

Nashik Global Supply Chain Disruption: नासिक दुनिया के एक हिस्से में चल रहे युद्ध का असर नासिक के खुदरा बाजारों में साफ देखा जा रहा है। सूरजमुखी, सोयाबीन और मूंगफली जैसे प्रमुख खाद्य तेलों की कीमतों में पिछले कुछ दिनों के भीतर 15 से 30 रुपये प्रति किलो तक का इजाफा हुआ है। वहीं, सूखे मेवों की कीमतों ने भी आसमान छूना शुरू कर दिया है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट पूरी तरह चरमरा गया है।
व्यापारियों का कहना है कि आयात पर निर्भरता ही इस महंगाई का मुख्य कारण है। सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा रूस और यूक्रेन से आता है, जबकि सोयाबीन और अन्य तेलों की वैश्विक आपूर्ति मध्य पूर्व के देशों के रास्ते होती है।
इजरायल और ईरान के संघर्ष के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे माल की कमी हो गई है। नासिक के बाजार में ईरान से मामरा बादाम, पिस्ता, केसर और अंजीर का आयात बड़े पैमाने पर होता है। युद्ध के कारण यह सप्लाई लाइन कट गई है।
खाद्य तेलों की स्थिति (डिब्बा बंद दरें): सूरजमुखी तेल (13 किलो)। पुरानी कीमत 2.375 रुपये से बढ़कर अब 2.535 रुपये हो गई है।
सोयाबीन तेल (15 किलो): अब 2,270 रुपये के बजाय 2,430 रुपये में मिल रहा है।
मूंगफली तेल (15 किलो): इसमें सबसे बड़ी वृद्धि देखी गई है। दाम 2,700 रुपये से सीधे 3,030 रुपये पर
पहुँच गए है।
सूखे मेवों के बढ़ते दाम (प्रति किलो): मामरा बादामः जो पहले 3,400-3,500 रुपये था। अब 4,000 रुपये के पार है।
पिस्ता: 2,200 रुपये से बढ़कर 2,400 रुपये हो गया है।
अंजीरः 1,600 रुपये से उछलकर 2,000 रुपये प्रति किलो पर बिक रहा है।
केसरः प्रति ग्राम की कीमत 240 रुपये से बढ़कर 300 रुपये तक पहुंव गई है।
व्यवसायी प्रवीण संचेती के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध और आयात में आ रही बाधाओं के कारण थोक और खुदरा दरों में अंतर लगातार बढ़ रहा है। यदि वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में आम जनता को और भी ज्यादा महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का सीधा असर नासिक की रसोई और शिक्षा व्यवस्था पर दिखने लगा है। गैस की भारी किल्लत के कारण सरकार ने व्यावसायिक सिलेंडरों के वितरण पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसका सबसे भयावह असर उन हॉस्टली और आश्रमशालाओं पर पड़ रहा है जहाँ हजारों छात्र रहकर शिक्षा पा रहे है।
गैस आपूर्ति बाधित होने से जिले की शैक्षणिक व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, शहर के आडगांव स्थित हॉस्टल में 950 और नासर्डी पुल हॉस्टल में 450 छात्र रहते हैं। इन 1400 छात्रों के भोजन के लिए बड़ी मात्रा में व्यावसायिक गैस की आवश्यकता होती है, जो फिलहाल छपा है, जिले के दूर-दराज इलाकों में चलने वाली आश्रमशालाओं और जिला परिषद के स्कूलों में चल रही 'मध्याहन भोजन' योजना भी इस किल्लत की चपेट में है।
खारा, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल डिग्गीकर ने पूरे राज्य में एलपीजी की निर्वाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और वितरण पर कड़ा नियंत्रण रखने के निर्देश दिए है।
ईरान-इजरायल युद्ध की पृष्ठभूमि में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की संभावित कमी को रोकने के लिए राज्य सरकार विभिन्न एहतियाती कदम उठा रही है। घरेलू एलपीजी गैस की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा को टालने और बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने जिला स्तर पर विशेष समितियों के गठन का निर्णय लिया है।
इस समिति में जिलाधिकारी पुलिस अधीक्षक, जिला आपूर्ति अधिकारी और सभी सरकारी गैस कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इन समितियों की मुख्य जिम्मेदारी गैस आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करना, कानून-वावस्था बनाए रखना और प्रतिदिन की स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करना होगी।