Navabharat Nishanebaaz: क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी को मिला पिता का साथ, BCCI ने दी मंजूरी
Bcci Permission Vaibhav Suryavanshi: उभरते क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के साथ उनके पिता संजीव सूर्यवंशी श्रीलंका, आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर जाएंगे। BCCI ने इसके लिए विशेष अनुमति दी है।
- Written By: अंकिता पटेल
(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Importance Of Parents Support: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, इंसान कितना ही बड़ा क्यों न हो जाए, अपने माता-पिता की नजरों में बच्चा ही रहता है। माता प्यार-दुलार-संस्कार देती है, तो पिता संरक्षण करता है। वे लोग भाग्यवान हैं जिनके सिर पर माता-पिता का साया है। कहा गया है- मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव ! 10 आचार्य के बराबर 1 पिता और 10 पिता समान 1 माता। मां ईश्वर का दूसरा रूप है।’
हमने कहा, ‘आज आप इतनी ज्ञानचर्चा क्यों कर रहे हैं? माता-पिता को कौन याद नहीं करता। जब किसी मराठी भाषी बच्चे को चोट लगती है तो वह कहता है- आई गं! जब हिंदी भाषी बच्चा किसी मुसीबत में फंसता है तो कहता है अरे बाप रे! पिता रक्षा करता है, प्रोटेक्शन देता है। अब देखिए न, वैभव सूर्यवंशी जैसे विस्फोटक बल्लेबाज के साथ उसके पिता संजीव सूर्यवंशी भी श्रीलंका जा रहे हैं।
इसके बाद वह उसके साथ आयरलैंड व इंग्लैंड भी जाएंगे। बीसीसीआई ने वैभव सूर्यवंशी के पिता को उसके साथ जाने की अनुमति प्रदान की है। वैभव सूर्यवंशी का कुछ दिनों पहले इंडिया ए टीम के लिए चयन हुआ। शीघ्र ही वह भारत की सीनियर टीम का हिस्सा भी बन जाएगा।’
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वैभव सूर्यवंशी के साथ पिता के विदेश दौरे पर छिड़ी चर्चा
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, जब पूरी टीम, कोच, मैनेजर सब एक साथ जा रहे हैं, तो वैभव के पिता को साथ में जाने की क्या जरूरत ? उनकी औलाद तो वैसे ही फौलाद है, जो बहुत तेजी से रन बनाकर विपक्षी टीम के गेंदबाजों की सिट्टी-पिट्टी गुम कर देता है।
लगातार सिक्सर पर सिक्सर मारता चला जाता है। सब मानते हैं कि भारतीय क्रिकेट को वैभव सूर्यवंशी के रूप में दूसरा सचिन तेंदुलकर मिल गया। यह 15 वर्ष का तूफान और भारत की शान है। उसके पिता को चाहिए था कि उसे अकेले जाने देते।’
विदेश जाने वाले बेटे की चिंता या ओवर प्रोटेक्शन पर बहस
हमने कहा, ‘कुछ भी हो वैभव अभी बच्चा है, एडल्ट नहीं, उसके माता-पिता को उसकी फिक्र होना स्वाभाविक है। उसके खाने-पीने, रहने-सोने और स्वास्थ्य की चिंता पिता से ज्यादा कौन करेगा। विदेश के नए माहौल में पिता के साथ रहने से उसका हौसला बढ़ेगा।’
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पड़ोसी ने कहा, ‘पक्षी का बच्चा भी उड़ना सीखने के बाद घोंसला छोड़ देता है। वैभव में पहले ही बहुत हौसला है। कहावत है-सिंह-बाज के पुत्र को झपट सिखावत कौन ! उसके पिता उसे ओवर प्रोटेक्शन दे रहे हैं। जिंदगी के महासागर में वह खुद ही लहरों के थपेड़े खाकर तैरना सीख जाएगा।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
