India Growth Rate OECD Forecast ( Source: Social Media )
India Growth Rate OECD Forecast: यद्यपि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से समूचे विश्व की इकॉनॉमी पर विपरीत असर पड़ा है। भारत की प्रगति की रफ्तार भी इससे प्रभावित हुई है। आर्थिक सहयोग व विकास संगठन (ओईसीडी) ने भारत की विकास दर घटाकर 6.1 प्रतिशत तक नीचे जाने का अनुमान व्यक्त किया है।
यह विकास दर 2025 में जी-20 देशों में सर्वाधिक 7.5 प्रतिशत श्री। खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीय श्रमिक वहां से जो रकम स्वदेश भेजते थे। उस पर भी युद्ध की काली छाया पड़ी है। भारत के चालू खाते का घाटा 2026-27 में एक से डेढ़ प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।
देश के बढ़ती मांग सेवा, निर्यात, युवा कार्य शक्ति तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था हमारी आधारभूत ताकत रहे हैं जो बाहरी आघात व हलचलों से हमें काफी हद तक सुरक्षा देते हैं।
2008 में जब अमेरिका में लेहमन संकट की वजह से मंदी आई थी और बैंक धड़ाधड़ बंद हो रहे थे तब भी भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को संभालकर रखा था। अब फिर अनिश्चिततापूर्ण वैश्विक माहौल ने चुनौती दी है।
अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने गत 5 अप्रैल 2026 को जारी अपनी क्रेडिट ओपिनियन रिपोर्ट में भारत की विकासदर 6.8 प्रतिशत से घटाकर सीधे 6 प्रतिशत पर ला दी।
अमेरिका और इजराइल के आक्रमण का जवाब देते हुए ईरान ने होर्मुज खाड़ी से जहाजों का यातायात रोक दिया। इससे विश्व ऊर्जा बाजार को अभूतपूर्व आघात पहुंचा और कच्चे तेल के दाम 50 प्रतिशत बढ़ गए। भारत विश्व का तीसरा बड़ा तेल आयातकर्ता है तथा अरब देशों से आने वाले तेल पर काफी हद तक निर्भर है।
भारत अपनी जरूरत का 55 प्रतिशत तेल तथा 90 प्रतिशत एलपीजी पश्चिम एशिया से आयात करता है। इसकी सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है कि राज्यों के चुनाव निपटने के बाद सरकार पेट्रोल, डीझल के दाम बढ़ा देगी।
इससे ट्रांसपोर्ट प्रभावित होने से भी महंगाई बढ़ेगी। पिछले वित्त वर्ष में महंगाई दर 2.4 प्रतिशत थी। मूडीज के अंदाज के अनुसार चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर 4.8 प्रतिशत पर जा पहुंचेगी।
ईवाई इकोनॉमी वाँच की रिपोर्ट के अनुसार मध्यपूर्व का यह संघर्ष यदि 1 वर्ष चला तो भारत की जीडीपी में 1 प्रतिशत गिरावट आएगी तथा खुदरा महंगाई में लगभग डेढ़ प्रतिशत वृद्धि होगी। ईंधन खर्च बढ़ने से उत्पादन व परिवहन खर्च में वृद्धि होगी।
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मैन्युफैक्चरिंग पर अभी से असर आने लगा है। प्रॉडक्ट की कीमत बढ़ रही है या आकार छोटा किया जा रहा है। इससे उपभोग में कमी आएगी, औद्योगिक मांग घटेगी तथा निवेश पर असर होगा, विकास दर में मंदी आने तथा तेल, गैस व खाद के दाम बढ़ने से सरकार के सब्सिडी खर्च में वृद्धि होगी, सरकार का राजस्व भी घटेगा।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा