नवभारत विशेष: भारत की रेबीज वैक्सीन का विदेश में विरोध क्यों?

Rabies Vaccine Alert: सीडीसी और ऑस्ट्रेलिया ने चेतावनी दी है कि भारत में ‘अभयरब’ एंटी-रेबीज वैक्सीन की नकली खेप बिक रही है। विशेषज्ञों के अनुसार संदेह होने पर दोबारा टीकाकरण सुरक्षित है।
Fake Abhayrab Vaccine Rabies Vaccine Alert India CDC Warning
प्रतीकात्मक तस्वीर (डिजाइन फोटो)
Published on
Updated on

Fake Abhayrab Vaccine News: ऑस्ट्रेलिया की टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन और अमेरिका की सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने पिछले साल के अंत में स्वास्थ्य चेतावनी जारी की कि 'अभयरब' (इंसानों को लगाई जाने वाली एंटी-रेबीज वैक्सीन) नकली आ रही है। सीडीसी ने 25 नवंबर 2025 को अपने ट्रैवेल नोटिस में कहा कि मानवों के लिए एक नकली 'अभयरब' वैक्सीन भारत के मुख्य शहरों में बेची जा रही है और वह रेबीज को रोकने में भी नाकाम रह सकती है।

ऑस्ट्रेलिया ने अपने यात्रियों, जिन्होंने भारत में 1 नवंबर 2023 के बाद अभयरब लगवाई, से कहा कि वह इस टीकाकरण को अमान्य मानें और वैक्सीनेशन का नया कोर्स आरंभ करें।

क्या बोली वैक्सीन बनाने वाली कंपनी?

अभयरब बनाने वाली भारत की प्रमुख वैक्सीन निर्माता कंपनी इंडियन इम्युनोलोजिकल्स लिमिटेड (आईआईएल) के उपाध्यक्ष सुनील तिवारी का कहना है कि भारत में निर्मित वैक्सीन का प्रत्येक बैच नेशनल कंट्रोल लेबोरेटरी (सेंट्रल इग्स लेबोरेटरी) द्वारा टेस्ट व जारी किया जाता है। अगर रोगी को संदेह है कि उसे नकली वैक्सीन लगी है, तो बुनियादी प्रोटोकॉल यह है कि वह योग्य डॉक्टर से सलाह ले कि क्या उसे सत्यापित, प्रामाणिक वैक्सीन की रिप्लेसमेंट खुराक लेने की आवश्यकता है।

दोबारा वैक्सीन लेने की अनुमित

विशेषज्ञों का कहना है कि दोबारा रेबीज वैक्सीन लेने की अनुमति है और वह सुरक्षित भी है। रेबीज वैक्सीन निक्रिय वैक्सीन होती है यानी उसमें जीवित वायरस नहीं होता है। इसलिए जरूरत पड़ने पर उसे बार-बार दिया जाना भी सुरक्षित है। स्वास्थ्य संस्थाएं वैक्सीन की संदिग्ध प्रभाविकता या एक्सपोजर की स्थिति में पुनःटीकाकरण की अनुमति देती है। जिन मामलों में वैक्सीन की प्रामाणिकता, अनुचित खुराक, शीत श्रृंखला का अभाव या रिकार्ड्स का अभाव होता है तो भी पुनःटीकाकरण का सुझाव दिया जाता है।

डॉक्टरों का यह भी कहना है कि जिस व्यक्ति का टीकाकरण हो चुका है और उसे अपनी इम्यूनिटी स्टेटस पर शक है, तो उसे भी खुराक दोहराने का सुझाव दिया जाता है। जिस व्यक्ति के शरीर की प्रतिरोधात्मक क्षमता कमजोर होती है, उसे भी पुनःटीकाकरण की आवश्यकता पड़ सकती है। रेबीज जीवन पर विराम लगाने वाला रोग है, इसलिए इम्यूनिटी सुनिश्चित करने से संबंधित कोई भी प्रश्न पुनःटीकाकरण को लाजमी बना देता है।

पहले जिसका टीकाकरण हुआ ही नहीं उसे पूरे कार्यक्रम का पालन करना होता है, यानी उसे 0, 3, 7, 14 व 28 दिनों में वैक्सीन लेनी होती है। गंभीर एक्सपोजर की स्थिति में रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन दी जाती है। लेकिन अगर व्यक्ति का पहले टीकाकरण हो चुका है और उसके विश्वसनीय प्रमाण मौजूद हैं, तो फिर सिर्फ बूस्टर खुराक की ही जरूरत पड़ती है।

रेबीज से कितनी मौत मौतें होती है?

संसार में रेबीज के कारण जो कुल मौतें होती हैं, उनमें से अकेले 36 प्रतिशत भारत में होती हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अपने देश में 18,000-20,000 मौतें सालाना रेबीज की वजह से होती हैं। भारत में रेबीज के केस व मौतें जो रिपोर्ट होती हैं, उनमें से 30-60 प्रतिशत का संबंध 15 वर्ष से कम के बच्चों से है, क्योंकि बच्चों में कुत्ते के काटने को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। अगर तुरंत व उचित मेडिकल केयर मिले तो रेबीज मौत से हर व्यक्ति को बचाया जा सकता है, शत-प्रतिशत।

लोगों को रेबीज से सुरक्षित रखने का सबसे सस्ता व अच्छा तरीका यह है कि कुत्तों का वैक्सीनेशन कर दिया जाए। भारत का लक्ष्य है कि कुत्तों से होने वाली रेबीज पर 2030 तक विराम लगा दिया जाए और इसके लिए नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम व संयुक्त नेशनल प्लान फॉर रेबीज एलिमिनेशन लागू किए गए हैं।

नकली होने की आशंका

एक बार लक्षण दिखने के बाद रेबीज का कोई इलाज नहीं है, मौत निश्चित है। इसलिए इससे बचाव करना ही बेहतर है। अगर आपको कोई जानवर काट ले तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। रेबीज का टीका लगवाएं, घाव को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं। पालतू जानवरों को रेबीज का टीका लगवाएं। आवारा जानवरों से दूर रहें।

-लेख नरेंद्र शर्मा के द्वारा

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com