नवभारत निशानेबाज: आश्चर्यजनक किस्मत का चक्कर, नर्स बन गई हेल्थ मिनिस्टर
Bhagya vs Karma: जीवन में सफलता भाग्य से मिलती है या कर्म से? इसी सवाल पर पड़ोसी और ‘निशानेबाज’ के बीच रोचक बहस छिड़ती है, जिसमें कर्म और पुरुषार्थ के महत्व पर जोर दिया गया है।
- Written By: अंकिता पटेल
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Navabharat Nishanebaaz: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, हमने भाग्य को लेकर सुना था- पढ़ें फारसी बेचें तेल, ये देखो किस्मत का खेल ! एक पुराने फिल्मी गीत के बोल थे- इधर तो हाथ ला प्यारे, दिखाऊं दिन में भी तारे, लिखा है क्या लकीरों में, फकीरों से सुन जा रे! हमारे कहने का मतलब है नच विद्या, नच पौरुषं, भाग्यं सर्वत्र लभेत । न विद्या काम आती है, न बाहुबल ! व्यक्ति का भाग्य या प्रारब्ध ही उसको नचाता है। अमीरी-गरीबी, सुख-दुख, मिलन बिछोह, जन्म-मृत्यु सब उस प्रारब्ध के अनुसार होते हैं जो ईश्वर ने तय कर रखा है।’
हमने कहा, ‘बेकार का ज्ञान मत बघारिए, व्यक्ति अपने कर्म से स्वयं का भाग्य बनाता है। वकील, डॉक्टर, इंजीनियर पढ़-लिखकर अपनी योग्यता से उपलब्धि पाते हैं। हुनर संवारो।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि एम्स दिल्ली में प्रशिक्षित नर्स निशा मेहता नेपाल की स्वास्थ्य मंत्री बन गई। अब वह ज्यादा अच्छे से हेल्थ केयर कर सकेंगी। वह स्वास्थ्य समस्याओं की बुनियादी जानकार हैं। क्लास रूम की पढ़ाई और अस्पतालों के वार्ड की ड्यूटी से बाहर निकलकर उन्होंने राजनीति में ऊंचा मुकाम हासिल कर लिया। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेनशाह भी रैप सॉन्ग गाने वाले रैपर रह चुके हैं।
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अपने देश में एकता कपूर के टीवी सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में लगातार 7 वर्षों तक तुलसी बहू का किरदार निभाने वाली स्मृति ईरानी 2019 में राहुल गांधी को अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव में हराकर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री बन गई थीं। इस 12वीं पास महिला के अधीन देश के सारे विश्वविद्यालयों के विद्वान वॉइस चांसलर और डीन आते थे। जब किस्मत ने पलटा खाया तो 2024 में स्मृति ईरानी चुनाव हार गईं। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें फिर से मंत्री बनाना जरूरी नहीं समझा। वह फिर मुंबई लौटकर एकता कपूर के उसी सीरियल में पुरानी भूमिका निभाने लगीं।’
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हमने कहा, ‘किसी का राजयोग हमेशा टिका नहीं रहता। स्मृति ईरानी की हालत देखकर संत कबीर का दोहा याद आता है, मेरो मन कहां अनत सुख पावे, जैसे उड़ जहाज को पंछी फिर जहाज पे आवे!’
