नवभारत संपादकीय: 2028 की तैयारी अभी से? कांग्रेस ने साधे जातीय समीकरण; क्या बदलेंगे कर्नाटक के सियासी समीकरण?
DK Shivakumar CM: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को कांग्रेस की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। नए समीकरणों के जरिए पार्टी 2028 के चुनावों की तैयारी मजबूत करना चाहती है।
- Written By: अंकिता पटेल
कर्नाटक राजनीति, कांग्रेस, डीके शिवकुमार,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Karnataka Leadership Change: क्रांग्रेस ने राजस्थान और पंजाब में की गई अपनी गलतियों से सबक लेकर कर्नाटक के संदर्भ में परिपक्व निर्णय लिया। वयोवृद्ध सिद्धारमैया को हटाकर उनके स्थान पर वोक्कलिग समाज के डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला दूरदर्शितापूर्ण माना जाएगा। कर्नाटक की राजनीति में वोक्कलिग व लिंगायत समाजों के बीच प्रतिस्पर्धा रहती है।
पूर्व मुख्यमंत्री व बीजेपी के बुजुर्ग नेता बीएस येदियुरप्पा लिंगायत समाज के हैं जबकि बीजेपी के गठबंधन में शामिल जदसे नेता देवेगौड़ा वोक्कलिग समुदाय के हैं। सिद्धारमैया कुरुबा गौडा समुदाय के हैं जो ओबीसी में आता है। कांग्रेस ने शिवकुमार को सीएम बनाने के साथ दलित समाज के डा।जी। परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाया है। इस तरह 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभी से जातिगत समीकरण साथ लिया।
धैर्य और निष्ठा का मिला शिवकुमार को राजनीतिक फल
कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद पर बदलाव सुगमता से हो गया। पहले तय हुआ था कि सिद्धारमैया व शिवकुमार बारी-बारी से ढाई वर्ष सीएम रहेंगे लेकिन 3 वर्ष बाद भी सिद्धारमैया अपने पद पर बने हुए थे। कांग्रेस के प्रति पूरी निष्ठा रखते हुए शिवकुमार पार्टी हाईकमांड से न्याय की मांग करते रहे। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत दिलाने में शिवकुमार की प्रमुख भूमिका थी।
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केंद्रीय एजेंसियां उनके पीछे लगी थीं जिस कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। उन पर लगाए गए सारे आरोप निराधार निकले। भारी दबाव के बावजूद शिवकुमार ने पार्टी निष्ठा नहीं बदली। यदि उनके जैसा साधनसंपन्न व्यक्ति तनिक भी संकेत देता तो बीजेपी उसे अपने साथ लेने के लिए लाल कालीन बिछा देती। ऐसे में कांग्रेस टूट जाती। शिवकुमार ने ऐसा नहीं किया और धैर्यपूर्वक कांग्रेस हाईकमांड तक अपनी दावेदारी पहुंचाते रहे। इसके पहले कांग्रेस ने अपने गलत निर्णयों से बीजेपी को राज्यों में सत्तारुढ़ होने का मौका दिया था।
पुरानी गलतियों से सबक लेकर कांग्रेस की नई रणनीति
राजस्थान में युवा सचिन पायलट ने कांग्रेस को विजयी बनाने में मुख्य भूमिका निभाई थी, लेकिन पार्टी ने उनकी बजाय अनुभवी अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बना दिया। नतीजा यह हुआ कि पार्टी चुनाव हार गई। राजस्थान बीजेपी के हाथ चला गया। मध्यप्रदेश में सिंधिया, दिग्विजय सिंह व कमलनाथ का तालमेल नहीं जम पाया। ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए।
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इस चक्कर में मध्यप्रदेश में कांग्रेस खत्म जैसी हो गई। लोकसभा चुनाव में पूरी 29 सीटें बीजेपी ने जीत ली। पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चैनी को मुख्यमंत्री बनाना कांग्रेस को महंगा पड़ा। कांग्रेस ने पिछली गलतियों से सबक लेकर कर्नाटक में सही निर्णय लेकर अपनी मोर्चेबंदी मजबूत की है। आज भी देश में कांग्रेस प्रमुख विपक्षी दल है जिनके पास 15 से 20 प्रतिशत वोट हैं और उसके साथ ग्रामीण स्तर तक नेता-कार्यकर्ता हैं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
