दीपावली 2024: प्रेरणा का प्रकाश पर्व, संकल्प का दीया जला संपन्नता की ओर बढ़ें
दिवाली का पर्व समृद्धि का पर्व है। इस दिन मां लक्ष्मी उन सब घरों में अपनी कृपा पहुंचाती हैं। दिवाली पर मां लक्ष्मी का संदेश यही है कि हर परिस्थिति में न सिर्फ उम्मीद बल्कि बेहतरी की उम्मीद का दीया जलाए रखना चाहिए।
- Written By: मृणाल पाठक
(डिजाइन फोटो)
नवभारत डेस्क: दिवाली का पर्व हमारे पौरुष की साधना, समृद्धि का पर्व है। इस दिन मां लक्ष्मी उन सब घरों में अपनी कृपा पहुंचाती हैं, जो सम्पन्नता की कृपा पाने के लिए अपने घर को साफ सुथरा करके भरपूर उत्साह के साथ मां लक्ष्मी की अगवानी का इंतजार करते हैं। वास्तव में हमें अपनी विपन्नता से, अपनी परेशानियों से लड़ने के लिए अपने तन-मन को साफ सुथरा करके एक संकल्प का दीया जलाना चाहिए और उसकी रोशनी में समृद्धि की मंजिल की ओर बढ़ना चाहिए।
दिवाली पर मां लक्ष्मी का संदेश यही है कि हर परिस्थिति में न सिर्फ उम्मीद बल्कि बेहतरी की उम्मीद का दीया जलाए रखना चाहिए। जिस तरह से दिवाली की रात घी और तेल वाले ये दीये धरती के अंधेरे को दूर करते हैं, उसी तरह हमारे आत्मविश्वास और उम्मीदों का दीया हमारी जिंदगी के अंधेरों, हमारी परेशानियों की स्याह रात को पीछे छोड़कर खुशियों और समृद्धि की रोशन सुबह की ओर हमें ले जाता है।
इसलिए इस दिवाली पर जरूर अपने आत्मविश्वास का दीया जलाएं और अपनी स्थितियों से लड़ने के लिए किसी और की तरफ नहीं बल्कि अपनी हिम्मत और मेहनत की तरफ देखें। विपन्नता से उबरने का यह पहला मगर बेहद मजबूत कदम है। इससे हमारी सोच सकारात्मक बनती है और हमारा संकल्प दृढ़ होता है।
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मेहनत की महत्ता को पहचानें
दुनिया में बड़ी से बड़ी सफलता का पहला कदम हिम्मत और मेहनत के संकल्प के साथ रखा जाता है। दिवाली के मौके पर हम घर की साफ सफाई और उसे संवारने, सजाने में जो अनुशासन बरतते हैं, जो हिम्मत दिखाते हैं, वैसी ही मेहनत हमें अपनी परिस्थितियों को बेहतर बनाने के लिए करनी चाहिए।
किसी के सामने हाथ फैलाकर या किसी दूसरे के भरोसे रहकर आप अपनी जिंदगी के अंधेरे को दूर नहीं कर सकते। अगर अपनी जिंदगी के आंगन में खुशियों और समृद्धि का दीया जलाना है, तो अपनी मेहनत की महत्ता को पहचानें। कठिन परिश्रम करने से कभी पीछे न हटें।
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शिक्षा और कौशल का महत्व
विपन्नता से सम्पन्नता की ओर बढ़ने का सबसे सुनिश्चित सुपर हाइवे शिक्षा और कौशल का विकास ही है। शिक्षा न सिर्फ हमारे सोचने, समझने और संकल्प की क्षमता को बढ़ाती है बल्कि यह हमारे सामाजिक और आर्थिक जीवन को भी मूलभूत आधार देती है। इस दिवाली की रात खुशी का दीपक जलाते समय अपनी जिंदगी में शिक्षा और कौशल के महत्व को समझें और अपनी विपन्नता के अंधकार को बाय बाय कर दें।
जिस समाज में लोग लक्ष्मीपतियों की अनदेखी और उपेक्षा करते हैं, उस समाज के ज्यादातर लोग सम्पनता से वंचित रहते हैं। इसीलिए इनका रवैया नकारात्मक रहता है। इस दिवाली में संकल्प लें कि धन कमाने को किसी गाली के रूप में नहीं लेंगे और न किसी लक्ष्मीपुत्र को समाज के खलनायक के रूप में देखेंगे। लक्ष्मी के प्रति दिल के गहराइयों से सम्मान का भाव रखें। वो आपके जीवन से विपन्नता के कांटे निकाल बाहर फेकेंगी।
नए अवसरों की खोज करें
दिवाली का पर्व सिखाता है कि हमें हमेशा अपने संकल्पों के लिए एक रोशन ख्याल होना चाहिए। यही मानिये जब हम अपने विचारों में दृढ़ संकल्प की रोशनी भर लेते हैं तो वैसे भी अंधेरा दूर हो जाता है। इस दिवाली नये अवसरों की खोज करें। खासकर अगर आर्थिक रूप से परेशान हैं तो ये सब जरूर करें। सोचें कि अपने जीवन को कैसे बेहतर और सम्पन्न कर सकते हैं। क्योंकि एक बार आपका जीवन बेहतर और संकल्पवान हो जाए तो फिर वहां विपन्नता की दाल बिल्कुल नहीं गलती।
आज भारत में नौकरी पाने से ज्यादा अपने छोटे-मोटे व्यवसाय को स्थापित करने का महत्व है। आप पाएंगे कि अगर हम मेहनती हैं, अगर हम अनुशासित हैं तो हमारे जीवन में अंधकार की, परेशानी की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इस दिवाली इसी संकल्प का दीया जलाएं और महसूस करें कि कैसे इस दीये की रोशनी आपकी जिंदगी को जगर-मगर करने लगेगी।
लेख- वीना गौतम द्वारा
