चुनाव के बाद उजड़ गया खेमा (सौ.डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल की बुरी तरह पराजय के बाद लालू परिवार की जमीन खिसक गई। जरा सोचिए कि रेलमंत्री रहते समय लालू ने लैंड फार जॉब का चक्कर चलाकर बिहारियों को रेल में क्लास फोर नौकरियां दीं और बदले में जमीन का पट्टा अपने परिवारजनों के नाम लिखवा लिया था। चारा घोटाला और जमीन घोटाला जिस परिवार के लिए किया वही बिखर गया। इसे देखकर हमें दर्द भरा गीत याद आता है- देखी जमाने की यारी, बिछुड़े सभी बारी-बारी!’
हमने कहा, ‘लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने अपने भाई तेजस्वी यादव व उनके निकट सहयोगियों संजय यादव और रमीज पर आरोप लगाया कि इन लोगों ने उसे अपमानित कर घर से बाहर फेंक दिया। रोहिणी ने कहा कि उन लोगों ने कहा कि मैंने अपनी गंदी किडनी लालू को डोनेट की और बदले में करोड़ों रुपए और लोकसभा का टिकट लिया। लालू की 7 बेटियों में से 3 रागिनी, चंदा और राजलक्ष्मी अपने पिता का पटना निवास छोड़कर चली गईं। इसके पहले गत वर्ष लालू ने अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव से नाता तोड़ लिया था और पार्टी से निकाल दिया था।’
पड़ोसी ने कहा, ‘तेजप्रताप नौटंकीबाज है। वह पीले वस्त्र पहनता और बांसुरी बजाता है। वह धमकी देता है कि अब सुदर्शन चक्र चलेगा। तेजप्रताप ने रोहिणी की तरफदारी करते हुए कहा कि लालू एक इशारा करें तो बिहार की जनता इन गद्दारों को जमीन में गाड़ देगी।’ हमने कहा, ‘चुनाव हारने की बौखलाहट से लालू के कुनबे का माथा फिर गया है। जंगल राज चलानेवालों के परिवार में जंग छिड़ गई है।
ये भी पढ़ें– नवभारत विशेष के लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें
नवीं फेल तेजस्वी, इंजीनियर रह चुके नीतीश कुमार का मुकाबला नहीं कर पाए। भाजपा के रथ ने राजद को रौंद कर रख दिया। लालू परिवार पर शनि, राहु-केतु की दशा चल रही है। परिवार में वार छिड़ गया है। पाप की कमाई करनेवालों का आगे चलकर यही हाल होता है। चुनाव चिन्ह लालटेन के साथ किस्मत भी फूट गई। छाई हार की हताशा, लालू के घर में तमाशा।’
लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा