प्रफुल हिंगे व साबिक हुसैन (डिजाइन फोटो)
Praful Hinge Sakib Hussain IPL Debut: इससे पहले इस सवाल का जवाब मिलता कि प्रफुल हिंगे कौन हैं, वह अपने पहले ही ओवर में वैभव सूर्यवंशी, ध्रुव जुरेल व प्रेटोरियस को वापस पवेलियन भेजकर IPL में इतिहास रच चुके थे, प्रतियोगिता के अपने डेब्यू ओवर में 3 विकेट लेकर क्रिकेट प्रेमी इस प्रश्न के उत्तर की प्रतीक्षा में थे ही कि राजस्थान रॉयल्स के समक्ष दूसरे छोर से भी आग बरसने लगी कि आईपीएल में ड्रीम डेब्यू करने वाला यह साकिब हुसैन कौन है? जहां प्रफुल ने अपने निर्धारित 4 ओवर में 34 रन देकर 4 विकेट लिए, वहीं साकिब ने अपने 4 विकेट के लिए मात्र 24 रन खर्च किए और आईपीएल के दोनों प्रथम प्रदर्शनकारियों ने सनराइजर्स हैदराबाद को 57 रन से शानदार जीत दिलाई।
IPL के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि दो युवा तेज गेंदबाज अपने आईपीएल करिअर का पहला मैच खेल रहे थे और दोनों ने ही 4-4 विकेट लेकर अप्रत्याशित प्रभावी प्रदर्शन किए व देशव्यापी चर्चा का विषय बन गए। गुदड़ी के इन लालों की खोज भारत के पूर्व तेज गेंदबाज वरुण एरन ने की और उनमें तकनीकी सुधार ऑस्ट्रेलिया के लीजेंड ग्लेन मैकग्रा की मदद से आया।
एक रात में स्टार बनने से पहले प्रफुल व साकिब की जो संघर्ष कथाएं हैं, वह प्रेरणादायक हैं। प्रफुल हिंगे की परफॉर्मेंस पर उनके पिता प्रकाश हिंगे का गदगद हो जाना आश्चर्य न था। प्रकाश खुद तेज गेंदबाज थे। अब वह अपने 24 वर्षीय बेटे प्रफुल में अपने सपने साकार होते हुए देख रहे थे। उन्होंने बताया, ‘हम बहुत खुश हैं। अगर कोई अपना पहला मैच खेल रहा है, इतना अच्छा परफॉर्मेंस कर रहा है और टीम को जीत दिला रहा है, तो फिर इससे अधिक की क्या उम्मीद की जा सकती है। पहले ही ओवर में 3 विकेट लेकर तो उसने रिकॉर्ड भी बनाया।’ प्रफुल ने 11-12 साल की आयु में नागपुर की रेशिमबाग क्रिकेट अकादमी जॉइन की थी। प्रफुल ने विदर्भ के लिए अंडर 12, अंडर-14 व अंडर-16 में अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे वह राज्य की अंडर-19 टीम में शामिल हो गए।
उसी मैच में दूसरे छोर से एक अन्य तेज गेंदबाज भी अपने सपने साकार कर रहा था। वह भी अपना पहला IPL मैच खेलते हुए उसने भी 4 विकेट लिए। उसे भी वरुण ने ही खोजा था। यह साकिब हुसैन थे। न्यूजीलैंड के पूर्व गेंदबाज मिचेल मैकक्लेनाघन ने कहा, ‘यह निडर विलक्षण प्रतिभा है। शुरू में नई गेंद से इसने यशस्वी जायसवाल का बड़ा विकेट लिया और बाद में इसने स्लो ऑफ-कटर फेंकने की अपनी क्षमता प्रदर्शित की, जिससे हर कोई आश्चर्य में पड़ गया।
बिहार के गोपालगंज के रहने वाले साकिब के बचपन की तंगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके पास स्पाइक्स नहीं थे, जबकि एक तेज गेंदबाज के लिए यह आवश्यक जूते होते हैं। उनके सामने केवल यह विकल्प था- खेल लो या रोटी खा लो। साकिब के अनुसार, ‘स्पाइक्स 10,000-15,000 रुपए का आता है। जूता लेंगे तो खाएंगे कहां से?’
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साकिब की मां सुबुकतारा खातून बताती हैं, ‘एक दिन साकिब मेरे पास आकर बोला अम्मी, मेरे पास स्पाइक्स नहीं हैं। मैं क्रिकेट खेलना कैसे जारी रख सकता हूं? मेरे पास अपने बेटे को स्पाइक्स दिलाने के पैसे नहीं थे। हल्के से वजन के दो सोने के कुंडल थे। मैंने उन्हें बेच दिया और बेटे को जूते दिला दिए ताकि वह क्रिकेट खेलना जारी रख सके।’
साकिब के पिता अली अहमद हुसैन खेत मजदूर थे। परिवार ने अपना सारा दांव साकिब को क्रिकेटर बनाने पर लगा दिया था। वह स्थानीय प्रतियोगिताओं में खेलने जाता, वहां से जो 400-500 रूपए मिलते, उनसे घर का चूल्हा जलता। साकिब को आईपीएल के मैच में पॉवरप्ले व डेथ ओवर में गेंदबाजी का अवसर मिला। इस समय वह 140-145 किमी की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहा है। उसे विश्वास है कि अगले सीजन में वह 150 किमी प्रति घंटा पार कर जाएगा।
लेख- सारिम अन्ना के द्वारा