Navabharat Nishanebaaz: अच्छे दिन का करो इंतजार, कभी तो आएगी जीवन में बहार
Political Commentary Achhe Din Promise: 'अच्छे दिन' के लंबे इंतजार पर आधारित यह व्यंग्य राजनीति, चुनावी वादों और जनता की उम्मीदों पर हल्के-फुल्के अंदाज में कटाक्ष करता है।
- Written By: अंकिता पटेल
(सोर्स- नवभारत डिजाइन फोटो)
Navabharat Nishanebaaz Political Promise Satire India: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज नेताओं ने देश की जनता को वादा किया था कि अच्छे दिन आएंगे। तब से हम लगातार अच्छे दिन का इंतजार कर रहे हैं। अब तो लग रहा है कि इंतेहा हो गई इंतजार की, आई न कुछ खबर मेरे यार की।’
हमने कहा, आप वह गीत सुनते रहिए सीखा ना सबक तूने प्यार का, तू जाने क्या मजा इंतजार का! इतना मानकर चलिए कि प्रतीक्षा का फल मीठा होता है। आपकी अच्छे पूरी होगी। क्योंकि सोमवार से रविवार तक 7 दिन ही होते हैं। इसलिए नमो नमो जपते हुए 7 दिन की भागवत कथा सुनिए।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, किसी ने हमें बताया कि हर दिन शुभ या अच्छा होता है। इंसान को पॉजिटिव सोच रखते हुए मन को समझाना चाहिए कि जो हुआ वह अच्छा हुआ, आगे और भी अच्छा होगा। परिचितों का अभिवादन कर गुड डे कहो तो वह भी जवाब में गुड डे कहेंगे। आप चाहें तो गुड डे नामक बिस्किट भी खा सकते हैं।’
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हमने कहा, यह मत समझिए कि इस देश में लोगों के अच्छे दिन आए ही नहीं। नेताओं को पार्टी बदलने के लिए करोडों रूपये दिए जाते हैं। धर्मस्थल के कर्ताधर्ताओं के पास चढ़ावा रूपी धन की बाढ़ चली आती है। ठेकेदार इंजीनियर साल में 4 बार एक ही सड़क खोदते और बनवाते हैं। इससे उनके अच्छे दिन कायम रहते हैं। परीक्षाओं के पेपर लीक करने वाले कोचिंग क्लास के बॉस के लिए हर इम्तहान अच्छे दिन लाता है।’
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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, नेता और उच्चाधिकारी अच्छे दिन का लक्ष्य रखते हुए महामार्ग का मास्टर प्लान बनाते हैं और किसानों की जमीन औने-पौने दाम देकर हथिया लेते हैं। बाद में प्लॉट डालकर वही भूखंड करोड़ों रूपये में बिल्डरों को बेचा जाता है। पुलिस, एक्साइज, पीडब्ल्यूडी, जमीन की रजिस्ट्री करने वाले निबंधक विभाग के लिए हर दिन अच्छा रहता है। चुनाव में नोट के बदले वोट का सौदा करने वालो के लिए भी वह दिन अच्छा रहता है।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
