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Navabharat Nishanebaaz: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, किसी भी पार्टी में प्रमुख नेता के प्रति निष्ठा और पूर्ण समर्पण जरूरी है। जो ऐसा नहीं करता और आदेश मानने की बजाय अपनी अक्ल चलाने लगता है उसे दूध से मक्खी की तरह निकालकर बाहर फेंक दिया जाता है। आम आदमी पार्टी में भी यही होता आया है। वहां केजरीवाल ही आका और सभी के काका है। जिसने ज्यादा होशियारी दिखाई या कुछ ज्यादा लोकप्रियता पाईं उसे बोरिया-बिस्तर बांधकर निकल जाना पड़ता है। केजरीवाल से उनके जो साथी अलग हुए उनमें प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास, स्वाति मालीवाल का समावेश है।’
हमने कहा, ‘अब इस लिस्ट में राघव चड्डा का नाम भी जोड़ लीजिए जो पार्टी का माउथपीस बनने की बजाय सचमुच आम आदमी की आवाज उठाने लगे थे। उन्हें पार्टी ने राज्यसभा में उपनेतापद से हटा दिया। उन पर आरोप है कि जब मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और केजरीवाल जेल में थे तब बीजेपी पर टूट पड़ने और मोदी सरकार की तीखी आलोचना करने के बजाय राघव चड्डा राज्य भर में अपना प्रोफाइल बढ़ाने में लगे थे और सेल्फ-प्रमोशन कर रहे थे। उन्होंने तब एयरपोर्ट पर समोसे के ज्यादा दाम को लेकर सवाल पूछा था। राघव पर यह भी आरोप है कि केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद वह 6 महीने गायब रहे। आंख का इलाज कराने के नाम पर लंदन चले गए थे। केजरीवाल के सहयोगी सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्डा से कहा कि तुम बीजेपी से सवाल पूछने से डरते हो। जो डर गया वो समझो मर गया!’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, राघव चड्डा ने अपने बयान में कहा कि मैंने राज्यसभा में सक्रियता दिखाकर आम जनता के मुद्दे उठाए, एयरपोर्ट में महंगे खाने तथा टोल प्लाजा पर लूट का प्रश्न उठाया था।’
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हमने कहा, ‘राघव पर आरोप है कि वह बीजेपी से समझौता कर चुके हैं। उन्होंने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किया तथा पंजाब गए तो वहां भगवंत मान सरकार के काम में दखलंदाजी करने लगे। आप ने संसद के सेक्रेटेरिएट को पत्र भेजा है कि राघव चड्डा को सदन में बोलने के लिए प्रतिबंधित किया गया है। इस पर राघव ने कहा- मेरी चुप्पी को हार मत समझो। मैं वो नदी हूं जो समय आने पर बाढ़ में बदल जाती है।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा