नवभारत संपादकीय: आजादी के 250 साल वैश्विक औसत से 6 गुना GDP; जानिए कैसे दुनिया का सबसे समृद्ध देश बना अमेरिका?
America Economic Growth: 250 वर्षों में अमेरिका की आर्थिक प्रगति के पीछे प्राकृतिक संसाधन, मजबूत आधारभूत ढांचा, शिक्षा में निवेश, सड़क नेटवर्क व प्रवासी श्रमिकों के योगदान को प्रमुख कारण माना जाता है।
- Written By: अंकिता पटेल
अमेरिका, आर्थिक विकास,(सोर्स- नवभारत डिजाइन फोटो)
America Development Model Analysis: अपनी आजादी के 250 वर्ष मना चुका अमेरिका विश्व के अन्य देशों की तुलना में अधिक समृद्ध है, तो उसकी वजह उसकी उपजाऊ जमीन, प्राकृतिक संसाधन, सिंचाई की उत्तम व्यवस्था तथा शिक्षा व आधारभूत ढांचे में किया गया भारी निवेश है। 1776 में जब अमेरिका ने ब्रिटेन से स्वाधीनता हासिल की, तब उसकी आबादी केवल 25 लाख थी, जो अब 34 करोड़ हो चुकी है। इस समय अमेरिका में प्रति व्यक्ति जीडीपी 94,000 डॉलर है, जो वैश्विक औसत से 6 गुनी है।
जबकि ब्रिटेन की जीडीपी 55,000 डॉलर है। अमेरिका की प्रगति के मूल में व्यापक सड़क निर्माण है जिसने पूर्व से पश्चिम को जोड़ रखा है। सऊदी अरब प्रतिदिन 10 एमएम बैरल क्रूड ऑयल का उत्पादन करता है जबकि अमेरिका उससे ज्यादा 13 से 14 एमएम बैरल का प्रतिदिन उत्पादन करता है। अमेरिका की प्रगति में बाहरी देशों से आए लोगों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। चीनी मजदूरों ने वहां रेल की पटरियां बिछाईं।
प्रवासी प्रतिभाओं ने अमेरिका को बनाया महाशक्ति
यूरोप के विभिन्न देशों से आए लोगों ने उद्योग, व्यापार, कृषि क्षेत्र में काम किया। अमेरिका में डच, जर्मन, आयरिश मूल के लोग हैं। लाखों भारतीय भी अमेरिका में रहते हैं जो पढ़ाई या नौकरी के लिए वहां आए। जर्मनी में हिटलर के अत्याचार से त्रस्त यहदी भी भागकर अमेरिका आए।
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आइंस्टीन और ओपनहाइमर जैसे वैज्ञानिकों ने अमेरिका की वैज्ञानिक प्रगति में उल्लेखनीय योगदान दिया। यदि अमेरिका में अन्य देशों के लोग रहने नहीं आते, तो वहां की आबादी इस समय आधी रह जाती। 1960 में विश्व की जीडीपी में 40 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका का था जो अब भी लगभग 27 प्रतिशत है।
अप्रवासी श्रमिकों के दम पर मजबूत बनी अमेरिकी अर्थव्यवस्था
अमेरिका के हर 4 डॉक्टरों में से एक अप्रवासी मूल का है। वहां की अर्थव्यवस्था खर्चीली और उपभोग प्रधान है। वेतनमान कम से कम 9 डॉलर प्रति घंटा है। कुशल श्रमिकों के लिए यह और ज्यादा है। बेकरी उद्योग में 15 डॉलर प्रति घंटा पारिश्रमिक है। डिपार्टमेंटल स्टोर में अधिकांश सामान विदेशी रहता है। क्योकि अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग लागत ज्यादा आती है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था में हथियार निर्माता कंपनियों का बड़ा योगदान है। इनका माल खपाने के लिए विश्व में कहीं न कहीं युध्द होते रहना आवश्यक है।
नवाचार और अप्रवासियों ने अमेरिका को बनाया वैश्विक महाशक्ति
यूरोप के देशों को सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की देखरेख पर अमेरिका बड़ी रकम खर्च करता है। वह नाटो सैन्य संधि का 60 से 65 प्रतिशत खर्च उठाता है। समुद्री मार्ग से उसका 80 प्रतिशत से अधिक व्यापार होता है।
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अमेरिका के उद्योगपति प्रतिवर्ष 500 से 600 अरब डॉलर चैरिटी या परोपकार में खर्च करते हैं। अंतरिक्ष अभियान में नासा सबसे आगे है। प्रौद्योगिकी, वित्त, स्वास्थ्य एरोस्पेस व इंटरनेट में अमेरिका संपूर्ण विश्व में अग्रणी है। गूगल, स्पेस एक्स का विकास अप्रवासियों या उनकी अगली पीढ़ी ने किया है। निरंतर अनुसंधान में अमेरिका की प्रगति निहित है।
