Navabharat Nishanebaaz: नेता छोड़ रहे कांग्रेस का हाथ, पसंद आ रहा BJP का साथ
Navabharat Nishanebaaz Congress BJP Shift: कांग्रेस से नेताओं के लगातार भाजपा में शामिल होने के बीच पार्टी की संगठनात्मक पकड़, बदलते राजनीतिक समीकरण और चुनावी रणनीति को लेकर नई बहस तेज हो गई है।
- Written By: अंकिता पटेल
(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो )
Leaders Joining BJP: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज कितने ही नेता कांग्रेस का हाथ छोड़कर बीजेपी का साथ पकड़ने लगे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है? क्या 1885 में बनी 141 वर्ष पुरानी कांग्रेस के पंजे की पकड़ कमजोर हो गई है? एक जमाना था जब कांग्रेस से पंजा लड़ाने की कोई हिम्मत नहीं करता था। उसका टिकट मिलना चुनावी जीत की गारंटी बन जाता था। तब कहते थे कि कांग्रेस के नाम पर बिजली का खंभा भी खड़ा कर दो तो वह चुनाव जीत जाएगा। तब कांग्रेस नेता गर्व से कह सकते थे अपना हाथ जगन्नाथ!’
हमने कहा, ‘कांग्रेस का चुनाव चिन्ह पहले बैलजोड़ी था फिर उसे गाय-बछड़ा चुनाव चिन्ह मिला और इसके उपरांत उसे ऐसा हाथ मिला जो हस्तरेखा विज्ञान या पामिस्ट्री के लिहाज से दोषपूर्ण है। उस हाथ में भाग्य रेखा या लाइन ऑफ फेट ही नहीं है। लाइन ऑफ सन या प्रतिभा रेखा भी नहीं है, केवल हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा हैं वह भी कटी हुई या टूटी-फूटी। कांग्रेस अपने हाथ की रेखाएं सुधार ले तो उसकी सोई हुई किस्मत जाग जाएगी।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, अंधविश्वास मत फैलाइए। हाथ की लकीरों में क्या रखा है! व्यक्ति अपने कर्मों से खुद का भाग्य बनाता है। कांग्रेस को चाहिए कि इंडिया गठबंधन मजबूत करने के लिए अन्य विपक्षी दलों की ओर देखकर कहे साथी हाथ बढ़ाना साथी रे, एक अकेला थक जाए तो मिलकर बोझ उठाना !’ सहयोगी पार्टियों से कहना चाहिए- मांग के साथ तुम्हारा, मैंने मांग लिया संसार ! विपक्ष के सभी दलों के नेता एकसाथ बैठकर राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ देख सकते हैं। इससे उनकी एकजुटता की भावना मजबूत होगी, वे मजे से गा सकते हैं- तू अगर साथ देने का वादा करे, मैं यूं ही मस्त गीत गाता रहूं। वह यह भी गा सकते हैं-तेरा मेरा साथ रहे, धूप हो छाया हो, दिन हो या रात रहे!’
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हमने कहा, ‘आपका मतलब है कि राहुल गांधी यूपी विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव की साइकिल के कैरियर पर बैठ जाएं या फिर मायावती से निकटता बढ़ाकर ‘चल चल चल मेरे साथी ओ मेरे हाथी’ की धुन गुनगुनाने लगें! राहुल को समझना होगा कि बीजेपी की शातिर चाल का मुकाबला करने के लिए सिर्फ हाथ चुनाव चिन्ह काफी नहीं है, हाथ की सफाई भी तो चाहिए।’
