निशानेबाज: गिरते रुपए से मेरी नींद में नहीं फर्क, मुख्य आर्थिक सलाहकार का तर्क
Rupee Depreciation Reasons: रुपया लुढ़के या गिरे, सरकार मान लेती है कि वह कहीं न कहीं अपनी पोजीशन बना लेगा। ट्रंप के टैरिफ की वजह से रुपए का यह हाल है।
- Written By: दीपिका पाल
गिरते रुपए से मेरी नींद में नहीं फर्क (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने बेपरवाही जताते हुए कहा कि गिरते रुपए से मेरी नींद में खलल नहीं पड़ता। इस बारे में आपकी क्या राय है?’ हमने कहा, ‘कुछ लोग बहुत निश्चिंत या बेफिक्र होते हैं। कहते हैं कि रोम जलता रहा लेकिन वहां का सम्राट नीरो बांसुरी बजाता रहा। आपने मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘शतरंज के खिलाड़ी’ पढ़ी होगी या इसी पर बनी सत्यजीत राय की फिल्म देखी होगी जिसमें दिखाया गया है कि अंग्रेजों की फौज आ पहुंची लेकिन 2 नवाब (संजीवकुमार और सईद जाफरी) शतरंज की बिसात से उठे ही नहीं। इसे कहते हैं बेफिक्री का आलम.’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, रुपया गर्म पानी में पड़े स्वेटर के समान सिकुड़ गया लेकिन चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर कहते हैं कि इससे मेरी नींद पर कोई असर नहीं पड़ता। आज के नौजवानों की भाषा में इसे कह सकते हैं। आई एम कूल! मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.’ हमने कहा, ‘नेताओं और शान से रहनेवाले बड़े अधिकारियों का रवैया ऐसा ही रहता है। किसान आत्महत्या करते रहें, बेरोजगारों की कतार लगती रहे, भ्रष्टाचार शिखर पर जाता रहे, चुनाव में धांधली या वोट चोरी के आरोप लगते रहें, उनकी नींद में कोई व्यवधान नहीं आता। कुंभकर्ण तो 6 महीने सोया रहता था। उसे जगाने के लिए रावण को बहुत कोशिश करनी पड़ी। कुंभकर्ण के कानों के पास नगाड़े बजवाए गए। उसके विशाल शरीर पर हाथी दौड़ाए गए तब कहीं उसकी नींद खुली.’
सम्बंधित ख़बरें
‘तो क्या हुआ? 100 सिर्फ एक नंबर है’, डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये पर PM मोदी के आर्थिक सलाहकार का बड़ा बयान
नवभारत संपादकीय: डॉलर के आगे कमजोर रुपया, महंगाई और आयात पर बढ़ा दबाव; विदेश यात्रा भी महंगी
Dollar vs Rupee: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ रुपया, 63 पैसे चढ़कर 95.73 पर पहुंचा; लगातार दूसरे दिन तेजी
Explainer: आजादी से अब तक…कैसे ₹3 से ₹95 तक पहुंचा डॉलर का सफर, जानें कब-कब और क्यों गिरा हमारा रुपया?
ये भी पढ़ें– नवभारत विशेष के लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें
पड़ोसी ने कहा, ‘देश के किसान-मजदूर कड़ी मेहनत के बाद थकान से चूर होकर गहरी नींद में सो जाते हैं। दूसरी ओर बड़े-बड़े उद्योगपति अपने बिजनेस की चिंता में सो नहीं पाते और करवटें बदलते रहते हैं। डाक्टरों की राय है कि जिस व्यक्ति को कम से कम 7 घंटे अच्छी तरह नींद आती हैं उसका स्वास्थ्य अच्छा रहता है। रुपया लुढ़के या गिरे, सरकार मान लेती है कि वह कहीं न कहीं अपनी पोजीशन बना लेगा। ट्रंप के टैरिफ की वजह से रुपए का यह हाल है। जहां तक नींद का सवाल है, कहते हैं कि किस-किस की फिक्र कीजिए, किस-किस को रोइए, आराम बड़ी चीज है, मुंह ढक के सोइए!’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
