निशानेबाज: बापू से बिश्नोई तक हर कोई मौन, देखो अगला शिकार बनेगा कौन
मौन व्रत के दौरान बापू लिखकर बात करते थे, उस अवधि में उनके आश्रमवासी भी सहमे रहते थे कि न जाने यह मौन आगे चलकर कितना विस्फोटक होगा।
- Written By: दीपिका पाल
आज का निशानेबाज ( सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, महात्मा गांधी ने कहा था कि मौन में ईश्वर बसता है। जब भी बापू मौन व्रत करते थे, ब्रिटिश शासकों के हाथ-पैर फूल जाते थे।मौन व्रत के दौरान बापू लिखकर बात करते थे, उस अवधि में उनके आश्रमवासी भी सहमे रहते थे कि न जाने यह मौन आगे चलकर कितना विस्फोटक होगा।महात्मा गांधी के सत्याग्रह और सविनय अवज्ञा आंदोलन के समान उनका मौन भी बड़ा शक्तिशाली था।’
हमने कहा, ‘बापू के मौन व्रत की परंपरा अब बिश्नोई निभा रहा है।आपने ओमर शरीफ की फिल्म लारेंस ऑफ अरेबिया देखी होगी।अब लारेंस बिश्नोई के बारे में जान लीजिए।रिश्ते में साले-बहनोई हुआ करते हैं तो गैंगस्टरों में बिश्नोई का नाम मशहूर है।लारेंस बिश्नोई की खामोशी को आप लल बिफोर स्टॉर्म या तूफान के पहले की शांति कह सकते हैं।उसकी यह चुप्पी किसी की मौत की घंटी बजानेवाली हुआ करती है.’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, हमें मालूम है कि चाहे पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या हो या एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी का मर्डर, हर घटना से पहले लारेंस बिश्नोई ने 9 दिन का मौन व्रत रखा था।वह मौन के दौरान धार्मिक पुस्तकें पढ़ता है।वह खाना नहीं खाता और ध्यान लगाता है।मौन व्रत की अवधि में वह इशारों से बात करता है.’ हमने कहा, ‘यह बात समझ लीजिए कि बिश्नोई समाज काले हिरन को भगवान मानता है।
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लगभग 25 वर्ष पहले फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान उसके कलाकार शिकार करने गए थे।काले हिरन के अवैध शिकार के बाद से सलमान खान न केवल मामले-मुकदमे में फंसा बल्कि लारेंस बिश्नोई के निशाने पर भी आ गया।विधायक बाबा सिद्दीकी को इसलिए मारा गया क्योंकि वह सलमान खान का करीबी था।लारेंस का डर सलमान का पीछा नहीं छोड़ रहा है।’ पड़ोसी ने कहा, ‘लारेंस जेल में रहकर भी बेहद खतरनाक है।
उसके इशारे पर उसके गैंग के लोग एक्टिव हो जाते हैं।कहते हैं उसके पास 700 शूटर हैं।लोग मानते हैं कि वह मौन धारण कर अपनी शक्ति जागृत करता है।लारेंस के मौन से सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।वैसे सच तो यह है कि ईश्वर की मर्जी के बगैर पत्ता भी नहीं हिलता।भयभीत होने की बजाय मानना चाहिए कि डर के आगे जीत है!’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा
