नवभारत विशेष: मिसाइलों से कहीं खाक न हो जाएं शेयर बाजार, लेने के देने पड़ सकते हैं
Market Rally Today: अमेरिका-ईरान तनाव कम होने के संकेत से वैश्विक बाजारों में तेजी दिखी। बीएसई 1000 अंक तक चढ़ा, हालांकि बाद में बढ़त घटकर करीब 650 अंक रह गई।
- Written By: अंकिता पटेल
Global Market Impact ( Source: Social Media )
Global Market Impact: हालांकि 24 मार्च 2026 को सुबह जब शेयर बाजार खुले तो वह पिछले कई दिनों के मुकाबले काफी उत्साहित थे। सुबह के पहले एक घंटे में बीएसई 1000 प्वॉइंट चढ़कर 73,650 अंकों तक पहुंच गया और निफ्टी भी अच्छी खासी बढ़त के साथ खुला, जिसकी वजह शायद यह थी कि ट्रंप न सिर्फ ईरान को दिए गए 48 घंटे के अपने अल्टीमेटम से पीछे हट गए थे बल्कि उन्होंने यह संदेश भी देने की कोशिश की थी कि अगले पांच दिनों तक अब ईरान पर कोई हमला नहीं किया जाएगा।
इस दौरान पूरी संभावना है कि युद्ध विराम हो जाएगा। इस कारण ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें थोड़ी घटीं, जिसका असर दुनियाभर के शेयर बाजार में देखने को मिला।
बीएसई की तरह जापान का निक्केई इंडेक्स भी 0.77 फीसदी चढ़कर 51,910 पर कारोबार करने लगा। इसी तरह दक्षिण कोरिया, हांगकांग और चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स भी सुबह 0.95 फीसदी चढ़कर ट्रेड करने लगा।
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लेकिन सुबह के 11:30 बजते-बजते बीएसई की बढ़त 1000 अंकों से घटकर 650 पर पहुंच गई। फिर भी बाजार में थोड़ी बहुत सकारात्मकता दिख रही थी।
ईरान ने मीडिया में आकर साफ-साफ कह दिया है कि उनकी ट्रंप से कोई बात नहीं हुई है और वह तब तक युद्ध विराम की नहीं सोचेगा, जब तक उसके लिए उचित मुआवजे पर हामी नहीं भरी जाएगी? क्या ईरान की यह शर्त अमेरिका को फिर से पागलपन के लिए नहीं उकसाएगी? पिछले 25 दिनों में जब से मध्य पूर्व कुरुक्षेत्र बना हुआ है, शेयर बाजार इस तरह हिचकोले खा रहा है।
भारत का मुख्य शेयर बाजार (बीएसई) इस दौरान 10 हजार प्वॉइंट तक नीचे जा चुका था और अगर बाजार की भाषा में कहें, तो करीब 58 करोड़ लाख की पूंजी स्वाहा हो चुकी थी।
अगर पिछले पांच दिनों के भीतर ही देखें तो बिकवाली के जरिए आईआईएफएस करीब 21 लाख करोड़ के शेयर बेच चुके हैं और यह अकेले भारत के शेयर बाजारों का हाल नहीं है।
पूरी दुनिया के शेयर बाजारों में पिछले करीब एक महीने के भीतर अगर बाजार के पूंजीकरण के हिसाब से देखें तो करीब 24 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट स्वाहा हो चुका है।
जब युद्ध धधकते हैं, तो स्वाभाविक रूप से सबसे पहले शेयर और पूंजी बाजार में ही आग लगती है। निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश, गोल्ड या डॉलर में रखना शुरू कर देते हैं।
हालांकि पिछले तीन दिनों के अंदर तीन ट्रेडिंग सेशन में सोना भी प्रति दस ग्राम 12 हजार रुपये से ज्यादा भारत में टूट चुका है। एशिया के सारे बड़े बाजार चाहे हैंगसँग हो, चाहे निक्कई हो या फिर चाहे बीएसई हो, सब तीन से पांच फीसदी नीचे चल रहे हैं।
यूरोप और अमेरिका का भी यही हाल है। हालांकि अमेरिका में नैस्डेक थोड़ी बेहतर स्थिति में है, लेकिन हथियार और टेक्नोलॉजी कंपनियों की बदौलत लगातार शेयर बाजार या वित्त बाजार मजबूत नहीं रह सकता, अगर दुनिया के आर्थिक भविष्य को बचाना है, तो मध्य पूर्व में अनिश्चित दिशा की तरफ बढ़ रहे युद्ध को हर हाल में पहले धीमा और फिर बिल्कुल शांत करना होगा।
इसके बाद ही बाजार स्थिर हो सकेंगे। भारत के बाजार अभी भी दुनिया के दूसरे बाजारों के मुकाबले कुछ सुरक्षित हैं, क्योंकि अभी समूची भारतीय अर्थव्यवस्था बाजार की नेटवर्क अर्थव्यवस्था का हिस्सा नहीं बनें।
भारत में अभी भी अनऑर्गेनाइज्ड क्षेत्र इतना बड़ा है कि जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा शेयर बाजार के दायरे से दूर है। फिर भी मध्य पूर्व के बम धमाकों से भारतीय अर्थव्यवस्था में भूचाल आना तय है। जिस तरह से यह युद्ध लगातार लंबा हो रहा है, उसे देखते हुए डर के बादल बहुत घने हो रहे हैं।
लेने के देने पड़ सकते हैं
कच्चे तेल का बाजार 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया था, वह 24 मार्च तक एक बार फिर से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा चुका है। निश्चित रूप से इससे वैश्विक मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ गया है और अमेरिका तथा यूरोप में मंदी की पदचाप सुनाई पड़ने लगी है, जिसका भारत में बुरा असर जल्द देखने में आएगा।
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क्योंकि इससे न केवल उपभोक्ता सामानों का निर्यात घटेगा बल्कि ऑफशोर गतिविधियां भी घटेंगी, मतलब यह कि भारत को आउटसोर्स से होने वाली आय पर ग्रहण लगेगा। स्टॉक मार्केट पतन के कगार पर है।
लेख-नरेंद्र शर्मा के द्वारा
