क्या है वट सावित्री व्रत नियम(सौ.सोशल मीडिया)
26 मई को वट सावित्री व्रत पूरे देश भर में रखा जाएगा। हिंदू धर्म में इस व्रत का बड़ा महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, वट सावित्री व्रत महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए रखती है।
आपको बता दें, इस त्योहार को लेकर महिलाओं में खास उत्साह और उमंग देखा जाता है। इस दिन नवविवाहिता से लेकर सुहागन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर वट वृक्ष यानि बरगद के पेड़ की पूजा करती है। इस दिन ज्येष्ठ मास की सोमवती अमावस्या तिथि पड़ती है, जिसके कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
यदि आप पहली बार वट सावित्री व्रत रख रही हैं, तो इस व्रत के दौरान कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। इन नियमों को जानकर आप व्रत को पूरी श्रद्धा और विधिपूर्वक कर सकती हैं, जिससे आपके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का वास हो। आइए जानते हैं वह महत्वपूर्ण नियम कौन से हैं, जिन्हें वट सावित्री व्रत करते समय ध्यान में रखना चाहिए।
क्या है वट सावित्री व्रत नियम
-वट सावित्री व्रत में ज्यादातर महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं।
-अगर इस दिन स्वास्थ्य कारणों से निर्जला व्रत रखना संभव न हो, तो फलाहार लिया जा सकता है, लेकिन -इसका निर्णय अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही लें।
-इस व्रत का मुख्य विधान वट वृक्ष की पूजा करना है।
-सुबह स्नान आदि के बाद साफ कपड़े पहनें और शृंगार करें।
-वट वृक्ष की विधि-विधान से पूजा करें।
-पूजा में रोली, मौली, अक्षत, फूल, फल, मिठाई, धूप, दीप और जल का उपयोग करें।
-वट वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें।
-फिर, कच्चे सूत या मौली के धागे को वृक्ष के चारों ओर सात बार लपेटते हुए परिक्रमा करें।
-हर परिक्रमा के बाद सावित्री और सत्यवान की कथा का ध्यान करें।
-व्रत के दिन दान-पुण्य जरूर करें।
-अगले दिन सुबह स्नान व पूजा के बाद व्रत खोलें।
सनातन धर्म वट पूजा का महत्व
सनातन धर्म वट वृक्ष यानी बरगद का पेड़ अमरता का प्रतीक माना जाता है। यह एक बहुत पुराना और विशाल वृक्ष होता है, जो दशकों तक जीवित रहता है। इसे व्रत के दौरान पूजा जाता है क्योंकि यह पति की लंबी उम्र और जीवन में स्थिरता की कामना का प्रतीक है।
वट सावित्री व्रत में महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती है। इसके साथ परिक्रमा करने के बाद सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती है। कहते हैं कि, बरगद के वृक्ष में तीनों देवताओं यानि ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है इसलिए पूजा में वट वृक्ष को शामिल किया गया है।
इसे लेकर पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिस तरह सावित्री अपने समर्पण से अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस लाई थीं, उसी तरह इस शुभ व्रत को रखने वाली विवाहित महिलाओं को एक सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।