देवेंद्र फडणवीस, विजय वडेट्टीवार व उद्धव ठाकरे (डिजाइन फोटो)
Religious Freedom Bill Maharashtra: महाराष्ट्र विधानमंडल के लगभग 1 माह तक चले बजट सत्र का समापन हो गया जिसमें 7.69 लाख करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया गया तथा 27 विधेयक पारित हुए। विपक्ष कमजोर होने से यह सत्र शांतिपूर्वक बीता जिसमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति कम नजर आईं। प्रशासन सहित विधायकों पर मुख्यमंत्री का दबदबा सत्र में देखा गया। मुख्यमंत्री सदन में रहें या न रहें, सारा कामकाज व्यवस्थित रूप से होता रहा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बजट को विजन डाक्युमेंट-2047 बताया! बजट में आय का 55 प्रतिशत हिस्सा सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन तथा राज्य पर लदे हुए 11 लाख करोड़ रुपए कर्ज का ब्याज अदा करने में खर्च होगा। लाडकी बहिन योजना की राशि नहीं बढ़ाई गई बल्कि उसका नाजायज फायदा उठाने वालों के नाम कटने से खर्च कम होगा। बजट में कोई नई घोषणाएं नहीं की गईं।
इस सत्र में धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक को लेकर महाविकास आघाड़ी के मतभेद सामने लाने में सरकार सफल हुई। इस विधेयक का मूल उद्देश्य अंतरधर्मीय विवाहों पर अंकुश लगाना है। बीजेपी का दावा था कि राज्य में लव जिहाद के मामले बढ़ रहे हैं। इसकी जांच के लिए सरकार ने तत्कालीन डीजीपी रश्मि शुक्ला के नेतृत्व में एक समिति बनाई थी जिसके जरिए सरकार के पास लगभग 400 शिकायतें आईं। इस समिति के निष्कर्षों के आधार पर यह विधेयक लाया गया।
शिवसेना सदस्य भास्कर जाधव ने अपने भाषण में इस विधेयक का पुरजोर समर्थन किया। कांग्रेस के विधायकों ने इस बिल का कड़ा विरोध किया व आरोप लगाया कि इसके माध्यम से अल्पसंख्यकों को पर जोर दिया कि चर्चा के जरिए ही प्रश्न हल होते हैं। धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक को महाविकास आघाड़ी के घटक दल शिवसेना का समर्थन मिला जबकि कांग्रेस व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने इसका तीव्र विरोध किया।
राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होने का दावा करते हुए काफी निवेश आने की संभावना व्यक्त की गई। सातारा जिला परिषद चुनाव के दौरान शंभुराज देसाई के साथ पुलिस दुर्व्यवहार व मारपीट को लेकर शिंदे सेना ने विधानपरिषद में आक्रमक रूख दिखलाया। उपसभापति नीलम गोर्हे ने सातारा के पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी को निलंबित करने का निर्देश दिया लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह दांव पलट दिया क्योंकि गृहमंत्रालय उनके अधीन होने से इस तरह के मामले में फैसला लेने का अधिकार उनके पास है।
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इस सत्र में फिर से सिद्ध हो गया कि विपक्ष कमजोर है और वही हालत सरकार में शामिल शिवसेना शिंदे की है। मुख्यमंत्री ने अपनी मजबूती सिद्ध कर दी। नासिक सेक्स स्कैंडल में महिला आयोग की अध्यक्ष रुपाली चाकणकर की कथित संलिप्तता व नरहरी झिरवल की तस्वीर की वजह से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की परेशानी बढ़ गई है।