
भारत ने जारी किए AI शासन दिशा-निर्देश (डिजाइन फोटो)
AI Governance Guidelines: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने गत 5 नवंबर को एआई शासन-विधि दिशा-निर्देश जारी किए। यह 66-पृष्ठों का डॉक्यूमेंट है, जो भारतीय समाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टेक्नोलॉजी को विनियमित करने और उसके प्रयोग को प्रोत्साहित करने के तरीकों को रेखांकित करता है।
सवाल यह है कि दिशा-निर्देश क्या है? यह आवश्यक क्यों है? इनसे एआई इस्तेमाल और बौद्धिक सम्पत्ति अधिकारों के संदर्भ में क्या चिंताएं उत्पन्न होती हैं? भारत में एआई का इस्तेमाल निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिका के बाद भारत लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (एलएलएम) जैसे चैटजीपीटी आदि का प्रयोग सबसे अधिक करता है। अगर यह सब अनियंत्रित रहेगा तो अराजकता की आशंका बनी रहेगी।
दिशा-निर्देशों में कहा गया है, ‘भारत का लक्ष्य एआई की परिवर्तनकारी क्षमता का दोहन करना है, समावेशी विकास व वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए, लेकिन साथ ही उन खतरों को भी संबोधित करना जो व्यक्तियों व समाज के लिए इससे उत्पन्न हो सकते हैं।’
इन दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप जुलाई 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा गठित समिति ने दिया है। इस समिति का नेतृत्व आईआईटी मद्रास में सेंटर फॉर रिस्पॉसिबल एआई के प्रमुख बालारमण रविंद्रन ने किया है।
दिशा-निर्देशों में सिफारिश की गई है कि सरकार के विभिन्न विभागों जैसे मंत्रालयों, क्षेत्रीय नियामकों, मानक स्थापित करने वाली एजेंसीज आदि के बीच में कम्युनिकेशन की लाइनें स्थापित की जाएं। यह गुट अक्सर आपस में मुलाकातें करें और कानून, स्वैच्छिकप्रतिबद्धता, मानक तय करने और ‘एआई सुरक्षा टूल्स के एक्सेस में वृद्धि’ में बदलाव लाने के लिए सुझाव दें।
इसकी निगरानी करने के लिए ‘एआई गवर्नेस ग्रुप’ होगा। मंत्रालयों से अलग दिशा-निर्देशों में वित्तीय उद्योग के लिए आरबीआई (जिसने अगस्त 2025 में बैंकिंग व वित्तीय आयोग के लिए अपनी एफआरईई-एआई कमेटी रिपोर्ट स्थापित की थी), नीति आयोग और मानक संगठन जैसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स को भी सिफारिश की गई है।
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प्राइवेट सेक्टर को भी सलाह दी गई है कि वह ‘सभी भारतीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करे, स्वैच्छिक फ्रेमवर्क अपनाए, पारदर्शी रिपोर्ट्स प्रकाशित करे, शिकायत निवारण व्यवस्था उपलब्ध कराए और टेक्नो-लीगल समाधानों से खतरों को कम करे’।
सिफारिश की गई है कि राज्य सरकारें एआई को अपनाने में वृद्धि करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में पहल करें और डाटा व कंप्यूटिंग संसाधनों को एक्सेस कराने में इजाफा करें, दूसरी ओर सिफारिशों में एआई व बौद्धिक सम्पत्ति से संबंधित चिंताओं का भी संज्ञान लिया गया है और कॉपीराइट कानून में परिवर्तन का सुझाव दिया है।
दिशा-निर्देशों में अन्य भारत-विशिष्ट वरीयताओं को भी दोहराया गया है, जैसे भारतीय भाषाओं के लिए एआई मॉडल्स बनाना। एक सिफारिश में स्थानीय तौर पर प्रासंगिक डाटासेट्स पर बल दिया गया है ताकि सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व करने वाले मॉडल्स व एप्लीकेशंस बनाए जा सकें।
दिशा-निर्देशों के अनुसार, कंटेंट प्रमाणीकरण एक ज्वलंत मुद्दा है। दिशा-निर्देशों के जारी होने से पहले ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उन नियमों का प्रस्ताव रखा था, जिनके तहत सोशल मीडिया कंपनियों की एआई के जरिए बनाई गई तस्वीरों व वीडियोज को लेबल करना होता है।
दिशा-निर्देशों के कुछ अन्य हिस्से भी हैं जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा पहले से ही किए जा रहे कामों के अनुसार हैं, मसलन इंडिया एआई मिशन साझा कंप्यूट फैसिलिटी के लिए पहले से ही ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) हासिल कर रहा है और शोधकर्ताओं व स्टार्टअप्स से यह कंप्यूट कैपेसिटी की एक्सेस साझा कर रहा है। एक अन्य सिफारिश भी गतिशील प्रतीत होती है कि डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) को एआई व नीति सक्षम बनाने वालों से मिला दिया जाए।
लेख- शाहिद ए चौधरी के द्वारा






