परिवहन विभाग में मचा सियासी तूफान, RTO में भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप; वडेट्टीवार ने खोली वसूली सिंडिकेट की पोल

RTO Corruption Maharashtra: विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि बजरंग खरमाटे राज्यभर में वसूली सिंडिकेट चला रहे हैं, जिससे परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया।
Political Storm Rocks Transport Department: Major Allegations of Corruption at the RTO; Wadettiwar Exposes Extortion Syndicate
Jalgaon Transport Scam ( Source: Social Media )
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Jalgaon Transport Scam: जलगांव महाराष्ट्र के परिवहन विभाग (आरटीओ) में भ्रष्टाचार का जाल अब केवल विदर्भ तक सीमित नहीं रहा है। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री विजय वडेट्टीवार ने एक बड़ा धमाका करते हुए आरोप लगाया है कि सेवानिवृत्त उपप्रादेशिक परिवहन अधिकारी बजरंग खरमाटे पूरे राज्य में एक विशाल वसूली सिंडिकेट चला रहे हैं। वडेट्टीवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसके बाद वायरल हुए वीडियो ने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

100 रुपये की वसूली में 90 रुपये खरमाटे के!

वडेट्टीवार ने मुंबई और नागपुर में आयोजित पत्रकार परिषद में इस समांतर व्यवस्था की पोल खोली। पूर्व मंत्री का सबसे गंभीर आरोप है कि आरटीओ की अवैध वसूली का 90 प्रतिशत हिस्सा सीधे खरमाटे की जेब में जाता है, जबकि स्थानीय स्तर पर मात्र 10 प्रतिशत ही बंटत्ता है। खरमाटे वर्तमान में किसी सरकारी पद खरमाटे वर्तमान में किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, फिर भी पुणे, पिंपरी-चिंचवड और विदर्भ सहित पूरे राज्य के आरटीओ कार्यालयों पर उनका नियंत्रण है.

ईमानदार अधिकारियों को फंसाने की साजिश

वडेट्टीवार ने दावा किया कि जी अधिकारी इस वसूली तंत्र का विरोध करते हैं, उन्हें साजिश के तहत कुचल दिया जाता है- विरोध करने वाले इंस्पेक्टरों को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के झूठे मामलों में फंसाने का आरोप लगाया गया है। चंद्रपुर के मोटर वाहन निरीक्षक पवन पोटदुखे पर हुई कार्रवाई की उन्होंने पूर्वनियोजित साजिश बताया और टोल रिकॉर्ड की विसंगतियों को सबूत के तौर पर पेश किया, खरमाटे के सहयोगी भुवार, राजू नागरे और योगेश येरनार मिलकर ईमानदार अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं और करियर तबाह करने की धमकियां देते हैं।

CM व परिवहन मंत्री से सीधी जांच की मांग

विभाग में प्रमोशन, मनचाही बदली और ओवरलोड ट्रकों को छोड़ने का पूरा रेट कार्ड' इसी गिरोह द्वारा तय किया जाता है। पूर्व मंत्री ने दावा किया है कि उनके पास इस वसूली और धमकियों के ऑडियो क्लिप्स और फोन रिकॉर्डिंग जैसे पुख्ता सबूत मौजूद हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री से सवाल किया कि एक रिटायर्ड अधिकारी पूरे सरकारी विभाग को कैसे चला सकता है? क्या सरकार की मिलीभगत के बिना यह समांतर सत्ता संभव है? वडेट्टीवार ने चेतावनी दी है कि अगर इस 'बाहरी मास्टरमाइंड' के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो वे इस मुद्दे को और बड़े स्तर पर उठाएंगे। अब देखना यह है कि महायुती सरकार इस सिंडिकेट के खिलाफ सख्ती दिखाती है या फिर इसे बचाने की कोशिश करेगी।

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