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नवभारत विशेष: विधानसभा चुनावों में हर सत्तारूढ़ पार्टी की परीक्षा

CEC Election Announcement: विपक्ष के महाभियोग की तैयारी के बीच चुनाव आयोग ने 5 राज्यों में चुनाव घोषित किए। एसआईआर और मतदाता सूची में कमी को लेकर सियासत गरमाई।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Mar 17, 2026 | 07:03 AM

India Assembly Elections 2026 ( सोर्स: सोशल मीडिया )

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India Assembly Elections 2026: ऐसे समय पर जब समूचा विपक्ष एकजुट होकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध महाभियोग लाने की तैयारी कर रहा है, ठीक उसी समय देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुड्डुचेरी के विधानसभा चुनावों की घोषणा की।

यह विधानसभा चुनाव इसलिए खास हैं, क्योंकि तमिलनाडु को छोड़कर सभी 4 राज्यों में जो सरकारें हैं, वह एक से ज्यादा बार लगातार सत्ता में काबिज सरकारें हैं, बंगाल में ममता सरकार लगातार 3 बार सत्ता में रहने का कार्यकाल पूरा करके अगर जीतेगी, तो चौथी बार सत्ता में प्रवेश करेगी।

जबकि केरल में मौजूदा लेफ्ट गठबंधन सरकार अगर जीती तो तीसरी बार सरकार बनाने के लिए उतरेगी। जबकि असम में एनडीए लगातार तीसरी और पुड्डुचेरी में दूसरी बार सरकार बनाने की कोशिश करेगी।

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अकेला तमिलनाडु ही ऐसा राज्य है, जहां मौजूदा डीएमके दूसरी बार सत्ता में आने का सपना देख रही है। इन 5 राज्यों के अलावा इसी समय गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और त्रिपुरा की 8 विधानसभा सीटों पर 2 चरणों में उपचुनाव होंगे।

विपक्ष यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उसे सत्ता से बेदखल करने के लिए केंद्र सरकार के इशारे पर राष्ट्रीय चुनाव आयोग एसआईआर के माध्यम से इसे अंजाम दे रहा है। एसआईआर के बाद सभी राज्यों में मतदाताओं की संख्या में काफी कमी आई है।

बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7.34 करोड़ थी। मगर एसआईआर के बाद बंगाल में अब कुल रजिस्टर्ड मतदाता 6.44 करोड़ रह गए हैं। जबकि इनमें 5.2 लाख मतदाता ऐसे हैं जो 2021 में नहीं थे।

एसआईआर के बाद बंगाल में तकरीबन 1 करोड़ मतदाता घट गाए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व में समूचा विपक्ष मिलकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध महाभियोग लाने की कोशिश कर रहा है।

बंगाल की ही तरह तमिलनाडु में भी एसआईआर के जरिए प्रदेश सरकार को बदलने की कोशिश की बात हो रही है। तमिलनाडु में भी 2021 में जब चुनाव हुए थे, ती कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 6.28 करोड़ थी।

जबकि एसआईआर के बाद 60 लाख रजिस्टर्ड मतदाता कम हो गए हैं। अब कुल मतदाता 5.67 करोड़ बचे हैं। इसमें भी 12.51 लाख ऐसे मतदाता हैं जो 2021 में नहीं थे। इस तरह देखा जाए तो तमिलनाडु में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं की कमी हुई है।

डीएमके सरकार का आरोप है कि उसके पारंपरिक समर्थक मतदाताओं का वोटर लिस्ट से नाम काटकर उसको हराने की कोशिश है। ऐसे ही आरोप केरल में भी लगाए जाने की कोशिश हो रही है, जबकि केरल में कुल मतदाता 5 लाख ही घटे हैं।

असम में एसआईआर नहीं हुआ, इसलिए वहां यह बात नहीं है। जबकि 9.44 लाख मतदाताओं वाले केंद्रशासित प्रदेश पुड्डुचेरी में भी एसआईआर के बाद से 60 हजार मतदाताओं की संख्या घटी है जबकि 23 हजार मतदाता पहली बार चुनाव में हिस्सा लेंगे, कुल मिलाकर जिन राज्यों में विपक्षी पार्टियां सत्तारूढ़ हैं, वह इस तरह का संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि एसआईआर के जरिए केंद्र सरकार इन्हें सत्ता से बेदखल करना चाहती है।

यह भी पढ़ें:-नवभारत निशानेबाज: कथा करवाई, नहीं दी दक्षिणा कथावाचक को देना पड़ा धरना

2024 के लोकसभा चुनावों के बाद सही मायनों में ये पांच राज्य विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं जिनसे पता चलेगा कि देश में समर्थन की बयार सत्ता पक्ष के हित में बह रही है या उसके विरुद्ध इन चुनावों में सभी सत्तारूढ़ पार्टियों की साख और लोकप्रियता दांव पर है, चाहे वह विपक्षी राजनीतिक पार्टियां हों या केंद्र की सत्ता में मौजूद गठबंधन से रिश्ता रखती हों।

SIR से सभी राज्यों में मतदाता घटे

बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7.34 करोड़ थी। मगर एसआईआर के बाद बंगाल में अब कुल रजिस्टर्ड मतदाता 6.44 करोड़ रह गए हैं। जबकि इनमें 5.2 लाख मतदाता ऐसे हैं जो 2021 में नहीं थे। एसआईआर के बाद बंगाल में तकरीबन 1 करोड़ मतदाता घट गए हैं।

लेख- नरेंद्र शर्मा के द्वारा

Assembly elections 2026 announced amid opposition impeachment row election commission india

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Published On: Mar 17, 2026 | 07:03 AM

Topics:  

  • Assembly Elections
  • DMK
  • Election Commission of India
  • Navbharat Editorial
  • NDA

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