दिल्ली उच्च न्यायालय ने 22 नवंबर से प्रत्यक्ष सुनवाई के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की
- Written By: रवि शुक्ला
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नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 22 नवंबर से शुरू हो रही प्रत्यक्ष सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की, जिसमें अदालत भवन में वकीलों और वादियों के प्रवेश तथा अन्य संबंधित बातें स्पष्ट की गई हैं। रजिस्ट्रार जनरल मनोज जैन द्वारा जारी प्रोटोकॉल में अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन वादियों की ओर से वकील पेश हो रहे हैं, बिना विशेष आदेश के उन्हें अदालत कक्ष में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
उसमें यह भी कहा गया है कि अदालत आने वालों को दो गज की दूरी का कड़ाई से पालन करना होगा और अनिवार्य रूप से मास्क लगना होगा। एसओपी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 65 साल से ज्यादा आयु वाले वकीलों और लिपिकों तथा अन्य बीमारियों से ग्रस्त लोगों को अदालत में आने से बचना चाहिए।
एसओपी में कहा गया है, ‘‘अदालत के आदेश के बगैर ऐसे किसी भी वादी को सुनवाई में उपस्थिति होने की अनुमति नहीं है, जिनकी ओर से वकील पेश हो रहे हैं। 65 साल से ज्यादा वकीलों, पक्षकारों और लिपिकों तथा अन्य बीमारियों से ग्रस्त लोगों को अदालत में आने से बचना चाहिए। ऐसे लोग जिनमें फ्लू, बुखार, खांसी आदि के लक्षण हों, उन्हें अदालत में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।”
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने 29 अक्टूबर को कहा था कि वह 22 नवंबर से सामान्य सुनवाई शुरू करेगी। हालांकि ऑनलाइन सुनवाई का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
