलत है? रामायण में नैतिकता थी तो महाभारत में छल-कपट प्रतिघात, क्रूरता और कुटिलता।
आप चाहें तो महाभारत जैसे कौरव-पांडव, शकुनि मामा व धृतराष्ट्र को महाराष्ट्र में भी खोज लीजिए।भगवान कृष्ण ने 100 शक्तिशाली कौरवों और उनकी बहुत बड़ी सेना के मुकाबले पांडवों को जिताया था।भीष्म, द्रोण और कर्ण जैसे महारथी कृष्ण की कूटनीति के सामने फेल हो गए थे।द्रोणाचार्य को उनके पुत्र अश्वत्थामा की मृत्यु का झूठा समाचार देकर युध्द का मैदान छोड़ने के लिए बाध्य किया गया था।यह उस जमाने की डिसइन्फार्मेशन तकनीक थी भीष्म के सामने शिखंडी को खड़ा कर अर्जुन ने बाणों से उनका संपूर्ण शरीर छलनी कर दिया था।कर्ण के रथ का पहिया कीचड़ में फंस गया था।
वह रथ को दलदल से बाहर निकालने के लिए उतरा तो कृष्ण ने अर्जुन को आदेश दिया कि यही मौका है, अभी इसे मार दे।यदि वह रथ में सवार हो गया तो उसे मारना असंभव हो जाएगा।निहत्थे कर्ण को अर्जुन ने अपने तीखे बाणों से वहीं मार डाला।कौरवों ने भी 16 साल के वीर अभिमन्यु को चक्रव्यूह में घेरकर मार डाला।7 महारथियों ने उसे घेरकर मारने में क्रूरता की पराकाष्ठा की.’
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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज महाभारत काल में भी दलबदल हुआ था।कौरवों का एक भाई युयुत्सू पांडवों के पक्ष में आ गया था।नकुल व सहदेव का मामा मद्रराज शल्य भी कौरवों की ओर से लड़ा था।निशस्त्र भगवान कृष्ण पांडवों के साथ थे जबकि उन्होंने अपनी नारायणी सेना दुर्योधन को दे दी थी।पहले महाभारत सिर्फ कुरुक्षेत्र में हुआ था लेकिन अब हर चुनाव में महाभारत होता है।यह जनता पर निर्भर है कि उसके पात्रों को पहचान ले।तब शकुनि के पासे थे, अब लुभावनी खैरात की पौ-बारह है।’
लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा