संपादकीय: अंततः कोकाटे की छिन गई कुर्सी
Kokate Loses Post : सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने माणिकराव कोकाटे का इस्तीफा स्वीकार कर लिया।किसी मंत्री के मनमाने व गैरकानूनी कार्यकलापों से सरकार की छवि पर आंच आने लगे तो मुख्यमंत्री को भी सोचना पड़ता।
- Written By: दीपिका पाल
अंततः कोकाटे की छिन गई कुर्सी (सौ.डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: आखिर मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने माणिकराव कोकाटे का इस्तीफा स्वीकार कर लिया।किसी मंत्री के मनमाने व गैरकानूनी कार्यकलापों से सरकार की छवि पर आंच आने लगे तो मुख्यमंत्री को भी सोचना पड़ता है कि ऐसे व्यक्ति को कैसे साथ रखें ! फर्जी हलफनामे के जरिए सरकारी कोटे से 2 फ्लैट हथियाने के मामले में नाशिक सत्र न्यायालय द्वारा खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे के खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी करने और हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्री के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया।उन्होंने कोकाटे के सभी विभाग छीनकर इन विभागों की जिम्मेदारी उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को सौंप दी।उनके पास से खेल एवं युवा कल्याण, अल्पसंख्यक विकास और औकाफ विभाग छीनकर मुख्यमंत्री ने दिखा दिया कि हमें आपकी कोई आवश्यकता नहीं है।कोकाटे का रवैया उस बाड़ के समान है जो खेत को खा जाती है।
कोकाटे ने 1995 में सरकारी आवास योजना के तहत फ्लैट हासिल करने के लिए धोखाधड़ी की थी।इस मामले में नाशिक सेशन्स कोर्ट ने उन्हें 2 वर्ष के कारावास तथा 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा को कायम रखा है।जब कोकाटे ने अदालत में जाना टाला तो कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए उनके खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी कर दिया।मनपा चुनाव के पहले महायुति सरकार के एक बड़े मंत्री पर कार्रवाई से राजनीति पर असर आना स्वाभाविक है।जिस तरह एनसीपी (अजीत) के नेता एक के बाद एक संदिग्ध मामलों में फंसते रहे हैं उससे मुख्यमंत्री का अप्रसन्न होना स्वाभाविक है।क्योंकि इससे सरकार की इमेज प्रभावित होती है।काग्रेस को भी इस वजह से मुद्दा मिल गया।कांग्रेस की मुंबई इकाई की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने कोकाटे को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की थी।उन्होंने दलील दी थी।
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा कांग्रेस नेता सुनील केदार को दोषी करार दिए जाने पर 24 घंटे में उन पर एक्शन लिया जाता है, तो कोकाटे के लिए क्यों अलग मापदंड अपनाया जा रहा है? कोकाटे पहले भी अपने विवादास्पद बयानों की वजह से चर्चा में रहे हैं।उन्होंने जनवरी में सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की बात स्वीकार की थी और कहा था कि किसी भी योजना में 2 से 4 प्रतिशत भ्रष्टाचार होने का मतलब यह नहीं है कि उसे बंद कर दिया जाए।उन्होंने फरवरी में 1 रुपये में फसल बीमा योजना का बचाव करते हुए किसानों की तुलना भिखारियों से की थी।कोकाटे ने कहा था कि भिखारी भी 1 रुपया नहीं लेते, लेकिन सरकार उतनी ही रकम में फसल बीमा दे रही है।मंत्री माणिकराव कोकाटे को जुलाई में विधानसभा में मोबाइल फोन पर रमी खेलते हुए पाया गया था।इसे लेकर विपक्ष ने सरकार को निशाने पर लिया था।उनका इस्तीफा मंजूर कर मुख्यमंत्री ने उचित कदम उठाया।
लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
