

UPI Transaction Drop In September: मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) 15 अक्टूबर से देशभर में लागू होने जा रहा है। लेकिन, इससे पहले सितंबर महीने में यूपीआई ट्रांजैक्शन में 1.8 प्रतिशत की गिरावट आई है। अब यह 24.07 अरब पर आ गया है, जो कि अगस्त में रिकॉर्ड 24.51 अरब यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए थे। एमडीआर लागू होने को लेकर व्यापारियों की चिंता के बीच लेनदेन में यह गिरावट देखने को मिली है।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को संचालित करने वाली कंपनी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, लेनदेन की वैल्यू 29.82 लाख करोड़ रुपये से 1.5 प्रतिशत घटकर 29.37 लाख करोड़ रुपये रह गई।
NPCI की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर महीने में हर रोज औसतन 80.2 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए, जिसकी वैल्यू 97,913 करोड़ रुपये रहा। रोजाना लेनदेन की संख्या और वैल्यू दोनों के लिहाज से यह रिकॉर्ड है। यह पहला मौका भी है जब रोजाना यूपीआई लेनदेन की संख्या 80 करोड़ के पार पहुंची है।
फिनटेक कंपनी कैशफ्री के को-फाउंडर रिजू दत्ता के मुताबिक, देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने से यूपीआई लेनदेन में तेजी आई है। सितंबर के मध्य में गणेश चतुर्थी में लोगों ने त्योहारों से जुड़ी खरीदारी शुरू दी थी। उन्होंने कहा कि अप्रैल से अगस्त के बीच रोजना यूपीआई से करीब 96,000 करोड़ रुपये का लेनदेन हो रहा था।
इस दौरान लेनदेन की संख्या बढ़ने के बावजूद रकम लगभग इसी लेवल पर बनी हुई थी, क्योंकि अधिकांश ट्रांजैक्शन छोटी रकम के थे। रिजू दत्ता के अनुसार, सितंबर महीने में एक्स्ट्रा ट्रांजैक्शन की औसत राशि पहले के मुकाबले ज्यादा रही। इससे रोजाना यूपीआई ट्रांजैक्शन का वैल्यू साफ तौर पर 96,000 करोड़ रुपये के लेवल से ऊपर निकल गया।
गौरतलब है कि यूपीआई पर एमडीआर लागू किए जाने को लेकर व्यापारिक संगठन चिंता जता रहे हैं। इसी बीच सितंबर महीनें के आंकड़े ने इस चिंता को और बढ़ा दी है। पिछले छह साल से चली आ रही जीरो चार्ज की व्यवस्था में अब बदलाव होने जा रहा है।
एमडीआर को लेकर सरकार का तर्क है कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (पर्सन-टू-पर्सन) को किए जाने वाले यूपीआई टांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। जबकि व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के पेमेंट पर 0.40 प्रतिशत चार्ज लगेगा, जिसकी अधिकतम लीमिट 300 रुपये होगी।
रिजू दत्ता के मुताबिक, एमडीआर लागू होने से यूपीआई लेनदेन पर ज्यादा असर नहीं होने वाला है, क्योंकि यह कार्ड के मुकाबले अब भी सस्ता रहेगा और आसानी से पेमेंट की सुविधा के कारण काफी लोकप्रिय है। छोटे दुकानदार को किए जाने वाले पेमेंट पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा। इस कैटेगरी में ऐसे छोटे कारोबारी आते हैं, जिन्हें यूपीआई के जरिए महीने में एक लाख रुपये तक का पेमेंट मिलता है।
सितंबर महीने में सालाना आधार पर यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 23 प्रतिशत और वैल्यू 18 प्रतिशत बढ़ा है। एनपीएसटी के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर दीपक चंद ठाकुर ने कहा कि त्योहारी सीजन में डिजिटल पेमेंट में और तेजी देखी जा सकती है। कस्टमर ऑनलाइन और दुकानों में खरीदारी के लिए यूपीआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा रहे हैं।
तत्काल इंटर-बैंक इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर सेवा आईएमपीएस के जरिए होने वाले ट्रांजैक्शन की संख्या सितंबर में 1.7 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 35.4 करोड़ रह गई। अगस्त में यह संख्या 36 करोड़ थी। हालांकि, मूल्य के लिहाज से आईएमपीएस लेनदेन अगस्त के 7.04 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर सितंबर में 7.06 लाख करोड़ रुपये हो गया।
डिजिटल पेमेंट के मोर्चे पर सितंबर महीने में आईएमपीएस (IMPS) और आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) के आंकड़ों में मिला-जुला रुझान देखने को मिला है। सालाना आधार पर सितंबर में आईएमपीएस लेनदेन की संख्या में 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि इसके कुल मूल्य में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
हालांकि, मासिक आधार पर स्थिति बेहतर रही और रोजाना आईएमपीएस लेनदेन की संख्या अगस्त के 1.161 करोड़ से बढ़कर सितंबर में 1.180 करोड़ पर पहुंच गई। इस दौरान रोजाना लेनदेन का मूल्य भी 22,701 करोड़ रुपये से बढ़कर 23,530 करोड़ रुपये हो गया।
दूसरी ओर, आधार आधारित भुगतान प्रणाली (AePS) के जरिए होने वाले लेनदेन में सुस्ती देखने को मिली। सितंबर में कुल AePS लेनदेन की संख्या 8 फीसदी घटकर 9.578 करोड़ रह गई, जबकि इसका कुल मूल्य अगस्त के 26,035 करोड़ रुपये से 9 फीसदी घटकर 23,734 करोड़ रुपये पर आ गया।
इसके अलावा, रोजाना के आधार पर भी AePS लेनदेन की संख्या 33.5 लाख से घटकर 31.9 लाख और इसका दैनिक मूल्य 840 करोड़ रुपये से घटकर 791 करोड़ रुपये रह गया।