नासिक में फेल हुआ महायुति का दांवपेंच; बीजेपी नेता के भाई की बगावत से बढ़ी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की टेंशन
Nashik MLC Election Eknath Shinde Shiv Sena Narendra Darade: नासिक विधान परिषद सीट पर बागी गोकुल गीते ने नहीं लिया नामांकन वापस; नरेंद्र दराडे के सामने खड़ी हुई बड़ी मुश्किल।
- Written By: अनिल सिंह
नासिक में फंसा पेंच एकनाथ शिंदे की बढ़ी मुश्किल, फेल हो गया सारा दांवपेंच (फोटो क्रेडिट-X)
Gokul Gite Independent Rebel Nashik: महाराष्ट्र स्थानीय निकाय विधान परिषद की 17 सीटों के लिए होने जा रहे इस चुनाव में नामांकन वापसी के अंतिम दिन दोनों ही प्रमुख धड़ों महायुति और महाविकास अघाड़ी (MVA) के खेमों में अभूतपूर्व हलचल देखी गई। अपनी ही पार्टियों और गठबंधन के आधिकारिक फैसलों के खिलाफ जाकर कई स्थानीय नेताओं ने बागी तेवर अपनाते हुए पर्चे दाखिल किए थे। हालांकि महायुति के वरिष्ठ नेताओं ने राज्य के कई हिस्सों में डैमेज कंट्रोल करते हुए बागियों को मनाने में सफलता पा ली, लेकिन नासिक की इस बेहद प्रतिष्ठित सीट पर आकर सारा गणित गड़बड़ा गया। पूरे राज्य की नजरें इस सीट पर टिकी हुई थीं क्योंकि यह महायुति के भीतर दोनों दलों के जमीनी दबदबे की परीक्षा थी।
सीट शेयरिंग के फॉर्मूले के तहत नासिक विधान परिषद सीट उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के खाते में गई है। शिवसेना ने यहां से मौजूदा विधायक नरेंद्र दराडे को महायुति का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर मैदान में उतारा है।
भाजपा नेताओं की मान-मनौव्वल को गोकुल गीते ने दिखाया ठेंगा
नासिक की इस सीट पर पेंच तब फंसा जब गठबंधन में सीट फाइनल होने से पहले ही भाजपा के कद्दावर स्थानीय नेता गणेश गीते ने भाजपा की तरफ से और उनके सगे भाई गोकुल गीते ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना-अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। इस दोहरी बगावत से घबराई महायुति ने अपने दो सबसे भरोसेमंद मंत्रियों, गिरीश महाजन और दादा भूसे को मध्यस्थता के लिए नासिक भेजा। पिछले दो-तीन दिनों से दोनों मंत्री गीते बंधुओं को नाम वापस लेने के लिए लगातार मनाने की कोशिश कर रहे थे। भारी दबाव के बाद गणेश गीते ने तो अंतिम समय पर अपना कदम पीछे खींच लिया, लेकिन गोकुल गीते चुनाव लड़ने के अपने फैसले पर अड़े रहे।
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मंत्रियों के सामने डटे रहे बागी, एकनाथ शिंदे गुट की बढ़ी मुसीबत
संकटमोचक मंत्री गिरीश महाजन ने व्यक्तिगत रूप से गोकुल गीते से लंबी चर्चा की और उन्हें पार्टी के भविष्य और गठबंधन धर्म का वास्ता देकर उम्मीदवारी वापस लेने के लिए मनाने की हरसंभव कोशिश की। इसके बावजूद गोकुल गीते ने शीर्ष नेतृत्व के आदेशों को दरकिनार करते हुए आखिरी मिनट तक अपना नामांकन वापस नहीं लिया। गोकुल गीते के इस अड़ियल रुख के कारण अब नासिक का यह चुनावी मुकाबला बेहद पेचीदा और त्रिकोणीय होने की कगार पर पहुंच गया है, जिससे महायुति के वोटों में बिखराव होना पूरी तरह से तय माना जा रहा है।
नरेंद्र दराडे के लिए बड़ी चुनौती, साख बचाने की लड़ाई
गोकुल गीते के मैदान में डटे रहने से नासिक विधान परिषद चुनाव में अब एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित मोड़ आ गया है। यह मुकाबला अब केवल कागजों पर महायुति बनाम विपक्ष का नहीं रह गया है, बल्कि व्यावहारिक तौर पर यह शिवसेना शिंदे समूह के आधिकारिक उम्मीदवार नरेंद्र दराडे और जमीनी पकड़ रखने वाले बागी नेता गोकुल गीते के बीच की सीधी लड़ाई बन चुका है। गोकुल गीते के रूप में नरेंद्र दराडे के सामने एक अत्यंत कठिन और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए यह सीट जीतना अब नाक का सवाल बन गया है, क्योंकि यहां हारने का सीधा मतलब जिला स्तर पर पार्टी के कमजोर होने के रूप में निकाला जाएगा।
