निशानेबाज: एकनाथ शिंदे हुए अस्वस्थ, राजनीति के वायरस का असर
महाराष्ट्र में चुनाव नतीजों के बाद सीएम कौन बनेगा इसे लेकर खींचतान जारी है। इस बीच एकनाथ शिंदे की तबीयत नासाज हो गई। जिस पर 'निशानेबाज' ने निशाना लगा दिया है।
- Written By: मृणाल पाठक
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नवभारत डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद सीधे सातारा जिले के अपने पैतृक गांव दारे जा पहुंचे और वहां बीमार पड़ गए। उन्हें वायरल फीवर है और उन्हें सलाइन लगाई गई।’’
हमने कहा, ‘‘कोई भी व्यक्ति पहले मन से बीमार होता है। इसके बाद बीमारी तन पर असर करती है। होम्योपैथी वाले भी यही बताएंगे। यदि मन व्यथित है और अभिलाषा पूर्ण नहीं हो रही है तो व्यक्ति बेचैन और फिर अस्वस्थ हो जाता है। कहा गया है मन के हारे हार है, मन के जीते जीत! जब मन की इच्छा पूरी हो जाती है तो व्यक्ति गाने लगता है- मन मोरा नाचे मगन तग दा धीगी-धीगी, बदरा घिर आए, ऋतु है भीगी-भीगी!’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, राजनीति में बिजली के समान झटका लगता रहता है जिसे सहने की आदत होनी चाहिए। जब तक किस्मत में राजयोग है, ऊंचा पद बना रहता है लेकिन इसके बाद कुर्सी खाली करनी ही पड़ती है। जब व्यक्ति विरक्त हो जाए तो वह मराठी में कहता है- आम्ही जातो आपले गावा, आमुचा राम राम घ्यावा। (हम अपने गांव जा रहे हैं, हमारा राम-राम स्वीकार कीजिए)। शिंदे के मायानगरी मुंबई में न रुकते हुए गांव जाने का यही संदेश है।’’
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हमने कहा, ‘‘इंसान की इच्छाएं अनंत होती हैं। आपने अंग्रेजी कहावत सुनी होगी- इफ विशेज वेयर हार्सेज, बेगर्स वुड राइद देम। इसका अर्थ है- यदि इच्छाएं अश्व होतीं तो भिखारी भी उन पर सवारी करते। शिंदे एक बार सीएम रह लिए। उनके लिए फडणवीस ने त्याग किया था। अब त्याग करने की बारी शिंदे की है। राजनीति म्यूजिकल चेयर या संगीत कुर्सी के समान है जिसमें कुर्सी पर बैठनेवाले बदलते रहते हैं। तीन पत्ती के खेल में भी यदि पत्ते कमजोर हों तो दांव नहीं लगाना चाहिए। शिंदे को पता है कि बीजेपी को ज्यादा सीटें मिली हैं इसलिए देवाभाऊ का मुख्यमंत्री पद पर स्वाभाविक हक है। बीजेपी हाईकमान भी उनके पक्ष में है। ऐसे में वक्त का तकाजा है कि शिंदे झुक जाएं और जो मिलता है, वह ले लें।’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, ऐसा नहीं चलता। बारगेनिंग या सौदेबाजी करनी ही पड़ती है। शिंदे की बात सुननी ही पड़ेगी। यदि सब कुछ इतना आसान होता तो 23 नवंबर को चुनाव नतीजे आने के बाद अब तक देवेंद्र की सीएम पद पर शपथ हो जाती। पेंच कहीं न कहीं अटका है।’’
हमने कहा, ‘‘कमान ज्यादा खींचने से टूट जाती है। शिंदे को एडजस्टमेंट करना होगा। बीजेपी ने साफ कह दिया है कि 5 दिसंबर को नई सरकार की आजाद मैदान में शपथविधि हो जाएगी।’’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा
