Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

नवभारत विशेष: तेल, गैस, रसायन, खाद बेकाबू, युद्ध से बढ़ी महंगाई में हमारी जेब कैसे सुरक्षित रहे ?

War Oil Prices: वैश्विक जंग और तेल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है। एलपीजी, यात्रा और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो रही हैं, जिससे महंगाई और मंदी का खतरा गहरा रहा है।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Mar 27, 2026 | 07:44 AM

Global Oil Price Surge ( Source: Social Media )

Follow Us
Close
Follow Us:

Global Oil Price Surge: ट्रंप के शांति वार्ता नाटक से इतना तो हुआ कि तेल के दाम प्रति बैरल 100 डॉलर के आसपास ही घूम रहे हैं, लेकिन वह भी 27 फरवरी 2026 की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक हैं।

इसके अतिरिक्त गैस न सिर्फ महंगी है बल्कि उसकी कमी भी है, जिस कारण घरेलू रसोई व उद्योगों पर गहरी मार पड़ रही है। चूंकि जंग जारी है और ट्रंप के बड़बोलेपन के बावजूद उसके निकट भविष्य में रुकने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

इसलिए ईंधन के दाम तो आसमान स्पर्श करेंगे, जाहिर है, महंगाई भी बढ़ेगी और मंदी के खतरे भी बढ़ जाएंगे, तेल 150 डॉलर प्रति बैरल होने पर वैश्विक मंदी ले आएगा।

सम्बंधित ख़बरें

नवभारत निशानेबाज: किस्मत संवारने पर ध्यान, रोडमैप बनाने का अरमान

26 मार्च का इतिहास: ‘आधुनिक मीरा’ महादेवी वर्मा का जन्मदिन, बांग्लादेश का स्थापना दिवस

नवभारत संपादकीय: महिला आरक्षण व परिसीमन का लक्ष्य, 2029 चुनाव में बड़ा बदलाव

नवभारत विशेष: वॉर इमरजेंसी हुई तो कैसे बच पाएंगे लोग, भूमिगत बंकर सिर्फ सीमा क्षेत्र में

सवाल यह है कि जंग के इस पागलपन में सरकार हमारी जेबों को कैसे सुरक्षित रखे? हालांकि युद्ध हमसे दूर हो रहा है, लेकिन वह हम भारतीयों की जेबें ‘काट’ रहा है एलपीजी, फूड, यात्रा और रोजमर्रा की चीजों के दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। अगर जंग रुक जाए तो भी सप्लाई चालू होने में कई सप्ताह अवश्य लगेंगे।

हर सप्लाई चेन प्रभावित हो चुकी है, तेल व गैस की तो बात ही क्या, रसायन, खाद व फूड आइटम्स की भी कमी होती जा रही है। भारत में धीरे-धीरे यह कीमत उपभोक्ता को चुकानी पड़ रही है।

महंगा तेल यातायात को महंगा कर देगा। फलस्वरूप सब्जी, ग्रोसरी व रोजमर्रा की हर चीज महंगी हो जाएगी। फूड, यात्रा व हाउसिंग के क्षेत्रों में व खरीदारी क्षमता में कमी आएगी।

इलेट्रिक स्टोव जैसे विकल्पों को अपनाने से स्पष्ट है कि पैनिक मांग में भी वृद्धि हुई है, जिससे चीजों में कमी भी आई है और दाम भी बढ़े हैं। कुछ मॉडल तो ऑनलाइन आउट ऑफ स्टॉक हो भी चुके हैं।

कमर्शियल एलपीजी सप्लाई सीमित करने की वजह से सबसे पहली मार रेस्टोरेंट्स पर पड़ी थी। घरों में भी सिलिंडर की डिलीवरी देरी से हो रही है। कालाबाजारी पर नियंत्रण आवश्यक है, वर्ना स्थिति को बद से बदतर होने में देर नहीं लगेगी, पर्यटन पर कुप्रभाव महसूस किया जाने लगा है।

हवाई मार्गों पर पाबंदियां, अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स के पश्चिम एशिया की बजाय लंबे मार्गों से आने ने टिकटों के दामों को बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय यात्रा को हतोत्साहित किया है।

घरेलू पर्यटन भी प्रभावित होगा। गर्मियों की छुट्टियां नजदीक आ रही हैं, लेकिन महंगाई परिवारों को मजबूर कर देगी कि वह अपनी यात्राएं स्थगित करें या रद्द करें।

रुपया भी कमजोर होता जा रहा है कि एक अमेरिकी डॉलर लगभग 94 रूपये का हो गया है। कमजोर रुपये की वजह से आयात महंगा हो जाता है, विशेषकर तेल। अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो इसकी मार कंपनियों की बजाय उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगी।

आयातित गु जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स व खाद्य तेल महंगे हो जाएंगे और उनका बोझ भी घरों के बजट पर ही पड़ेगा। आर्थिक विकास धीमा हो जाएगा, निवेशक हतोत्साहित होंगे, कैपिटल आउटफ्लो तीव्र हो जाएगा।

महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार को सब्सिडी देनी पड़ेगी, जिससे फिस्कल घाटा बढ़ेगा। सरकार को चाहिए कि स्ट्रेट ऑफ हार्मूज से अपने जहाज लाने के प्रयासों को तेज करे, आवश्यक वस्तु कानून, 1955 को लागू करे ताकि उत्पादन, आपूर्ति व वितरण सुचारू रहे।

घरों, अस्पतालों व शैक्षिक संस्थाओं में सप्लाई नियमित जारी रह सके। राज्यों को चाहिए कि निगरानी सख्त करें ताकि जमाखोरी व काला बाजारी को नियंत्रित किया जा सके।

उपभोक्ता की जेब की सुरक्षा सिर्फ दामों को नियंत्रित करने से नहीं होगी बल्कि यह सुनिश्चित भी करना होगा कि उसको हर चीज ईमानदारी व आसानी से मिलती रहे।

तेल, गैस, रसायन, खाद बेकाबू

इजराइल और ईरान की दुश्मनी लगभग चार दशक पुरानी है। लेकिन 28 फरवरी 2026 से पहले, जब तक इजराइल व अमेरिका ने जर्मनी के चांसलर फ्रैंक वाल्टर स्टीनमेयर के शब्दों में ‘आत्मघाती युद्ध’ ईरान पर नहीं थोपा था, तब तक इस दुश्मनी से अधिकतर लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।

यह भी पढ़ें:-नवभारत निशानेबाज: किस्मत संवारने पर ध्यान, रोडमैप बनाने का अरमान

क्योंकि इसके पहले जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने कभी 20 प्रतिशत वैश्विक तेल व गैस सप्लाई नहीं काट थी, न ही स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को बंद किया था। अब यह दर्द सार्वभौमिक है।

क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बेतुके व अव्यवहारिक 15 सूत्रीय प्रस्तावों के चलते, जिन्हें ईरान को ठुकराना ही था और उसने ठुकरा भी दिये, इस कारण युद्ध भीषण रूप लेता जा रहा है।

लेख-शाहिद ए चौधरी के द्वारा

Global war oil prices inflation impact india economy

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Mar 27, 2026 | 07:44 AM

Topics:  

  • Global Economy
  • Navbharat Editorial
  • Palm Oil Price

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.