नवभारत संपादकीय: ईरान-अमेरिका तनाव का असर, गैस व तेल संकट की चुनौती से कैसे निपटें ?
India Fuel Shortage: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत में एलपीजी संकट गहराया। कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई दबाव से जनता परेशान, कालाबाजारी की आशंका बढ़ी।
- Written By: अंकिता पटेल
गैस सिलेंडर महंगा( सोर्स: सोशल मीडिया )
Iran US War LPG Impact: कच्चे तेल और एलपीजी संकट से देश जूझ रहा है। ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद एलपीजी लेकर पहला ‘शिवालिक’ जहाज 16 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा। अभी उससे गैस वितरण में कुछ दिन लगेंगे।
अभी देश में गैस आपूर्ति पिछले रखे गए स्टॉक से हो रही है। सरकार ने गत 7 मार्च से घरेलू उपयोग के सिलेंडर के दाम में 60 रुपए तथा व्यावसायिक सिलेंडर के दाम में 115 रुपए वृद्धि कर दी। इस तरह जनता पर भारी बोझ लाद दिया गया।
जनता के बीच आशंका व्याप्त ही गई कि एलपीजी की भारी कमी होगी और कीमतें और ज्यादा अढ़ेगी इसलिए एलपीजी सिलेंडर का कालाबाजार शुरू हुआ और गैस एजेंसियों के सामने लंबी कतारें लगने लगीं।
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ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने से पहले आयात खर्च, परिवहन व तेल शुद्धिकरण के बाद पेट्रोल की लागत 48 रुपए प्रति लीटर आती थी जिसे टैक्स वगैरह मिलाकर ग्राहक को दोगुने से भी ज्यादा दाम में बेचा आता था।
22 मई 2022 के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटे थे लेकिन सरकार ने उसका फायदा जनता तक नहीं पहुंचाया था। 10 वर्ष पूर्व भारत 43 प्रतिशत एलपीजी व 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता था।
अब मांग बढ़ने से देश को 65 प्र.श. एलपीजी व 87.70 प्र.श. कच्चा तेल आयात करना पड़ता है। जनवरी 2026 से ही अमेरिका व ईरान के बीच युद्ध की आशंका बढ़ गई थी लेकिन भारत ने उचित मात्रा में एलपीजी का स्टॉक तैयार नहीं किया।
न्यूनतम 3 माह के लिए जरूरी सुरक्षित स्टॉक अवश्य रखना चाहिए। युद्ध शुरू होने के 1 सप्ताह के भीतर ही देश में एलपीजी का भीषण अभाव महसूस होने लगा। स्पष्ट है कि हमारी अर्थव्यवस्था विदेश से तेल और गैस के आयात पर निर्भर है।
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत तेल विदेश से आयात करता है। इसे देखते हुए देश में तेल व गैस के लिए उत्खनन को बढ़ावा देना होगा तथा पेट्रोलियम पदार्थों के उपयोग में काटकसर लानी होगी।
ईवी वाहनों पर टैक्स कम कर उनकी बिक्री बढ़ाई जाए, केंद्र सरकार ने वैकल्पिक ईंधन के रूप में पीएनजी कनेक्शन जोड़ने तथा इंडक्शन कुकर का इस्तेमाल करने का आवाहन किया है।
गैस के संकट से होटल, रेस्टोरेंट जूझ रहे हैं। कुछ तो बंद भी हो गए। कारखानों के उत्पादन पर भी विपरीत असर पड़ा है। कर्मचारी बेरोजगार हो रहे हैं क्योंकि व्यावसायिक ग्राहकों को सिलेंडर आपूर्ति में 50 प्रतिशत कटौती की गई है।
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सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए 12,000 से अधिक छापे डाले गए जिसमें 15,000 से ज्यादा सिलेंडर जब्त किए गए, वर्तमान स्थिति में उपभोग इतना बढ़ गया है कि स्वावलंबन की दिशा में बढ़ना कठिन है।
ग्रामीण क्षेत्र में तो लोग लकड़ी वगैरह जला लेते हैं लेकिन शहरों में गैस के बगैर गुजारा नहीं है। सार्वजनिक परिवहन बढ़ाकर या वाहन शेयर कर डीजल-पेट्रोल उपभोग को नियंत्रित किया जा सकता है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
